कुल्लू (Himachal Pradesh): सनातन धर्म में साल भर में कुल चार नवरात्रि के पर्व आते हैं. इसी कड़ी में मां दुर्गा के प्रिय दिन चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल को भारत में शुरू होंगे. वहीं, इस नवरात्रि का समापन 17 अप्रैल को होगा. ऐसे में इन 9 दिनों तक माता के नौ रूपों के विशेष पूजा अर्चना की जाएगी और भक्तों के द्वारा मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए हवन यज्ञ का भी आयोजन किया जाएगा.
बता दें कि इस साल नवरात्रि में माता किस वाहन पर सवार होकर आती है. इसके भी अलग-अलग मायने शास्त्रों में लिखे गए हैं. चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी और अपने भक्तों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देंगी.
माता के घोड़े पर आना होता है अशुभ
शास्त्रों के अनुसार अगर नवरात्रि में मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आती हैं तो माता दुर्गा के इस वाहन को शुभ नहीं माना जाता है और मां दुर्गा के घोड़े पर सवार होकर आने से ऐसे संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में सत्ता में कुछ बदलाव होने वाला है. इसके अलावा युद्ध का भी सामना करना पड़ सकता है. वहीं, मां दुर्गा के घोड़े पर सवार होकर आने से प्राकृतिक आपदा की भी संभावना बनती है.
हर बार अलग होती है माता की सवारी
आचार्य विजय कुमार का कहना है कि वैसे तो मां दुर्गा शेर पर सवार होती हैं, लेकिन नवरात्रि के दौरान दिन के अनुसार हर बार माता की सवारी अलग होती है. ऐसे में अगर शनिवार और मंगलवार के दिन नवरात्रि की शुरुआत होती है तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं. गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि शुरू होते हैं तो माता की सवारी डोली होती है.
माता की घोड़े की सवारी मतलब सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में बड़े बदलाव
आचार्य विजय कुमार का कहना है कि बुधवार के दिन नवरात्रि शुरू होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं. वैसे ही सोमवार और रविवार को नवरात्रि शुरू होती है तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं. ऐसे में इस साल माता की सवारी घोड़ा होगा और घोड़े पर सवार होकर माता का आना अशुभ संकेत माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार जब भी माता घोड़े पर सवार होकर आई हैं तो इससे सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में बड़े-बड़े बदलाव देखने को मिले हैं.