अलवर. राजस्थान में सबसे ज्यादा एफआईआर अलवर जिले में दर्ज होती हैं. अलवर एनसीआर का हिस्सा है, इसलिए यहां क्राइम भी अन्य जिलों की तुलना में ज्यादा होता है. प्रदेश का सीमावर्ती जिला होने के कारण घटनाओं को अंजाम देने के बाद बदमाश हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सीमा में चले जाते हैं. तेजी से बढ़ते क्राइम के ग्राफ को देखते हुए निजी कंपनी के सहयोग से अलवर जिले की सड़कों पर फेस रिकॉग्निशन कैमरे लगाए गए हैं. एक निजी कंपनी की मदद से 5 कैमरे अलवर पुलिस को मिले हैं. इन कैमरों को अलग-अलग जगह पर स्टाल किया गया है. एक-दो दिन में कैमरे काम करने लगेंगे.
अलवर पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने बताया कि कैमरा को पुलिस कंट्रोल रूम से अटैच किया जाएगा. कैमरे में बदमाश की फोटो पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी. जैसे ही कैमरे की रेंज से बदमाश गुजरेगा, उसकी सूचना तुरंत कंट्रोल रूम पर मिलेगी. ऐसे में बदमाशों को पकड़ने में मदद मिलेगी. एसपी ने कहा कि फेस रिकॉग्निशन कैमरे अपराधियों के लिए काल साबित होंगे. ये कैमरे पूरी तरह से नए तकनीकों से लैस होते हैं और पूरी तरह से हाई रिजोल्यूशन वाले हैं. इन कैमरों को लगाने से पुलिस को अपराधियों को पकड़ने में काफी आसानी होगी. अपराधियों की जानकारी और फोटो FRS (फेस रिकॉग्निशन सिस्टम) में फिट कर दी जाती है. जब भी अपराधी FRS के किसी भी कैमरे में नजर आएगा तो तुरंत कंट्रोल रूम में अलर्ट मैसेज आ जाएगा. उसके बाद कंट्रोल रूम में बैठे ऑपरेटर ग्राउंड पर मौजूद पुलिस के स्टाफ को ये सूचना दे देगा और तुरंत एक्शन लेकर उन्हें पकड़ा जाएगा.
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क्या होते हैं फेस रिकॉग्निशन कैमरे ? : एफआरएस यानी फेस रिकॉग्निशन कैमरा की असल में वो कैमरा है जो अपराधियों या फिर आतंकियों के चेहरे को देखते ही पहचान लेता है और सुरक्षाकर्मियों को अलर्ट कर देता है. मतलब साफ है कि चेहरा पहचान लेने वाले कैमरे को फेस रिकग्निशन सिस्टम कहते हैं. ये कैमरा एक कंप्यूटर सिस्टम से जुड़ा होता है, जिसमें आतंकियों और बदमाशों की तस्वीरों के साथ-साथ उनका पूरा डाटा होता है. किसने, कब, कहां और क्या क्राइम किया है सारी डिटेल उसकी सामने आ जाती है. इतना ही नहीं, जिस चेहरे की तस्वीर सिस्टम में फीड की गई है, उससे मिलता जुलता चेहरा भी अगर कैमरे के सामने से गुजरता है तो कैमरा तुरंत एक्टिव हो जाता है.
अलवर जिले में लगे हैं 2000 कैमरे : अकेले अलवर शहर में 350 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. इनमें से कुछ कैमरे लाइव हैं तो कुछ में रिकॉर्डिंग होती है. सभी कैमरे पुलिस के अभय कमांड सेंटर से जुड़े हुए हैं. शहर के प्रमुख बाजारों व रास्तों पर भी विभिन्न संस्थाओं व भामाशाह की मदद से 200 कैमरे लगवाए गए हैं. इसके अलावा जिले की 11 विधानसभाओं के बाजार मुख्य रास्तों पर बड़ी संख्या में कैमरे लगे हुए हैं. साथ ही रेलवे स्टेशन बस स्टैंड अलवर जिले में आने व जिले से बाहर जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर कैमरे लगे हुए हैं, जिनकी मदद से पुलिस बदमाशों पर नजर रखती है.
कई बड़ी घटनाओं का हुआ है खुलासा : अलवर पुलिस के लिए कैमरे खासे मददगार साबित हो रहे हैं. अलवर शहर में बाइक चोरी की घटनाएं सबसे ज्यादा होती है. ऐसे में अलवर पुलिस ने कैमरों की मदद से दर्जनों चोरी की घटनाओं का खुलासा किया तो वहीं एक दर्जन जगह बदमाशों को गिरफ्तार किया. साथ ही प्रदेश की कई बड़ी घटनाओं में भी अलवर के कैमरे मददगार बने हैं. प्रदेश के विभिन्न शहरों में घटनाओं को अंजाम देने के बाद बदमाश अलवर जिले में पहुंचे. इस दौरान कैमरों की मदद से उनको पकड़ा गया, साथ ही कई लूटपाट जैसी बड़ी घटनाओं में भी कैमरों की मदद से पुलिस ने बदमाशों को पकड़ा है.
देश के इन बड़े जगहों पर होता है उपयोग : इन कैमरों का उपयोग दिल्ली एयरपोर्ट, लाल किला, इंडिया गेट, 26 जनवरी व 15 अगस्त के मौके पर दिल्ली में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान इन कैमरों का उपयोग होता है. मुंबई-दिल्ली सहित देश के प्रमुख शहरों में अभी तक इस तरह के कैमरे लगे हुए हैं.