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सदन में गतिरोध : बजट पर नेता प्रतिपक्ष के जवाब पर संशय, अब दलित कार्ड से सरकार को घेर रही कांग्रेस - RAJASTHAN VIDHAN SABHA RUCKUS

राजस्थान विधानसभा में बजट पर नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री का जवाब 27 फरवरी को आना है, इस पर संशय बना हुआ है.

सदन में गतिरोध जारी
सदन में गतिरोध जारी (ETV Bharat Jaipur)

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : Feb 26, 2025, 12:09 PM IST

जयपुर : राजस्थान विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध 6 दिनों से जारी है. इंदिरा गांधी पर मंत्री की ओर से'दादी' की टिप्पणीको कार्यवाही से हटाने, मंत्री से माफी मंगवाने और छह निलंबित सदस्यों को बहाल करने की मांग कर रही कांग्रेस सदन की कार्यवाही से वॉक आउट कर विधानसभा के बाहर धरना दे रही है. इस बीच 27 फरवरी को बजट अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का जवाब होगा या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है.

विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर भी सदन में गतिरोध के चलते नेता प्रतिपक्ष का संबोधन नहीं हो पाया था. ऐसे में अब कांग्रेस दलित कार्ड के दम पर सरकार को घेरने में जुटी है. कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पहली बार दलित नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है. सरकार नहीं चाहती कि दलित नेता सदन में अपनी बात रखे, इसलिए सरकार जान-बूझकर गतिरोध बनाए रखना चाहती है ताकि सवाल नहीं पूछे जा सके.

विधानसभा में गतिरोध जारी (ETV Bharat Jaipur)

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राज्यपाल के अभिभाषण पर भी नहीं हुआ संबोधन :राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र का आगाज राज्यपाल के अभिभाषण से हुआ था. उनके अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर 7 फरवरी को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संबोधन होना था, लेकिन मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की ओर से सरकार पर लगाए गए फोन टैपिंग के आरोपों के कारण सदन में गतिरोध के चलते टीकाराम जूली का संबोधन नहीं हो पाया. मुख्यमंत्री ने भी हंगामे के बीच अपना संबोधन पूरा किया. अब 27 फरवरी को बजट अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री का जवाब आना है.

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नेता प्रतिपक्ष को नहीं बोलने दिया :प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि टेलीफोन टैप करने का मामला आया था. विपक्ष सरकार से जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहा था. उन्हें एक शब्द बोलना था कि सरकार ने टेलीफोन टैप नहीं किया, लेकिन जान-बूझकर गतिरोध बनाए रखा. सरकार जवाब दे देती तो सदन में शांति हो जाती और अभिभाषण पर बहस होती. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अपनी बात रखते कि सरकार ने सालभर में क्या काम किए और क्या नहीं किए, लेकिन मौका नहीं दिया गया. मुख्यमंत्री ने खुद ने दो घंटे भाषण दे दिया. इसी से इनकी मंशा जाहिर होती है कि ये (भाजपा) सदन चलाना ही नहीं चाहते. अब भी सरकार का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है.

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सीएम नाराज, सदन में पैदा करवा रहे गतिरोध :सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कहना है सत्ता पक्ष तानाशाही और हिटलरशाही पर उतारू है. भाजपा के लोग घमंड में मदमस्त होकर चल रहे हैं. बाबा साहब अंबेडकर का बनाया संविधान इन्हें पसंद नहीं है. राजस्थान में पहली बार दलित नेता प्रतिपक्ष बना है. जब वह बोलते हैं तो सरकार हिलती है. जब मनरेगा वाला मामला उठाया तो पहले सीएम से कहा था कि बुरा नहीं मानना, लेकिन अब लगता है कि मुख्यमंत्री बुरा मान गए. जब भी उनके संबोधन का समय आता है, वे सदन में गतिरोध पैदा कर देते हैं. उनका कहना है कि गतिरोध खत्म करवाने के लिए सीएम को आगे आकार पहल करनी चाहिए.

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दलित नेता की आवाज को दबाने का प्रयास :राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष का संबोधन नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहली बार राजस्थान में किसी दलित नेता को कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष बनाया है. इन दलित नेता की आवाज को दबाने का काम पूरी सरकार कर रही है. उन्हें पसंद ही नहीं है कि दलित समुदाय का व्यक्ति आकार अपनी बात रखे. हमारे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ पूरा दल खड़ा हुआ है. हम सदन में उनकी बात को मनवाकर ही दम लेंगे. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष एक पद है, जिसका सरकार को सम्मान करना चाहिए. उसका अपमान नहीं करना चाहिए.

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