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स्पेशल रिपोर्ट: 1984 के सिख दंगे में लाशों के ढेर पर पांव रखकर बहनोई की लाश ढूंढने वाले 'अवतार' को आज भी सरकार से मदद की दरकार - तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या

साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों ने हजारों सिख परिवारों को गहरे घाव दिए और यह घाव आज तक भरे नहीं हैं. इन परिवारों में एक परिवार जयपुर का भी है. 1984 के सिख विरोधी दंगों को 34 साल हो चुके हैं, जो भी उस दिन को याद करता है उसकी आंखें भर आती हैं.

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Published : Nov 5, 2019, 4:50 PM IST

जयपुर.राजधानी में रहने वाले अवतार सिंह के परिवार को भी साल 1984 के सिख विरोधी दंगों ने बहुत गहरा घाव दिया है. दंगे के समय अवतार सिंह अपने केश कटवाकर जयपुर से दिल्ली पहुंचे थे और लाशों के ढेर में से अपने बहनोई की लाश को काफी मशक्कत के बाद निकाला था. जब ईटीवी भारत ने दंगे के बारे में उनसे बात की तो उनकी आंखें भर आईं.

1984 में भड़के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को सरकार से मदद की दरकार

साल 1984 के दंगे की बुरी यादों को याद करते हुए अवतार सिंह ने बताया कि उस समय तीस हजारी कोर्ट के पास लाशों के ढेर लगे हुए थे. ट्रकों में लाशों को भरकर लाया जा रहा था. दंगे में हजारों सिखों की मौत हुई थी. बहनोई हरजीत की लाश ढूंढने के लिए उन्हें 4 से 5 घंटे का समय लगा. उनके जैसे सैकड़ों लोग अपने परिजनों की लाश को ढेर में ढूंढ रहे थे.

ट्रेन के डिब्बे में लगा दी थी आग

अवतार सिंह ने बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के समय उनके जीजाजी हरजीत सिंह जयपुर आए थे. वे ज्वेलरी का काम करते थे. 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगे की सूचना उन्हें नहीं मिल पाई. उस समय सूचना का कोई माध्यम नहीं था. एक दूरदर्शन था उस पर भी दंगों के बारे में कोई खबर नहीं दिखाई गई, क्योंकि भारत सरकार ने उस पर बैन लगा दिया था.

दूरदर्शन सिख विरोधी दंगों के अलावा सब कुछ बता रहा था. 1 नवंबर 1984 को उनके जीजाजी हरजीत सिंह जयपुर रेलवे स्टेशन से पिंक सिटी एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए रवाना हुए. भिवाड़ी और गुड़गांव के बीच दंगाइयों ने ट्रेन पर हमला कर दिया. उस ट्रेन में 21 सिख सवार थे. हमले के समय सभी सिख एक डिब्बे में आ गए. दंगाइयों ने डिब्बे को आग लगा दी और सभी 21 सिख लोगों की हत्या कर दी.

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34 साल से दिल्ली नहीं गई आशा कौर

अपने पति हरजीत सिंह की हत्या के बाद अवतार सिंह की बहन आशा कौर जयपुर आ गईं, आशा के दो बेटियां हैं. वह एक बेटी को लेकर जयपुर आ गईं. लेकिन कुछ दिनों बाद उसके ससुराल वाले उस बेटी को लेकर चले गए. आज उन दोनों बेटियों की भी शादी हो चुकी है. दोनों बेटियां बबली और पूजा अपनी मां से अनजान हैं. हरजीत की मौत के बाद उसके माता-पिता भी आशा कौर से नाराज हो गए.

दिल्ली और राजस्थान सरकार के खिलाफ है आक्रोश

अपनी आप बीती बताते हुए अवतार सिंह ने कहा कि साल 1984 के दंगों से प्रभावित जयपुर का एकमात्र परिवार हमारा ही था. राज्य सरकार को पता होने के बावजूद भी आज तक सरकार ने उनकी बहन के लिए कुछ नहीं किया. उस समय दिल्ली सरकार ने 10 हजार रुपए का चेक दिया था, लेकिन उसके बाद भी कई बार मुआवजे का ऐलान हुआ, लेकिन उनकी बहन को कोई मुआवजा नहीं मिला.

इस दौरान उन्होंने राजस्थान सरकार और अपने समाज के उच्च पदाधिकारियों पर भी गुस्सा निकाला. उन्होंने कहा कि आज तक उनके परिवार के लिए किसी ने कोई मदद नहीं की. 1984 में केश कटवाने के बाद अवतार सिंह ने आज तक केश नहीं बढ़ाये और ना ही पगड़ी पहनी. उन्होंने अपने बच्चों के केश भी उस समय डर के मारे कटवा दिए थे.

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दोषियों को मिलनी चाहिए सजा

अवतार सिंह ने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद कई वीडियो ऐसे आए थे, जिसमें कांग्रेस के दिग्गज नेता भीड़ को भड़का रहे थे. लेकिन उनके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. 34 साल बीतने के बावजूद भी दोषियों को सजा नहीं हुई. उन्होंने मांग की है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए.

आशा कौर नहीं आईं सामने

साल 1984 के दंगों ने आशा कौर को गहरा जख्म दिया है और जब भी कोई उनसे दंगों के बारे में बात करता है तो उनके वह जख्म हरे हो जाते हैं. उन दंगों को याद करने से आशा कौर आज भी घबराती हैं, इसीलिए वह किसी से इस बारे में बात नहीं करती हैं. आशा कौर आज अपने भाइयों के पास ही रहती हैं. वह ब्यूटी पार्लर में काम करके एक आत्म सम्मान की जिंदगी जी रही हैं.

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