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चार मिनिट में कचरे को समेटने और कुदरत को सहेजने की कहानी, US काउंसलेट जनरल के सहयोग से बनी फिल्म - film festival environment

Environment Film Made In 4 Minutes: यूएस काउंसलेट के सहयोग से पर्यावरण पर फिल्म बनाई गई है. यह फइल्म 4 मिनिट 30 सेकेंड में अपनी कहानी कहती है, जिसमें कटते कचरे और बढ़ते कचरे को दिखाया गया है. इस फिल्म में बताया गया है कि हमें कैसे कुदरत को सहेजना है.

Environment Film Made In 4 Minutes
चार मिनिट में कचरे को समेटने और कुदरत को सहेजने की कहानी

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : Mar 5, 2024, 8:51 PM IST

Updated : Mar 5, 2024, 10:30 PM IST

चार मिनिट में कचरे को समेटने और कुदरत को सहेजने की कहानी

भोपाल। अगर चार मिनिट तीस सेकण्ड की फिल्म आप पर इतना असर डाले कि आप अपने आस पास की दुनिया में कटते जंगल और बढ़ते कचरे पर गौर कर सकें. आपकी सोच बदल जाए, तो क्या इसे पर्यावरण बचाने के संघर्ष में मजबूत कदम नहीं कहा जाएगा. स्टोरी टेलिंग के मजबूत कम्यूनिकेशन मीडियम के जरिए भारत में यूएस काउंसलेट जनरल के सहयोग से ये प्रयास हुआ है. चार से पांच मिनिट की ऐसी फिल्में भारत के अलग-अलग हिस्सों से तैयार की गई हैं. जिसमें बिगड़ते पर्यावरण पर चिंता से ज्यादा उन नायकों को शोकेस किया गया है. जो अपने हाथ बिगड़ते पर्यावरण की संभाल में अपना हाथ जगन्नाथ किए हुए हैं. खास बात ये है कि इनमें से ज्यादातर फिल्में स्टूडेंट्स ने बनाई है.

हर फिल्म का संदेश, बचा लो जंगल पानी

यूएस काउंसलेट के सहयोग से आयोजित हुए इस फिल्म फेस्टिवल में सात फिल्में दिखाई गई. ये फिल्में अलग-अलग कैटेगरी में बेस्ट फिल्म के साथ सेकण्ड और फर्स्ट रनर अप दिया गया. इनमें टेल ऑफ सेल फिल्म में सेल की पूरी कहानी है, तो उत्तराखंड की महिलाएं भी फिल्म का सब्जेक्ट बनी हैं. जो पहाड़ों के जंगल की आग बुझाने जुट जाती हैं. इनडीजिनियस सीड कीपर फिल्म में नार्थ ईस्ट में खेती के पारंपरिक ढंग को बचाने के साथ बीजों को बचा ले जाने की कहानी है. इस फिल्म फेस्टिवल में यूएस काउंसलेट जनरल ने भी भागीदारी की.

काउंसलेट की अधिकारी ब्रम्डा सोया कहती हैं, 'पूरी दुनिया ही इस संकट से जूझ रही है. भारत में पर्यावरण संरक्षण को बचाने के प्रयास हो इसकी महती आवश्यकता है. इन फिल्मों को देखकर लगता है कि किस तरह भारत में अलग-अलग नायक हैं. जो जंगल पानी और धरती को बचाने में जुटे हुए हैं. काउंसलेट जनरल की ही अधिकारी अलमित्रा के मुताबिक स्टोरी टेलिंग एक ऐसा माध्यम है कि जिसके जरिए बहुत आसानी से अपनी बात पहुंचाई जा सकती है. फिल्मों के जरिए ये मैसेज बहुत मजबूती के साथ पहुंचाया गया है.

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सीएमएस वातावरण ने सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज नई दिल्ली यूएस काउंसलेट जनरल के सहयोग और नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के सहयोग से पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर इस फिल्म फेस्टीवल का आयोजन किया. इस फिल्म फेस्टीवल की ज्यूरी में भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद प्रणव जे पातर बेनेट विश्वविद्यालय के टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया से गौरी चक्रवती, सीएमएस कम्यूनिकेशन की निदेशक परिमिता दास गुप्ता, यूएसकाउंसलेट मुंबई की आर्थिक और वाणिज्यिक मामलों की अधिकारी एलिजाबेथ ओरलैंडो शामिल रहीं.

Last Updated : Mar 5, 2024, 10:30 PM IST

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