नई दिल्ली: भारत में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है. इसे लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है, ताकि वे अपने बहुमूल्य वोट की महत्वता को समझ सकें और लोकतंत्र में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दें. वैसे तो देशभर में इसके लिए इलेक्शन कमीशन द्वारा लागातार काम किया जा रहा है, लेकिन दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के डायरेक्टर, डॉ. सतेंद्र सिंह ने दिव्यांग से लेकर सामान्य मतदाताओं को जागरूक करने के लिए बहुत काम किया है.
खुद दिव्यांग होते हुए भी आज न सिर्फ वे दिल्ली में इलेक्शन कमीशन की ओर से बनाई गई स्टेट शेयरिंग कमेटी एक्सेसिबल इलेक्शन में सदस्य हैं, बल्कि सेंट्रल दिल्ली और साउथ दिल्ली के साथ गाजियाबाद जिले में सुगम इलेक्शन के लिए जिले के इलेक्शन आइकन भी हैं. वे दिल्ली में दिव्यांगों की मदद से पूरा संभालकर मिसाल कायम कर चुके हैं. इसके लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है.
सवाल: आपको किस तरह इलेक्शन आइकन नियुक्त किया गया?
उत्तर:चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व होता है. जनता सरकार के कार्यों को लेकर अक्सर शिकायत करती है, लेकिन जब लोगों के पास सरकार चुनने की नैतिक जिम्मेदारी होती है, तो वे उसे छुट्टी का दिन समझ मतदान में भाग ही नहीं लेते. वहीं कई दिव्यांग अपनी शारीरिक अक्षमताओं के चलते वोट नहीं कर पाते. इसे देखते हुए इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया में एक्सेसिबिलिटी डिवीजन की शुरुआत की गई है. इसका काम यह है कि पूरी चुनाव प्रणाली को सुगम बनाया जाए, जिसे दिव्यांग लोग भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें. इसके लिए इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया की ओर से नेशनल लेवल पर एक कमेटी बनाई गई है. साथ ही स्टेट लेवल पर हर राज्य की एक स्टेट शेयरिंग कमेटी एक्सेसिबल इलेक्शन की बनाई गई है. इसमें मुझे दिल्ली स्टेट शेयरिंग एक्सेसिबल इलेक्शन का सदस्य बनाया गया है. इसके अलावा डिस्ट्रिक्ट लेवल पर भी मॉनिटरिंग कमेटी, हर जिले के लिए इलेक्शन आइकन भी चुनती है. इसी के तहत मुझे इलेक्शन आइकन चुना गया.
सवाल:पहले के मुकाबले मतदान केंद्रों पर दिव्यांग मतदाताओं के लिए क्या सुविधाएं बढ़ी हैं?
उत्तर: वर्तमान में हर पोलिंग बूथ पर दिव्यांगों के लिए सुविधाओं का ध्यान रखते हुए कई तरह की व्यवस्थाएं की जा रही हैं. अब हर पोलिंग बूथ पर व्हीलचेयर उपलब्ध रहती है. अगर आपको सुनने में दिक्कत है तो वहां साइन लैंग्वेज रिप्रेंजेनटेटिव भी मौजूद रहता है. वहीं दृष्टिहीन लोगों के साथ एक व्यक्ति अंदर जा सकता है. और तो और छोटे कद वाले लोगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. इतना ही नहीं, पिछले इलेक्शन में निर्वाचन आयोग ने कई राज्यों में पिक एंड ड्रॉप सुविधा भी शुरू की थी. इसके लिए निर्वाचन आयोग द्वारा एक ऐप बनाया गया है, जिसमें आप अपनी डिसेबिलिटी के बारे में मेंशन कर सकते हैं और आपको क्या सुविधा चाहिए. इसके आधार पर आपको वह सुविधा दी जाएगी.
सवाल: इन सुविधाओं और जागरूकता के कारण क्या दिव्यांगजनों के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है?
उत्तर:निर्वाचन आयोगने ज्यादातर पोलिंग बूथ स्कूलों में बनाए हैं. स्कूलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वहां रैंप व व्हीलचेयर फैसिलिटी भी होनी चाहिए. हम लोग उन्हीं स्कूलों को पोलिंग बूथ के रूप में चुनते हैं जहां कोई बाधा न हो और दिव्यांग लोग इसे आसानी से पार कर सकें. इन सुविधाओं के चलते मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है, जिसमें और सुधार होने की उम्मीद है.