लखनऊ: बेसिक शिक्षा विभाग का कंपोजिट ग्रांट घोटाला योगी सरकार का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला बन सकता है. उन्नाव में कंपोजिट ग्रांट घोटाले का भांडा फोड़ने वाले समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह साजन का दावा है कि 40 से ज्यादा जिलों में घोटाले के सुबूत मिल चुके हैं और यह प्रदेश के 75 जिलों में किया गया हजारों करोड़ रुपये का घोटाला है.
उन्होंने बताया कि इसके लिए अधिकारियों ने जौनपुर की कंपनी के साथ साठगांठ कर स्कूल शिक्षकों पर दबाव डालकर चेक हासिल किए और उसमें मनमानी रकम दर्ज कर घोटाले को अंजाम दिया. इस निधि के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए जरूरी शिक्षण सामग्री की खरीद की जाती है, लेकिन पेंसिल, स्टील के बर्तन और वजन तोलने वाली मशीन के दाम बाजार दर से कई गुना बढ़ाकर दर्ज किए गए.
उनका कहना है कि 5 हजार रुपये में किसी स्कूल को जो सामग्री भेजी गई, उतनी ही सामग्री जब दूसरे स्कूल में भेजी गई, तो उससे 26 हजार रुपये तक वसूले गए. पहले इस निधि का इस्तेमाल प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक अपने विवेक से करते रहे हैं, लेकिन योगी सरकार में जिला अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मिलकर निजी संस्था की मदद से घोटाले को अंजाम दिया.
विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह साजन ने पिछले दिनों विधान परिषद में भी यह मामला उठाया था. तब सरकार ने मंडलायुक्त लखनऊ से जिलाधिकारी उन्नाव के बारे में जांच कराए जाने की जानकारी दी थी. मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्नाव के जिलाधिकारी को शनिवार को निलंबित किया गया है. सुनील सिंह साजन का दावा है इस घोटाले की शिक्षा विभाग के स्तर पर जो जांच हुई है, उसमें 40 से ज्यादा जिलों में घोटाले के सुबूत मिल चुके हैं. ऐसे में कंपोजिट ग्रांट के तहत स्कूलों में की गई सभी खरीद की जांच प्रदेश स्तर पर किया जाना जरूरी है.