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स्पेशल: रामगंजमंडी के धनिये ने अपनी खुशबू देश विदेश तक फैलाई, कई नामी मसाला कंपनियां यहां से करती हैं व्यापार

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Published : Feb 29, 2020, 7:43 PM IST

कोटा की रामगंजमंडी का धनिया अपनी खुशबू से देश ही नहीं विदेशों तक को महका रहा है. जी हां, यहां का धनिया देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुका है. रामगंजमंडी में स्थित कृषि ऊपज मंडी एशिया की नंबर वन धनिया मंडी है. कई नामी मसाला कंपनियां भी यहां से व्यापार करती है...

coriander seed of ramganj mandi, kota news
एशिया की नंबर वन धनिया मंडी

रामगंजमंडी (कोटा). एशिया की सबसे बड़ी धनिया मंडियों में शुमार रामगंज कृषि ऊपज मंडी में धनिये की आवक शुरू हो गई है. देश में धनिये के कुल उत्पादन में 70 प्रतिशत हिस्से पर हाड़ौती संभाग का कब्जा है. तो वहीं हाड़ौती में स्थित धनिया की विशिष्ट श्रेणी की मंडी है. कई नामी मसाला कंपनी यहां से व्यापार करती है. अगर धनिये को इस शहर की लाइफलाइन भी कहा जाएं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

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कृषि ऊपज मंडी एशिया की नंबर वन धनिया मंडी

रामगंज मंडी में राजस्थान ही नहीं मध्यप्रदेश से भी किसान धनिया लेकर पहुंचते हैं. पिछले 40 वर्षों से ये मंडी धनिये के व्यापार में एक लीडर के तौर पर उभरकर के आई है और इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की पूरे देश की मंडियां जहां धनिये का व्यापार होता है. वहां पर भी धनिये के भावों का निर्धारण रामगंजमंडी के धनिये के भावों के आधार पर होता है. धनिये की सर्वाधिक खपत मुस्लिम राष्ट्रों में होती है जिसमें ताईवान, ताजीकिस्तान,पाकिस्तान व बांग्लादेश के साथ ही कई अन्य देश प्रमुख हैं जहां धनिये का निर्यात होता है.

एशिया की नंबर वन धनिया मंडी

पढ़ें: स्पेशल: अमेरिका और ईरान के बीच बिगड़े रिश्तों का खामियाजा भुगत रहा बूंदी का चावल उद्योग

क्योंकि शहर की अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से विशिष्ट श्रेणी की इस मंडी में लगभग हजारों व्यापारी, ऊंटगाड़ी मजदूर और मुनीम इस मंडी से जुड़े हुए हैं. मंडी के प्रमुख धनिया व्यवसाय और विश्लेषक संजय सेठिया ने बताया कि धनिया का मार्केट फिलहाल थोड़ा लेट है. जिसका कारण इस साल बारिश थोड़ी तेज और देर तक चली है, इस वजह से किसान खेत को देरी से तैयार कर पाया है. ऐसे में धनिया का माल थोड़ा लेट आया है. जहां तक बिजाई की संभावना है तो 60 से 70 प्रतिशत कोटा हाड़ौती संभाग में हुई है. जहां पिछले साल की पैदावार अच्छी थी, वहीं इस साल में अच्छी होने की संभावना है.

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देश विदेश तक फैलाई यहां के धनिये ने अपनी खुशबू

उन्होंने बताया कि यहां के धनिये का फ्लेवर व खुशबू हाड़ौती संभाग का बेस्ट माना जाता है, इसलिये यहां के धनिये को सब पसंद करते है, जहां तक रेट का सवाल है, पिछले वर्ष से इस वर्ष एक जैसा दिखाई दे रहे है वहीं गिला धनिया 4 हजार से लेकर 5500 तक बिक रहा है. संभावना है बाजार अच्छे रहेंगे तो व्यापारियों को फायदा रहेगा. इस वजह से रामगंजमंडी की धनिया मंडी का नाम देश-विदेश तक है. प्रमुख धनिया व्यवसायी की माने तो देश की जानी मानी मसाला कंपनी रामगंजमंडी से ही माल लेना पसंद करती है.

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मंडी में किसानों का जमावड़ा

पढ़ें: आलू पर मौसम की मार: धौलपुर में कम पैदावार होने से चिंता में किसान, मंडी में भी कम मिल रहा भाव

वहीं रामगंजमंडी कृषि उपज मंडी सचिव जवाहर लाल नागर ने बताया कि रामगंजमंडी धनिये की सबसे बड़ी मंडी है और हाड़ौती का सबसे बेस्ट धनिया यहां आता है. यहां 15 फरवरी से धनिया का सीजन शुरू हो जाता हैं, लेकिन इस बार मार्च के फस्ट वीक से धनिये की बम्पर आवक आने की संभावना है. इस वजह से धनिये की आवक गत वर्ष से इस वर्ष अभी आधी रह गई. पिछली बार धनिये की आवक 32 हजार क्विंटल थी, जो इस बार अभी तक 16 हजार क्विंटल रही है. इसलिए मंडी समिति ने धनिये की बम्पर आवक लेट शुरू होने की सम्भवना में सभी तैयारियां पूरी कर ली है और किसान को अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सकें, ताकि किसान को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानियां नहीं हो.

रामगंजमंडी (कोटा). एशिया की सबसे बड़ी धनिया मंडियों में शुमार रामगंज कृषि ऊपज मंडी में धनिये की आवक शुरू हो गई है. देश में धनिये के कुल उत्पादन में 70 प्रतिशत हिस्से पर हाड़ौती संभाग का कब्जा है. तो वहीं हाड़ौती में स्थित धनिया की विशिष्ट श्रेणी की मंडी है. कई नामी मसाला कंपनी यहां से व्यापार करती है. अगर धनिये को इस शहर की लाइफलाइन भी कहा जाएं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

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कृषि ऊपज मंडी एशिया की नंबर वन धनिया मंडी

रामगंज मंडी में राजस्थान ही नहीं मध्यप्रदेश से भी किसान धनिया लेकर पहुंचते हैं. पिछले 40 वर्षों से ये मंडी धनिये के व्यापार में एक लीडर के तौर पर उभरकर के आई है और इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की पूरे देश की मंडियां जहां धनिये का व्यापार होता है. वहां पर भी धनिये के भावों का निर्धारण रामगंजमंडी के धनिये के भावों के आधार पर होता है. धनिये की सर्वाधिक खपत मुस्लिम राष्ट्रों में होती है जिसमें ताईवान, ताजीकिस्तान,पाकिस्तान व बांग्लादेश के साथ ही कई अन्य देश प्रमुख हैं जहां धनिये का निर्यात होता है.

एशिया की नंबर वन धनिया मंडी

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क्योंकि शहर की अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से विशिष्ट श्रेणी की इस मंडी में लगभग हजारों व्यापारी, ऊंटगाड़ी मजदूर और मुनीम इस मंडी से जुड़े हुए हैं. मंडी के प्रमुख धनिया व्यवसाय और विश्लेषक संजय सेठिया ने बताया कि धनिया का मार्केट फिलहाल थोड़ा लेट है. जिसका कारण इस साल बारिश थोड़ी तेज और देर तक चली है, इस वजह से किसान खेत को देरी से तैयार कर पाया है. ऐसे में धनिया का माल थोड़ा लेट आया है. जहां तक बिजाई की संभावना है तो 60 से 70 प्रतिशत कोटा हाड़ौती संभाग में हुई है. जहां पिछले साल की पैदावार अच्छी थी, वहीं इस साल में अच्छी होने की संभावना है.

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देश विदेश तक फैलाई यहां के धनिये ने अपनी खुशबू

उन्होंने बताया कि यहां के धनिये का फ्लेवर व खुशबू हाड़ौती संभाग का बेस्ट माना जाता है, इसलिये यहां के धनिये को सब पसंद करते है, जहां तक रेट का सवाल है, पिछले वर्ष से इस वर्ष एक जैसा दिखाई दे रहे है वहीं गिला धनिया 4 हजार से लेकर 5500 तक बिक रहा है. संभावना है बाजार अच्छे रहेंगे तो व्यापारियों को फायदा रहेगा. इस वजह से रामगंजमंडी की धनिया मंडी का नाम देश-विदेश तक है. प्रमुख धनिया व्यवसायी की माने तो देश की जानी मानी मसाला कंपनी रामगंजमंडी से ही माल लेना पसंद करती है.

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मंडी में किसानों का जमावड़ा

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वहीं रामगंजमंडी कृषि उपज मंडी सचिव जवाहर लाल नागर ने बताया कि रामगंजमंडी धनिये की सबसे बड़ी मंडी है और हाड़ौती का सबसे बेस्ट धनिया यहां आता है. यहां 15 फरवरी से धनिया का सीजन शुरू हो जाता हैं, लेकिन इस बार मार्च के फस्ट वीक से धनिये की बम्पर आवक आने की संभावना है. इस वजह से धनिये की आवक गत वर्ष से इस वर्ष अभी आधी रह गई. पिछली बार धनिये की आवक 32 हजार क्विंटल थी, जो इस बार अभी तक 16 हजार क्विंटल रही है. इसलिए मंडी समिति ने धनिये की बम्पर आवक लेट शुरू होने की सम्भवना में सभी तैयारियां पूरी कर ली है और किसान को अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सकें, ताकि किसान को अपनी फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानियां नहीं हो.

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