फतेहपुर: महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर भारत को खुले में शौच से मुक्त करने का दावा किया गया है. इस दिशा में भले ही काम हो रहा है, लेकिन यह मात्र एक दिखावा बनकर रह गया है. फतेहपुर जिले को फाइलों में तो खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया है, लेकिन हालात यह है कि जो शौचालय बने हैं, उनमें भी ताले लटके नजर आते हैं.
- फतेहपुर में फाइलों पर ही दौड़ रही है स्वच्छ भारत अभियान की योजना.
- जिले में दूर-दराज तो अलग कलेक्ट्रेट परिसर में बने शौचालयों में ताले लटके रहते हैं.
- परिसर में जो भी फरियादी आते हैं, वे शौच के लिए खुले स्थान का सहारा लेते हैं.
- कलेक्ट्रेट परिसर में महिलाओं को विशेष तवज्जों देते हुए पिंक शौचालय का निर्माण किया गया है, लेकिन वहां भी ताला लटका रहता है.
- परिसर में आए पुरूष तो खुले में यूरीन कर लेते हैं, लेकिन महिलाओं को मजबूरन परेशानी झेलनी पड़ती है.
- परिसर में तीन शौचालय बने हैं, जिनमें हमेशा ताले लटके रहते हैं.
- डीएम कार्यालय के पास ही शौचालय का यह हाल हैं तो अन्य स्थानों के शौचालयों की हालत तो और बेकार होगी.
शौचालयों में बंद ताले के विषय पर कोई भी आला अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है. हालात यह है कि जिले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं का क्रियान्वयन केवल फाइलों तक सिमट गया है, जमीनी तौर पर लोगों को इन योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल रहा है.