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महाशिवरात्रि 2025: नागवंशीय राजाओं के बनाए मंदिर में शिव पार्वती विवाह - MAHASHIVRATRI 2025

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के भोपालपटनम में स्थित शिवालय धार्मिक आस्था का केंद्र है.

Mahashivratri 2025
महाशिवरात्रि 2025 (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : Feb 26, 2025, 12:55 PM IST

बीजापुर: भोपालपटनम में स्थित शिवालय में छत्तीसगढ़ के साथ ही तेलंगाना और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में भक्त महाशिवरात्रि पर पहुंचे हैं. इंद्रावती नदी में स्नान कर श्रद्धालु भोलेनाथ का दर्शन कर रहे हैं.

मंदिर निर्माण का इतिहास: मंदिर में शिवलिंग के साथ ही माता पार्वती और नाग देवता की प्रतिमा है. मंदिर के पास स्थित तालाब के किनारे भी नाग देवता की प्रतिमाएं मौजूद हैं. माना जाता है कि यह मंदिर नागवंशीय शासकों ने बनाया है, क्योंकि उनके राज्य का प्रतीक चिन्ह नाग देवता ही था. रियासत काल में बारसूर में नागवंशीय शासकों का राज्य था और राज्य का विस्तार बीजापुर से लेकर भोपालपटनम तक फैला हुआ था.

Mahashivratri 2025
भोपालपटनम शिवालय में महाशिवरात्रि (ETV Bharat Chhattisgarh)

एक ऐतिहासिक जानकारी के मुताबिक 14 वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजा अन्नम देव वारंगल ने सैन्य संगठन करने बस्तर की ओर कूच किया. इस दौरान उन्होंने पहले भद्रकाली संगम में एक शिवलिंग स्थापित कर भोपालेश्वर नामकरण किया. यह आज भी संगम स्थल पर मौजूद है. भद्रकाली में काली मां की स्थापना भी उन्हीं के द्वारा की गई .

भद्रकाली से आगे बढ़े तो पहला नगर भोपालपटनम पड़ा. संगम स्थित शिवलिंग को चूंकि भोपालेश्वर नाम दिया गया, इसलिए इस नगर का नाम भी भूपाला पटनम रखा गया. बाद में यह भोपालपटनम हो गया. माना जाता है कि इससे इस बात की पुष्टि होती है कि 14 वीं शताब्दी में अन्नम देव के समय भी भोपालपटनम में शिव मंदिर मौजूद था.

Mahashivratri 2025
इंद्रावती नदी के किनारे शिवमंदिर (ETV Bharat Chhattisgarh)

मंदिर का जीर्णोद्धार: मंदिर का जीर्णोद्धार कई चरणों में पूरा हुआ और इसके जीर्णोद्धार में कई भक्तों का योगदान रहा. भोपालपटनम के लोगों के मुताबिक साल 1921 में भी मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया. इसकी पुष्टि मंदिर के प्राचीन कलश से होती है. जिसमें तमिल भाषा में जीर्णोद्धार 1921 में किया जाना अंकित है और यह जीर्णोद्धार तंजावुरों ने कराया था.

घी के दीपक जलते थे तिमेड से भोपालपटनम शिवालय तक: स्थानीय बताते हैं कि उनके बुजुर्गों से उन्होंने सुना है कि कभी तिमेड से भोपालपटनम सड़क के दोनों ओर महाशिवरात्रि पर्व पर तंजावुरों द्वारा घी के दीपक जलाए जाते थे. दीपोत्सव का यह सिलसिला महाशिवरात्रि से प्रारंभ होकर होली तक लगातार चलता रहता था. तत्कालीन तिमेड का स्वरूप आज जैसा नहीं था, बल्कि वह एक सम्पन्न नगर था.

Mahashivratri 2025
महाशिवरात्रि 2025 (ETV Bharat Chhattisgarh)

मंदिर का वर्तमान स्वरूप: मंदिर को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने में कई भक्तों ने अपना योगदान दिया. 70 के दशक में एक बार ध्वज स्तंभ बदला गया, जिसमें भीमारपुरामैया व्यापारी (साहूकार) और उनके भाई भीमारपुरामचंद्रम व्यापारी( चंडी साहूकार ) का प्रमुख योगदान था.

गर्भ गृह के सामने हॉल में छत निर्माण: छत टीना टप्पर से बना था. स्थानीय नागरिकों के आपसी सहयोग से 1977-78 में कांक्रीट का छत ढलाई किया गया. छत निर्माण के बाद श्रेय लेने की होड़ में निर्माण कार्य में व्यवधान उत्पन्न हो गया.

अधूरे निर्माण को गति देने नव युवक मंडल आगे आया: स्थानीय नवयुवकों ने अधूरे निर्माण को पूर्ण करने का संकल्प लिया. जिसमें प्रमुख रूप से मारुति कापेवार, गट्टू सुधाकर, रामनारायण ताटी, केतारप शिव शंकर, तोकल धर्मराज का सराहनीय योगदान था. मंदिर के अधूरे कार्य की शुरुआत 1981 में हुई और 1983 को कार्य पूर्ण हुआ.

Mahashivratri 2025
नागवंशीय राजाओं के बनाए मंदिर में महाशिवरात्रि (ETV Bharat Chhattisgarh)

मेला प्रारंभ: निर्माण पूर्ण होने के बाद नवयुवक मंडल के बैनर तले महाशिवरात्रि पर्व पर मेले का आयोजन 1983 से हर साल किया जा रहा है. बाद में शिव मंदिर समिति ने मेला आयोजन का काम अपने हाथ में लिया है.

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बीजापुर: भोपालपटनम में स्थित शिवालय में छत्तीसगढ़ के साथ ही तेलंगाना और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में भक्त महाशिवरात्रि पर पहुंचे हैं. इंद्रावती नदी में स्नान कर श्रद्धालु भोलेनाथ का दर्शन कर रहे हैं.

मंदिर निर्माण का इतिहास: मंदिर में शिवलिंग के साथ ही माता पार्वती और नाग देवता की प्रतिमा है. मंदिर के पास स्थित तालाब के किनारे भी नाग देवता की प्रतिमाएं मौजूद हैं. माना जाता है कि यह मंदिर नागवंशीय शासकों ने बनाया है, क्योंकि उनके राज्य का प्रतीक चिन्ह नाग देवता ही था. रियासत काल में बारसूर में नागवंशीय शासकों का राज्य था और राज्य का विस्तार बीजापुर से लेकर भोपालपटनम तक फैला हुआ था.

Mahashivratri 2025
भोपालपटनम शिवालय में महाशिवरात्रि (ETV Bharat Chhattisgarh)

एक ऐतिहासिक जानकारी के मुताबिक 14 वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजा अन्नम देव वारंगल ने सैन्य संगठन करने बस्तर की ओर कूच किया. इस दौरान उन्होंने पहले भद्रकाली संगम में एक शिवलिंग स्थापित कर भोपालेश्वर नामकरण किया. यह आज भी संगम स्थल पर मौजूद है. भद्रकाली में काली मां की स्थापना भी उन्हीं के द्वारा की गई .

भद्रकाली से आगे बढ़े तो पहला नगर भोपालपटनम पड़ा. संगम स्थित शिवलिंग को चूंकि भोपालेश्वर नाम दिया गया, इसलिए इस नगर का नाम भी भूपाला पटनम रखा गया. बाद में यह भोपालपटनम हो गया. माना जाता है कि इससे इस बात की पुष्टि होती है कि 14 वीं शताब्दी में अन्नम देव के समय भी भोपालपटनम में शिव मंदिर मौजूद था.

Mahashivratri 2025
इंद्रावती नदी के किनारे शिवमंदिर (ETV Bharat Chhattisgarh)

मंदिर का जीर्णोद्धार: मंदिर का जीर्णोद्धार कई चरणों में पूरा हुआ और इसके जीर्णोद्धार में कई भक्तों का योगदान रहा. भोपालपटनम के लोगों के मुताबिक साल 1921 में भी मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया. इसकी पुष्टि मंदिर के प्राचीन कलश से होती है. जिसमें तमिल भाषा में जीर्णोद्धार 1921 में किया जाना अंकित है और यह जीर्णोद्धार तंजावुरों ने कराया था.

घी के दीपक जलते थे तिमेड से भोपालपटनम शिवालय तक: स्थानीय बताते हैं कि उनके बुजुर्गों से उन्होंने सुना है कि कभी तिमेड से भोपालपटनम सड़क के दोनों ओर महाशिवरात्रि पर्व पर तंजावुरों द्वारा घी के दीपक जलाए जाते थे. दीपोत्सव का यह सिलसिला महाशिवरात्रि से प्रारंभ होकर होली तक लगातार चलता रहता था. तत्कालीन तिमेड का स्वरूप आज जैसा नहीं था, बल्कि वह एक सम्पन्न नगर था.

Mahashivratri 2025
महाशिवरात्रि 2025 (ETV Bharat Chhattisgarh)

मंदिर का वर्तमान स्वरूप: मंदिर को वर्तमान स्वरूप प्रदान करने में कई भक्तों ने अपना योगदान दिया. 70 के दशक में एक बार ध्वज स्तंभ बदला गया, जिसमें भीमारपुरामैया व्यापारी (साहूकार) और उनके भाई भीमारपुरामचंद्रम व्यापारी( चंडी साहूकार ) का प्रमुख योगदान था.

गर्भ गृह के सामने हॉल में छत निर्माण: छत टीना टप्पर से बना था. स्थानीय नागरिकों के आपसी सहयोग से 1977-78 में कांक्रीट का छत ढलाई किया गया. छत निर्माण के बाद श्रेय लेने की होड़ में निर्माण कार्य में व्यवधान उत्पन्न हो गया.

अधूरे निर्माण को गति देने नव युवक मंडल आगे आया: स्थानीय नवयुवकों ने अधूरे निर्माण को पूर्ण करने का संकल्प लिया. जिसमें प्रमुख रूप से मारुति कापेवार, गट्टू सुधाकर, रामनारायण ताटी, केतारप शिव शंकर, तोकल धर्मराज का सराहनीय योगदान था. मंदिर के अधूरे कार्य की शुरुआत 1981 में हुई और 1983 को कार्य पूर्ण हुआ.

Mahashivratri 2025
नागवंशीय राजाओं के बनाए मंदिर में महाशिवरात्रि (ETV Bharat Chhattisgarh)

मेला प्रारंभ: निर्माण पूर्ण होने के बाद नवयुवक मंडल के बैनर तले महाशिवरात्रि पर्व पर मेले का आयोजन 1983 से हर साल किया जा रहा है. बाद में शिव मंदिर समिति ने मेला आयोजन का काम अपने हाथ में लिया है.

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