चम्पावत: अल्मोड़ा की बाल मिठाई के बाद अब चंपावत जिले में मंडुए के आटे से बनने वाली मिठाई काफी प्रचलित हो रही है. गरम तासीर वाला मंडुवा अब पहाड़ को बहुआयामी पहचान दे रहा है. आटे के रूप में इसका उपयोग तो हो ही रहा है, लेकिन अब मंडुवे की मिठाई लोगों के मुंह की मिठास को बढ़ा रही है. ऐसे में मंडुवे की कीमत भी बढ़ गई है, जिससे जनपद के किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने की उम्मीद है.
चंपावत में तिवारी स्वीट द्वारा तैयार की गई मंडुवे के आटे की सोन पापड़ी सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व सीएम हरीश भी मुरीद हो गए हैं. सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चंपावत दौरे के दौरान तिवारी स्वीट द्वारा तैयार की गई मिठाई की काफी प्रशंसा की थी. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा फेसबुक के माध्यम तिवारी स्वीट की मंडुवे की मिठाई खाते हुए वीडियो अपलोड किया था.
मंडुए की कीमत गेहूं से ढेड़ गुना ज्यादा
बता दें, पहाड़ में मंडुवे की फसल काफी अधिक मात्रा में की जाती है. पहले किसान मंडुवे को औने पौने दामों में बेच दिया करते थे या जानवरों को खिला देते थे. लेकिन अब मंडुवा किसानों की किस्मत बदल रहा है. भरपूर मांग की वजह से अब इसकी कीमत गेहूं से डेढ़ गुना ज्यादा है.
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मंडुवे की खेती कर रहे किसान
इस वक्त चंपावत में गेहूं का आटा ₹25 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है तो मंडुवे के आटे की कीमत ₹40- ₹45 रुपये किलो हो गई है. मंडुवे का उपयोग आटे के अलावा बिस्कुट और मिठाई में हो रहा है. औषधीय गुण, बहुउपयोग और उभरते बाजार के चलते चंपावत जिले में इसकी खेती में तेजी से इजाफा हो रहा है. साल 2015 में जिले में 5171 हेक्टेयर में मंडुवा बोया गया था, जो अब 5786 हेक्टेयर तक पहुंच गया है. पिछले साल करीब 9043 मीट्रिक टन मंडुवे का उत्पादन हुआ था.