खटीमा: आज पूरे देश में महाशिवरात्रि का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है. इसी बीच हम आपको प्राचीन वनखंडी महादेव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो टनकपुर हाइवे से मात्र आठ किलो मीटर दूर चकरपुर नामक स्थान पर स्थित है. मंदिर की मान्यता है कि यहां शिवलिंग रोहणी नक्षत्र में सात रंग बदलता है. हर महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशाल मेले का आयोजन होता है. जिसमें उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल से भी लाखों श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए आते हैं.
प्राचीन वनखंडी महादेव मंदिर की मान्यता है कि कालांतर में खटीमा क्षेत्र में लगभग 600 सालों से निवास करने वाली थारू जनजाति समाज की गाय इस स्थान पर अपना दूध स्वयं विसर्जित करती थी. वहीं, जब ग्वालों ने गाय को अपना दूध रोजाना एक ही स्थान पर विसर्जित करते देखा, तो इस स्थान की जानकारी अन्य लोगों को दी. तब इस स्थान पर ही जमीन के नीचे शिवलिंग की खोज हुई. जिसे अब वनखंडी महादेव मंदिर के रूप में जाना जाता है. वनखंडी महादेव मंदिर में सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस मंदिर का वर्णन कुमाऊं के इतिहास नामक प्रसिद्ध पुस्तक में भी वर्णित है.