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आजमगढ़: मायावती ने तोड़ दिया गठबंधन, अखिलेश की उम्मीद अभी बाकी - बसपा ने तोड़ा गठबंधन

बसपा प्रमुख मायावती ने सपा से अलग होने की घोषणा कर दी है. हालांकि, सपा की ओर से अभी गठबंधन निभाने की रस्म अदायिगी की जा रही है.

मायावती, अखिलेश यादव (फाइल फोटो).
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Published : Jun 25, 2019, 4:11 PM IST

आजमगढ़ : 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा ने गठबंधन कर भाजपा को टक्कर देने का फैसला लिया था. देश और प्रदेश की जनता ने एक बार फिर से भाजपा के पक्ष में मतदान किया. चुनाव के बाद सपा और बसपा एक दूसरे पर भले ही तंज कसने लगे हों, लेकिन आजमगढ़ के सपा केंद्रीय कार्यालय पर आज भी बसपा सुप्रीमो मायावती और कांशीराम की तस्वीरें लगी हुई हैं.

सपा केंद्रीय कार्यालय में अभी भी लगी हैं मायावती और काशीराम की तस्वीरें.

सपा कार्यालय में लगी मायावती व कांशीराम की तस्वीरें:

  • 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए सपा बसपा हुए थे साथ.
  • चुनाव परिणाम आने के बाद से ही गठबंधन में दरार पड़ने लगीं.
  • मायावती ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा के यादव मतदाताओं ने गठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान नहीं किया था.
  • मायावती ने स्पष्ट करते हुए कहा कि आगामी 12 विधानसभा के उपचुनाव में बसपा अपने दम पर लड़ेगी.
  • मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशियों को अखिलेश यादव टिकट देने के खिलाफ थे.

गठबंधन में सबसे ज्यादा फायदा किसको हुआ:
सपा-बसपा के गठबंधन में सबसे ज्यादा फायदा बसपा को हुआ था. बता दें कि बसपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी. वहीं बसपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में 11 सीट, जबकि समाजवादी पार्टी को बसपा से गठबंधन का फायदा नहीं मिल सका. इसके बाद भी समाजवादी पार्टी बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभी भी उम्मीदें जता रही है.

आजमगढ़ : 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा ने गठबंधन कर भाजपा को टक्कर देने का फैसला लिया था. देश और प्रदेश की जनता ने एक बार फिर से भाजपा के पक्ष में मतदान किया. चुनाव के बाद सपा और बसपा एक दूसरे पर भले ही तंज कसने लगे हों, लेकिन आजमगढ़ के सपा केंद्रीय कार्यालय पर आज भी बसपा सुप्रीमो मायावती और कांशीराम की तस्वीरें लगी हुई हैं.

सपा केंद्रीय कार्यालय में अभी भी लगी हैं मायावती और काशीराम की तस्वीरें.

सपा कार्यालय में लगी मायावती व कांशीराम की तस्वीरें:

  • 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए सपा बसपा हुए थे साथ.
  • चुनाव परिणाम आने के बाद से ही गठबंधन में दरार पड़ने लगीं.
  • मायावती ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा के यादव मतदाताओं ने गठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान नहीं किया था.
  • मायावती ने स्पष्ट करते हुए कहा कि आगामी 12 विधानसभा के उपचुनाव में बसपा अपने दम पर लड़ेगी.
  • मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशियों को अखिलेश यादव टिकट देने के खिलाफ थे.

गठबंधन में सबसे ज्यादा फायदा किसको हुआ:
सपा-बसपा के गठबंधन में सबसे ज्यादा फायदा बसपा को हुआ था. बता दें कि बसपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी. वहीं बसपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में 11 सीट, जबकि समाजवादी पार्टी को बसपा से गठबंधन का फायदा नहीं मिल सका. इसके बाद भी समाजवादी पार्टी बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभी भी उम्मीदें जता रही है.

Intro:anchor:आजमगढ़। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सपा बसपा ने गठबंधन कर भाजपा को टक्कर देने का फैसला लिया था लेकिन देश व प्रदेश की जनता ने एक बार फिर से जन्म देते हुए भाजपा के पक्ष में ही मतदान किया। चुनाव के बाद भले ही सपा बसपा का गठबंधन टूट गया लेकिन आजमगढ़ के सपा केंद्रीय कार्यालय पर आज भी बसपा सुप्रीमो मायावती व काशीराम की तस्वीरें लगी हुई हैं।


Body:वीओ:1 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए सपा बसपा राष्ट्रीय लोक दल ने एक गठबंधन बनाया था इस गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा भी हो गया था लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद से ही गठबंधन में दरार पड़ने लगी। परिणाम के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि गठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में सपा के यादव मतदाताओं ने मतदान नहीं किया इसी कारण बसपा का घाटा हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अभी स्पष्ट कर दिया कि आगामी कुछ दिनों में होने वाले 12 विधानसभा के उपचुनाव बसपा अपने दम पर लड़ेगी। हालांकि समाजवादी पार्टी की तरफ से इस मामले पर टिप्पणी नहीं की गई। अभी 2 दिन पूर्व भी बसपा सुप्रीमो मायावती ने बसपा पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं की बैठक में यहां तक कह डाला कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशियों को अखिलेश यादव टिकट देने के खिलाफ थे। बसपा सुप्रीमो के इन वक्तव्य से साफ जाहिर होता है कि बसपा समाजवादी पार्टी से किसी तरह का गठबंधन नहीं रखना चाहती हैं लेकिन आजमगढ़ के समाजवादी पार्टी कार्यालय पर आज भी बसपा सुप्रीमो मायावती व काशीराम की तस्वीरें बना कर रही है कि अखिलेश यादव को अभी बसपा सुप्रीमो मायावती से उम्मीदें हैं।


Conclusion:अजय कुमार मिश्र आजमगढ़ 9453766900

बताते चलें कि सपा बसपा के इस गठबंधन में सबसे ज्यादा फायदा बसपा का हुआ बसपा को जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी वहीं बसपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में 11 सीटें मिली जबकि समाजवादी पार्टी को बसपा से गठबंधन का फायदा नहीं मिल सका इसके बाद भी समाजवादी पार्टी बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभी भी मुलायम है।
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