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तेलंगाना सुरंग हादसा: टनल में फंसे 8 लोगों को बचाने उतर सकते हैं मार्कोस कमांडो - SLBC TUNNEL COLLAPSE

तेलंगाना सुरंग में हादसे की जगह अंधेरा है. ऑक्सीजन की कमी है. बीएसएनएल के सिग्नल नहीं है. इंट्राकॉम काम नहीं कर रहा है.

SLBC TUNNEL COLLAPSE
तेलंगाना सुरंग हादसे के बाद राहत बचाव अभियान का दृश्य (ETV Bharat Telangana Desk)

By ETV Bharat Hindi Team

Published : Feb 26, 2025, 12:04 PM IST

नगरकुरनूल: श्रीशैलम सुरंग नहर परियोजना के निर्माणाधीन टनल की छत का कुछ हिस्सा ढहने की घटना में अब तक बचाव दल को सफलता नहीं मिली है. बचाव अभियान का आज बुधवार को पांचवां दिन है.

ऐसे में भारतीय नौसेना के स्पेशल यूनिट 'मार्कोस' को इस अभियान में शामिल किया जा सकता है. मार्कोस कंमाडो के नाम विषम परिस्थितियों में समुद्री डाकुओं के छक्के छुड़ाने के रिकॉर्ड हैं.

इस हादसे में अब तक का लेटेस्ट रिपोर्ट ये है कि सुरंग में महज 40 मीटर का फसला बचा है जहां बचाव दल को पहुंचना है. यही वो जगह है जहां 8 लोग फंसे हैं. इस जगह पर मिट्टी, पानी और कीचड़ भरा है. इन सबके बावजूद हौसले बुलंद है. 'मार्कोस' कमांडो के पहुंचने की खबर से लोगों में आस जगी है.

बता दें कि सेना और एनडीआरएफ की 34 सदस्यीय विशेष टीम मंगलवार को सुरंग के भीतर गई और स्थिति का जायजा लिया. साथ ही टनल बोरिंग मिशन (टीबीएम) का पता लगाने की कोशिश की. सुरंग में जिस पर हादसा हुआ है वहां भयंकर रूप से मिट्टी धंस गई है.

स्पेशल टीम ने पड़ताल के बाद पाया कि हालात तत्काल बचाव कार्य के लिए अनुकूल नहीं है. पता चला है कि छत ढहने वाले क्षेत्र में 70 फीसदी मिट्टी और 30 फीसदी पानी है, जिससे वहां चलना भी नामुमकिन है.

खासकर 13.85 किलोमीटर लंबी सुरंग का आखिरी 40 मीटर हिस्सा बचाव कार्य के लिए चुनौती भरा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिट्टी का प्रतिशत पानी से ज्यादा हो तो उसमें हाथ-पैर भी नहीं हिलाए जा सकते. सेना और एनडीआरएफ की टीम ने एनजीआरआई और जीएसआई के साथ मिलकर इलाके का गहन अध्ययन किया.

सुरंग में बीएसएनएल और इंट्राकॉम तक काम नहीं करता

उनका कहना है कि सुरंग के आखिर में ऊपर से मिट्टी गिर रही है. वहां अंधेरा छाया है. हवा की कमी के कारण बचाव कार्य करना असंभव है. यहां तक ​​कि विभिन्न संगठनों द्वारा उपलब्ध कराए गए अत्याधुनिक कैमरे और उपकरण भी काम नहीं कर रहे हैं.

यहां तक ​​कि ड्रोन भी घटनास्थल तक नहीं पहुंच पा रहा है. साथ ही, सुरंग का 12वां किलोमीटर पार करने के बाद बचाव दल को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें कीचड़ और पानी में चलना पड़ रहा है.

बड़ी मुश्किल से आगे बढ़ने पर ऑक्सीजन की कमी के कारण बचावकर्मी वहां ज्यादा देर तक टिक नहीं पा रहे हैं. बीएसएनएल के सिग्नल सुरंग में 3 किलोमीटर तक आ रहे हैं. कुछ दूरी तक इंट्राकॉम काम कर रहा है और कुछ दूरी तक कंस्ट्रक्शन कंपनी का वाईफाई काम कर रहा है.

13.85 किलोमीटर लंबी सुरंग को ए, बी, सी और डी में हिस्सों में बांटा गया

बचाव अभियान को सुगम बनाने के लिए सुरंग को चार हिस्सों में बांटा गया-

सेक्शन ए. प्रवेश द्वार से सुरंग तक 12 किलोमीटर को ए-सेक्शन के रूप में चिन्हित किया गया है. यहां लोको ट्रेन के चलने के लिए स्थितियां हैं. प्रवेश द्वार से 10.7 किलोमीटर तक पानी नहीं है. वहां से 11.30 किलोमीटर तक 1.5 फीट पानी है.

सेक्शन बी. बी-सेक्शन 1.50 किलोमीटर लंबा है. इस क्षेत्र में लोको ट्रैक पर 2.5 फीट तक पानी है. इस कारण भारी उपकरण नहीं ले जाए जा सके.

सेक्शन सी. सी-सेक्शन 310 मीटर लंबा है. इसमें मिट्टी, निर्माण अपशिष्ट और उपकरण हैं. यहां 100 मीटर लंबी सुरंग में बोरिंग मशीन फंसी है. बचाव दल के सदस्य इस क्षेत्र के अंत तक पहुंचने में सफल रहे.

सेक्शन डी. डी-सेक्शन सुरंग के अंत में टीबीएम से 40 मीटर आगे का क्षेत्र है. कटर इसी छोर पर है. मंगलवार रात को रोट होल माइनर्स और एनडीआरएफ के जवान इस टीबीएम के पीछे पहुंचे. वे यह देखकर चौंक गए कि मशीन यहां गिर गई थी लेकिन सुरंग अभी भी वहां थी. उन्होंने कहा कि अगर ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं तो वे अंत तक पहुंच जाएंगे, नलगोंडा सीई अजय कुमार ने कहा.

आज से ऑपरेशन मार्कोस शुरू किया जा सकता है

सुरंग में फंसे 8 लोगों को बचाने के लिए आज (26-02-2025) से ऑपरेशन मार्कोस शुरू किया जाएगा. इसके लिए भारतीय मरीन कमांडो फोर्स को तैनात किया जाएगा जो कहीं भी, किसी भी मुश्किल परिस्थिति में जमीन, पानी, आसमान पर बचाव अभियान चलाने में सक्षम है.

इसके सदस्यों को मार्कोस के नाम से जाना जाता है. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) मार्कोस के साथ साझेदारी करेगा. इसके लिए बीआरओ के लेफ्टिनेंट कर्नल हरिपाल सिंह अपनी टीम के सदस्यों के साथ यहां आएंगे.

सुरंग में छत ढहने की घटना के संदर्भ में सरकार ने बचाव अभियान की गति बढ़ा दी है जो बुधवार सुबह अपने चौथे दिन में प्रवेश कर रहा है. इसके लिए एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन का आदेश दिया गया है. सुरंग के आखिरी हिस्से में छत ढह गई, जो ठीक 13.85 किमी लंबी है.

वहां, 140 मीटर लंबी सुरंग बोरिंग मशीन और कटर मशीन कीचड़ में फंस गई. माना जा रहा है कि आठ लोग लापता हैं. सुरंग में कीचड़ और निर्माण कचरे को पार करके टीबीएम मशीन के गिरने वाले क्षेत्र तक पहुंचना एक बात है. आखिरी 100 मीटर में कीचड़ तलाशी अभियान चलाना दूसरी बात है. इसीलिए किसी भी तरह से विशेष टीम के साथ क्षेत्र की तलाशी लेने का फैसला किया गया.

बचाव अभियान में नामी संगठन

सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिंगरेनी, हाईवे, एनजीआरआई, जीएसआई, आरएटी माइनिंग टीम, नवयुग, मेघा, एलएंडटी, आईआईटी मद्रास और अन्य टीमों ने बचाव अभियान चलाया. हालांकि लापता लोगों का पता नहीं चल पाया है. भले ही सेना टीबीएम के बीच तक जा सके लेकिन यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ऐसी स्थिति है कि वहां बचाव अभियान नहीं चलाया जा सकता.

वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि जब तक कीचड़, पानी और निर्माण सामग्री को हटाया नहीं जाता, तब तक श्रमिकों का पता लगाना मुश्किल होगा. एंडो बॉट और एफओबी जैसे विशेष कैमरे और स्कैनिंग उपकरण भेजे गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि केवल मार्कोस ही ऐसी विशेष परिस्थितियों को संभाल सकता है. कारगिल, कश्मीर और अन्य क्षेत्रों में जटिलताओं को पार करते हुए परिणाम प्राप्त करने का संगठन का इतिहास रहा है. बीआरओ के पास पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्रों में सुरंगों के निर्माण और रखरखाव का भी रिकॉर्ड है. इसके साथ ही मार्कोस और बीआरओ सहित 10 विशेषज्ञों की एक विशेष टीम बनाई गई.

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