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राजनीतिक गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी में होती है चर्चा, जानें कौन है फेमस IFS चतुर्वेदी ब्रदर्स, एक है व्हिसलब्लोवर - IFS CHATURVEDI BROTHERS

भ्रष्टाचार के खुलासों को लेकर IFS दो भाई अक्सर चर्चाओं में रहते हैं. ताजा मामले में छोटा भाई फिर से सुर्खियों में हैं.

IFS CHATURVEDI BROTHERS
भ्रष्टाचार के खुलासों से जुड़ा IFS चतुर्वेदी ब्रदर्स का रिकॉर्ड (FILE PHOTO- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : Feb 26, 2025, 10:10 PM IST

देहरादून (नवीन उनियाल): इन दिनों उत्तराखंड के एक आईएफएस अधिकारी चर्चाओं में हैं. वर्तमान में चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (CCF) अनुसंधान की जिम्मेदारी देख रहे संजीव चतुर्वेदी के एक प्रति नियुक्ति और मूल्यांकन रिपोर्ट से जुड़े मामले से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के दो न्यायाधीशों ने खुद को अलग किया था. इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में भ्रष्टाचार उजागर संबंधित एक मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स से संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर जवाब मांगा है. बैक टू बैक मामलों को लेकर चतुर्वेदी फिर से सुर्खियों में आ गए हैं.

हालांकि, संजीव को लेकर ऐसा ये पहली बार नहीं हुआ है. 2015 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित होने वाले व्हिसलब्लोवर (भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला) संजीव चतुर्वेदी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में अग्रणी रहे हैं. यही नहीं, जब संजीव के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाई गई तो उनके बड़े भाई राजीव का नाम भी सामने आया. राजीव भी अपने भाई के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए नजर आते हैं. ये दोनों भाई न केवल अखिल भारतीय सेवा के चर्चित अफसर हैं, बल्कि इनके फैसले अकसर सत्ताधारियों के गले की फांस भी बन जाते हैं.

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले चतुर्वेदी ब्रदर्स अबतक कई मामलों को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आमजन तक की जुबां पर आ चुके हैं. संजीव चतुर्वेदी उत्तराखंड में बतौर चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (CCF) अनुसंधान की जिम्मेदारी देख रहे हैं, जबकि राजीव चतुर्वेदी राजस्थान में चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट के रूप में तैनात हैं.

IFS RAJEEV CHATURVEDI
वर्तमान में राजस्थान में सीसीएफ का जिम्मा संभाल रहे हैं राजीव चतुर्वेदी (FILE PHOTO- ETV Bharat)

कौन हैं राजीव चतुर्वेदी: राजीव चतुर्वेदी ने आईआईटी बीएचयू से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. वह अपने छोटे भाई संजीव चतुर्वेदी से 3 साल बड़े हैं. राजीव चतुर्वेदी सबसे पहले भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से जुड़े. इसके बाद उन्होंने यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन (UPSC) में ट्राई किया और सफल भी हुए. साल 2002 में राजीव चतुर्वेदी और संजीव चतुर्वेदी दोनों ने ही भौतिक और रसायन विज्ञान के एक ही वैकल्पिक विषय के साथ सफलता हासिल की.

इन मामलों से चर्चाओं में आए IFS राजीव: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय वन सेवा में शामिल होने के बाद राजीव चतुर्वेदी को राजस्थान कैडर मिला. उनके ऐसे कुछ खास फैसले भी थे, जिन्होंने न केवल राजीव चतुर्वेदी को एक ईमानदार अधिकारी के रूप में उन्हें पहचान दी, बल्कि उन्हें विवादों में भी ला दिया. राजीव चतुर्वेदी ने राजस्थान सरकार द्वारा किए गए तबादले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में चुनौती दी. जिसमें कहा गया कि 2002 बैच के राजीव चतुर्वेदी का न्यूनतम 2 साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें हटा दिया गया. साल 2019 में मामले पर सरकार को कोर्ट के समक्ष अपनी गलती माननी पड़ी.

सरकारी भूमि पर निर्माण मामले पर मचा बवाल: इसके अलावा सरिस्का टाइगर रिजर्व में वन और राजस्व भूमि पर होटल बनाने के सनसनीखेज मामले में भी राजीव चतुर्वेदी की अहम भूमिका रही. इस मामले में न केवल बड़े सफेदपेशों का नाम आ रहा था, बल्कि कई बड़े अधिकारी भी इसमे संलिप्त बताए जा रहे थे. दबाव बना तो उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई जिसमें सीसीएफ राजीव चतुर्वेदी शामिल थे. जांच रिपोर्ट में पूरे मामले की कमेटी ने परतें खोल दी, जिस पर काफी राजनीतिक बवाल भी मचा.

फील्ड स्टाफ से मारपीट मामले पर मुखर हुए IFS: इसके अलावा राजीव चतुर्वेदी से जुड़ा बड़ा मामला सत्ताधारी विधायक पर मुकदमे से जुड़ा था. दरअसल आरोप था कि वन विभाग के फील्ड स्टाफ पर उस समय हमला कर दिया गया जब वह अवैध खनन को रोकने के लिए मौके पर पहुंची थी. बात सत्ताधारी दल के विधायक से जुड़ी थी. लिहाजा वन विभाग पर भारी दबाव होना भी लाजमी था. लेकिन इसके बावजूद अपने फील्ड स्टाफ के साथ डटकर खड़े रहे राजीव चतुर्वेदी की अहम भूमिका के कारण विधायक पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया. विधायक पर यह मुकदमा न्यायालय के माध्यम से करवाया गया था.

IFS SANJEEV CHATURVEDI
वर्तमान में IFS संजीव चतुर्वेदी उत्तराखंड में चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट अनुसंधान की जिम्मेदारी देख रहे हैं. (FILE PHOTO- ETV Bharat)

छोटे भाई पा चुके हैं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार: वहीं आईएफएस राजीव चतुर्वेदी के छोटे भाई आईएफएस संजीव चतुर्वेदी रेमन मैग्सेसे पुरस्कार पा चुके हैं और उनकी चर्चा गाहे बगाहे राजनीतिक गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में होती रहती है.

हरियाणा के बाद सेंट्रल हेल्थ मिनिस्ट्री में उजागर किए भ्रष्टाचार के मामले: दरअसल, संजीव चतुर्वेदी हरियाणा कैडर के अधिकारी के तौर पर तैनात हुए थे. वह भी 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं. संजय चतुर्वेदी ने हरियाणा में कई भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का खुलासा किया और यह मामले कोर्ट तक भी पहुंचे. इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में भी उन्होंने अपनी प्रति नियुक्ति के दौरान सेवाएं दी और यहां भी उन्होंने विभिन्न भ्रष्टाचार के मामलों को उठाया. हालांकि प्रति नियुक्ति खत्म होने पर उन्होंने हरियाणा वापस न जाकर यूपीएससी से कैडर बदलने का आग्रह किया. जिस पर उन्हें उत्तराखंड कैडर दिया गया.

दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा एम्स से जवाब: वहीं, एक ताजा घटनाक्रम में दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स से संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर जवाब मांगा है, जिस पर उनके बीच चल रही कानूनी लड़ाई में उसके खिलाफ झूठी गवाही देने का आरोप है. संजीव चतुर्वेदी एम्स में बतौर चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) कार्यरत रहे हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच ने संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर एम्स को नोटिस जारी किया है.

मिल चुका है रेमन मैग्सेसे पुरस्कार: संजीव चतुर्वेदी एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं और उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का यही रवैया उन्हें देशभर में चर्चाओं में रखता है. बड़ी बात यह है कि संजीव चतुर्वेदी ने और एजेंसियों को भी कोर्ट में चुनौती दी है. साथ ही मामलों को लेकर लगातार कोर्ट की शरण लिए हुए हैं. संजीव चतुर्वेदी एक व्हीसलब्लोअर है और इसीलिए उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार भी मिला है.

अब तक 13 जजों ने मामलों से खुद को किया अलग: वहीं हाल ही में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के दो जजों ने खुद को IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले से अलग कर लिया है. इसकी जानकारी खुद संजीव चतुर्वेदी ने ईटीवी भारत को दी. संजीव चतुर्वेदी के मामले में अब तक 13 न्यायाधीश खुद को न्यायिक रूप से अलग कर चुके हैं.

अखिल भारतीय सेवा के यह दो भाई एक जैसी कार्य प्रणाली के कारण समय समय पर देशभर में छाए रहते हैं. हाल ही में संजीव चतुर्वेदी की चर्चा आने के बाद इन दोनों भाइयों के फैसलों और रवैये को लेकर ब्यूरोक्रेसी में भी काफी चर्चाएं हैं.

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देहरादून (नवीन उनियाल): इन दिनों उत्तराखंड के एक आईएफएस अधिकारी चर्चाओं में हैं. वर्तमान में चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (CCF) अनुसंधान की जिम्मेदारी देख रहे संजीव चतुर्वेदी के एक प्रति नियुक्ति और मूल्यांकन रिपोर्ट से जुड़े मामले से केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के दो न्यायाधीशों ने खुद को अलग किया था. इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में भ्रष्टाचार उजागर संबंधित एक मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स से संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर जवाब मांगा है. बैक टू बैक मामलों को लेकर चतुर्वेदी फिर से सुर्खियों में आ गए हैं.

हालांकि, संजीव को लेकर ऐसा ये पहली बार नहीं हुआ है. 2015 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित होने वाले व्हिसलब्लोवर (भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला) संजीव चतुर्वेदी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने में अग्रणी रहे हैं. यही नहीं, जब संजीव के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाई गई तो उनके बड़े भाई राजीव का नाम भी सामने आया. राजीव भी अपने भाई के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए नजर आते हैं. ये दोनों भाई न केवल अखिल भारतीय सेवा के चर्चित अफसर हैं, बल्कि इनके फैसले अकसर सत्ताधारियों के गले की फांस भी बन जाते हैं.

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले चतुर्वेदी ब्रदर्स अबतक कई मामलों को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आमजन तक की जुबां पर आ चुके हैं. संजीव चतुर्वेदी उत्तराखंड में बतौर चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (CCF) अनुसंधान की जिम्मेदारी देख रहे हैं, जबकि राजीव चतुर्वेदी राजस्थान में चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट के रूप में तैनात हैं.

IFS RAJEEV CHATURVEDI
वर्तमान में राजस्थान में सीसीएफ का जिम्मा संभाल रहे हैं राजीव चतुर्वेदी (FILE PHOTO- ETV Bharat)

कौन हैं राजीव चतुर्वेदी: राजीव चतुर्वेदी ने आईआईटी बीएचयू से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. वह अपने छोटे भाई संजीव चतुर्वेदी से 3 साल बड़े हैं. राजीव चतुर्वेदी सबसे पहले भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से जुड़े. इसके बाद उन्होंने यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन (UPSC) में ट्राई किया और सफल भी हुए. साल 2002 में राजीव चतुर्वेदी और संजीव चतुर्वेदी दोनों ने ही भौतिक और रसायन विज्ञान के एक ही वैकल्पिक विषय के साथ सफलता हासिल की.

इन मामलों से चर्चाओं में आए IFS राजीव: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय वन सेवा में शामिल होने के बाद राजीव चतुर्वेदी को राजस्थान कैडर मिला. उनके ऐसे कुछ खास फैसले भी थे, जिन्होंने न केवल राजीव चतुर्वेदी को एक ईमानदार अधिकारी के रूप में उन्हें पहचान दी, बल्कि उन्हें विवादों में भी ला दिया. राजीव चतुर्वेदी ने राजस्थान सरकार द्वारा किए गए तबादले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में चुनौती दी. जिसमें कहा गया कि 2002 बैच के राजीव चतुर्वेदी का न्यूनतम 2 साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें हटा दिया गया. साल 2019 में मामले पर सरकार को कोर्ट के समक्ष अपनी गलती माननी पड़ी.

सरकारी भूमि पर निर्माण मामले पर मचा बवाल: इसके अलावा सरिस्का टाइगर रिजर्व में वन और राजस्व भूमि पर होटल बनाने के सनसनीखेज मामले में भी राजीव चतुर्वेदी की अहम भूमिका रही. इस मामले में न केवल बड़े सफेदपेशों का नाम आ रहा था, बल्कि कई बड़े अधिकारी भी इसमे संलिप्त बताए जा रहे थे. दबाव बना तो उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई जिसमें सीसीएफ राजीव चतुर्वेदी शामिल थे. जांच रिपोर्ट में पूरे मामले की कमेटी ने परतें खोल दी, जिस पर काफी राजनीतिक बवाल भी मचा.

फील्ड स्टाफ से मारपीट मामले पर मुखर हुए IFS: इसके अलावा राजीव चतुर्वेदी से जुड़ा बड़ा मामला सत्ताधारी विधायक पर मुकदमे से जुड़ा था. दरअसल आरोप था कि वन विभाग के फील्ड स्टाफ पर उस समय हमला कर दिया गया जब वह अवैध खनन को रोकने के लिए मौके पर पहुंची थी. बात सत्ताधारी दल के विधायक से जुड़ी थी. लिहाजा वन विभाग पर भारी दबाव होना भी लाजमी था. लेकिन इसके बावजूद अपने फील्ड स्टाफ के साथ डटकर खड़े रहे राजीव चतुर्वेदी की अहम भूमिका के कारण विधायक पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया. विधायक पर यह मुकदमा न्यायालय के माध्यम से करवाया गया था.

IFS SANJEEV CHATURVEDI
वर्तमान में IFS संजीव चतुर्वेदी उत्तराखंड में चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट अनुसंधान की जिम्मेदारी देख रहे हैं. (FILE PHOTO- ETV Bharat)

छोटे भाई पा चुके हैं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार: वहीं आईएफएस राजीव चतुर्वेदी के छोटे भाई आईएफएस संजीव चतुर्वेदी रेमन मैग्सेसे पुरस्कार पा चुके हैं और उनकी चर्चा गाहे बगाहे राजनीतिक गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में होती रहती है.

हरियाणा के बाद सेंट्रल हेल्थ मिनिस्ट्री में उजागर किए भ्रष्टाचार के मामले: दरअसल, संजीव चतुर्वेदी हरियाणा कैडर के अधिकारी के तौर पर तैनात हुए थे. वह भी 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं. संजय चतुर्वेदी ने हरियाणा में कई भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का खुलासा किया और यह मामले कोर्ट तक भी पहुंचे. इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में भी उन्होंने अपनी प्रति नियुक्ति के दौरान सेवाएं दी और यहां भी उन्होंने विभिन्न भ्रष्टाचार के मामलों को उठाया. हालांकि प्रति नियुक्ति खत्म होने पर उन्होंने हरियाणा वापस न जाकर यूपीएससी से कैडर बदलने का आग्रह किया. जिस पर उन्हें उत्तराखंड कैडर दिया गया.

दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा एम्स से जवाब: वहीं, एक ताजा घटनाक्रम में दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स से संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर जवाब मांगा है, जिस पर उनके बीच चल रही कानूनी लड़ाई में उसके खिलाफ झूठी गवाही देने का आरोप है. संजीव चतुर्वेदी एम्स में बतौर चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) कार्यरत रहे हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच ने संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर एम्स को नोटिस जारी किया है.

मिल चुका है रेमन मैग्सेसे पुरस्कार: संजीव चतुर्वेदी एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं और उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का यही रवैया उन्हें देशभर में चर्चाओं में रखता है. बड़ी बात यह है कि संजीव चतुर्वेदी ने और एजेंसियों को भी कोर्ट में चुनौती दी है. साथ ही मामलों को लेकर लगातार कोर्ट की शरण लिए हुए हैं. संजीव चतुर्वेदी एक व्हीसलब्लोअर है और इसीलिए उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार भी मिला है.

अब तक 13 जजों ने मामलों से खुद को किया अलग: वहीं हाल ही में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के दो जजों ने खुद को IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले से अलग कर लिया है. इसकी जानकारी खुद संजीव चतुर्वेदी ने ईटीवी भारत को दी. संजीव चतुर्वेदी के मामले में अब तक 13 न्यायाधीश खुद को न्यायिक रूप से अलग कर चुके हैं.

अखिल भारतीय सेवा के यह दो भाई एक जैसी कार्य प्रणाली के कारण समय समय पर देशभर में छाए रहते हैं. हाल ही में संजीव चतुर्वेदी की चर्चा आने के बाद इन दोनों भाइयों के फैसलों और रवैये को लेकर ब्यूरोक्रेसी में भी काफी चर्चाएं हैं.

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