नई दिल्ली: अयोध्या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए ऐसी दुखती रग हो चुकी है जिसे पूरा विपक्ष लगातार तूल देकर सत्तापक्ष को टीस देता रहता है. इसी तरह का कुछ नजारा यही बात इस बार के संसद सत्र में भी नजर आया. यही नहीं सदन में जब राहुल गांधी ने भाषण दिया तब अयोध्या से नवनिर्वाचित सांसद अवधेश प्रसाद को बगल में बिठाया. ठीक इसी प्रकार का दृश्य सपा मुखिया अखिलेश यादव के सदन में भाषण के दौरान भी दिखी. यानी अयोध्या से जीतकर आए अवधेश प्रसाद अब विपक्ष के लिए 'तुरुप का पत्ता' हो गए हैं. ऐसे में ये तय है कि अयोध्या की हार को विपक्ष भाजपा के खिलाफ पूरे पांच साल तक हिंदुत्व विरोधी एजेंडे के खिलाफ इस्तेमाल करेगी. अवधेश प्रसाद पासी समुदाय से आते हैं, जिसके कारण वे पिछड़े समुदाय का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
डिप्टी स्पीकर को लेकर चर्चा
वैसे तो विपक्ष लगातार डिप्टी स्पीकर की मांग कर रहा है लेकिन लगता है भाजपा पिछली 17वीं लोकसभा की तरह इस बार भी डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखना चाहती है. मगर सूत्रों की माने तो विपक्ष डिप्टी स्पीकर की मांग लगातार करता रहेगा और उसके लिए अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद के नाम पर राहुल गांधी,अखिलेश यादव और ममता बनर्जी तीनों ही राजी हैं, और वे उनका नाम आगे बढ़ा सकते हैं. कुल मिलाकर विपक्ष ने अयोध्या को राजनीतिक हथियार बना लिया है और इस बात को भाजपा के खिलाफ बार बार उठा भी रहे हैं, कि अयोध्या में भाजपा के काम नहीं आए राम.
ईटीवी भारत से बातचीत में क्या बोले सपा सांसद?
इसी अयोध्या यानि फैजाबाद सीट से सांसद अवधेश प्रसाद से ईटीवी भारत की वरिष्ठ संवाददाता अनामिका रत्ना ने विशेष बातचीत में पूछा कि, क्या पूरे पांच साल तक विपक्ष अयोध्या की हार को सत्तापक्ष के खिलाफ राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करेगा? इस प्रशन का जवाब देते हुए फैजाबाद से सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि, अयोध्या की जीत पूरे विपक्ष की जीत है और सत्तापक्ष के द्वारा फैलाए हुए सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ जीत है. उन्होंने कहा की हमारे देश में करोड़ों नौजवान हैं जो आज महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे है. उन्होंने कहा कि, कोरोना काल में लगभग सात करोड़ युवा नौकरी पाने की जद्दोजहद में ओवरएज हो गए और जिसको लेकर आज इन विषयों पर चर्चा करने की आवश्यकता है.