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भोपाल से बाहर शिवराज सरकार का कैबिनेट चिंतन शिविर; पढ़ें... पचमढ़ी मीटिंग का हिडन एजेंडा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने मंत्रिमंडल के साथ कई बार आउटिंग के लिए गए. हर बार का मकसद सरकार की योजनाओं का रिव्यू और उसके बाद अच्छे तरीके से जमीनी स्तर पर लागू करना रहा. लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि 15 साल सीएम रहने के बाद भी सीएम शिवराज को अपनी बनाई योजनाओं को फिर नए सिरे से क्यों लागू करना पड़ रहा है और वो भी मंत्रालय से बाहर. बताया जाता है कि शिवराज सरकार ऐसी बैठकें करके अपनी पार्टी का वोट बैंक बढ़ाने का प्रयास कर रही है. (Hidden agenda of Pachmadhi shivir) ( BJP worries for Mission 2023)

Hidden agenda of Pachmadhi chintan shivir
पचमढ़ी चिंतन शिविर का हिंडन एजेंडा

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Published : Mar 28, 2022, 5:57 PM IST

Updated : Mar 28, 2022, 6:37 PM IST

भोपाल। मिशन 2023 के लिए बीजेपी ने पूरा दमखम लगा रखा है. इसके लिए शिवराज सरकार अभी से प्रयास में जुट गई है. दो दिन पहले पचमढ़ी चिंतन शिविर इसी कड़ी का एक प्रयास है. साल 2018 में भोपाल के कोलार डैम के जंगल में बने गेस्ट हाउस में बैठक शिवराज ने मंत्रियों के साथ बैठक की थी. इसमें सरकार का आत्मनिर्भर रोड मैप बनाने का खाका तैयार किया गया था. लेकिन अभी तक मप्र आत्मनिर्भर सिर्फ कागजों में ही बना है. खंडवा के हनुमंतिया टापू पर भी कैबिनेट की बैठक की गई थी. बाद में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद एक साल बाद सीएम शिवराज ने अपने मंत्रिमंडल सदस्यों के साथ सीहोर में बैठक की थी. बैठक बाहर करने का मकसद योजनाओं की ग्राउंड रियलिटी जानने का है. मंत्रीगण सीधे शिवराज से वन टू वन करते हैं. मंत्री अपनी बात बेबाकी से रख पाते हैं और सीएम की व्यस्तता उतनी नहीं होती. पचमढी में चिंतन बैठक का भी यही मकसद बताया जाता है लेकिन बैठक के पीछे शिवराज का मकसद बीजेपी का वोट बैंक बढ़ाने का है .

2018 के चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत 41 था :2018 के चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत 41 था. लेकिन अब पार्टी का मकसद है कि इस वोट बैंक को 10 प्रतिशत बढ़ाना. यदि 51 फीसदी हो गया तो सरकार बनना पक्का और वो भी भारी बहुमत के साथ. पचमढ़ी में जिन योजनाओं पर मंथन हुआ, उसमें खासतौर से वोट बैंक को साधने की कवायद दिखी. जैसे महिला वोट बैंक, जोकि आधी आबादी है. सोशल इंजीनियरिंग में माहिर शिवराज सिंह ने महिला वोटर्स के साथ ही 60 प्लस के लोगो के लिए तीर्थदर्शन योजना की बात की है. यानी करीब 70 लाख वोटर्स को साधने की कोशिश है. छात्र और छात्राओं के लिए स्कीम में बदलाव, जिससे यूथ वोटर्स को साधा जाएगा.

यूपी सरकार की तर्ज पर काम करेगी शिवराज : साल 2018 के पहले भी शिवराज ने 4 से 5 बैठकें भोपाल के बाहर मंत्रियो के साथ की थीं. इनका नतीजा सिफर ही रहा. इनका परिणाम जनता ने 2018 के चुनावों में बीजेपी को हराकर दिखा दिया . यूपी की तर्ज पर मामा बुलडोजर, मुफ्त राशन आदि पर फोकस किया जाएगा. बढ़ती महंगाई से ध्यान भटकाने की कोशिश इस बार कैबिनेट की बैठक में दिखी. जैसे गरीब तबका जोकि पार्टी का वोट बैंक है, उसके लिए मुफ्त राशन, मुफ्त मकान दे दिया गया तो इस तबके का वोट भाजपा को जाएगा . इसलिए अब शिवराज सरकार यूपी की तर्ज पर काम करने जा रही है.

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बैठकों का खासा फायदा नहीं दिखा :भोपाल से बाहर हुई कैबिनेट की मीटिंग का कोई खास असर नहीं दिखा. यदि होता तो 2018 में सत्ता से बाहर नहीं जाती शिवराज सरकार. वहीं विपक्ष दल कांग्रेस का कहना है कि शिवराज सरकार की दो दिन की बैठक सिर्फ इवेंट बनकर रह गई. मप्र कांग्रेस के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि पचमढ़ी में कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनी. कन्यादान योजना, तीर्थदर्शन योजना आदि पुरानी योजनाओं पर चिंतन हुआ. ज्वलंत मुद्दे जैसे किसान को लेकर कोई नई योजना नहीं. समर्थन मूल्य पर कोई बातचीत नहीं. महिला अपराधों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं. युवाओं को रोजगार के लिए किसी तरह का कोई जिक्र नहीं. (Hidden agenda of Pachmadhi shivir) ( BJP worries for Mission 2023)

Last Updated : Mar 28, 2022, 6:37 PM IST

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