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शादी से जीविका चलाने वालों का धंधा ठप, वेडिंग कार्ड और प्रिंटिंग प्रेस व्यवसाय को करोड़ों का नुकसान

अजमेर में प्रिंटिंग प्रेस, फ्लेक्स और शादियों के कार्ड का व्यवस्था करने वाले लोगों पर कोरोना का ग्रहण लगा चुका है. हालात यह है कि पुराने आर्डर से तैयार माल रद्दी हो चुका है. अब दुकानें खुलने की अनुमति मिली तो नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं. जिले में फ्लेक्स शादी के कार्ड एवं प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े व्यवसाय को लॉकडाउन में करीब 15 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. इस कार्य से जुड़े व्यवसायी और कर्मचारी भविष्य को लेकर चिंतित हैं.

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Published : May 30, 2020, 5:44 PM IST

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शादी से जीविका चलाने वालों का धंधा ठप

अजमेर. कोरोना ने प्रिंटिंग प्रेस, फ्लेक्स और शादियों के कार्ड से जुड़े व्यवसाय को मानो वेंटिलेटर पर ला दिया हो. लंबे लॉकडाउन में पुराने आर्डर का तैयार मॉल सब रद्दी हो चुका है, जिससे व्यवसाय को भारी नुकसान हुआ है. जिले में फ्लेक्स की 3 दर्जन दुकानें हैं. वहीं प्रिंटिंग प्रेस की ऑफसेट, स्क्रीन प्रिंटिंग और शादियों के कार्ड की लगभग ढाई सौ दुकानें हैं. इस कारोबार से करीब 3 हजार लोग जुड़े हुए हैं.

शादी से जीविका चलाने वालों का धंधा ठप

लंबे लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों के लिए वेतन पाना मुश्किल हो गया है. पुराने ऑर्डर का माल रद्दी होने से हुए नुकसान के कारण व्यवसायियों के पास दुकान का किराया और बिजली का बिल भरने तक के लाले पड़े हुए हैं. लॉकडाउन 4.0 के बाद सरकार ने कारोबारियों को कुछ राहत दी है, लेकिन इस राहत के बाद भी फ्लेक्स प्रिंटिंग प्रेस शादियों के कार्ड का कारोबार वेंटिलेटर से उठ नहीं पा रहा है. यानी कारोबारियों को नए आर्डर नहीं मिल पा रहे हैं. फ्लेक्स कारोबारी सुनील वर्मा ने बताया कि कोरोना ने फ्लेक्स कारोबार की कमर तोड़कर रख दी है. बाजार खुलने के बाद भी फ्लेक्स व्यवसाय रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है.

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व्यवसायियों को करीब 15 करोड़ का नुकसान

यह भी पढ़ेंः कोरोना काल में बैंड-बाजा वालों पर आर्थिक संकट, शहनाइयां नहीं गुंजने से खाने के पड़े लाले

शादी कार्ड के कारोबारी सुनील ने बताया कि लॉकडाउन में शादी कार्ड व्यवसाय को भारी झटका लगा है, पुराना माल रद्दी हो चुका है. उन्होंने बताया कि शादी के कार्ड बनाने को लेकर कई लोग जुड़े होते हैं. लॉकडाउन में सभी बेरोजगार हो गए हैं. शादी के कार्ड का सीजन अप्रैल, मई और जून का था. इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शादी के कार्डों की जमकर खरीदारी हुआ करती थी. लेकिन लॉकडाउन ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. हालात यह हैं कि दुकानों का महंगा किराया और बिजली का बिल भरने के लिए पैसे नहीं हैं. इतना ही नहीं छूट में दुकान तो खुल गई है, मगर नए आर्डर नहीं मिल रहे हैं.

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छूट मिलने के बाद भी नहीं मिल रहे आर्डर

एक अन्य शादी के कार्ड एवं प्रिंटिंग कारोबारी अनिल ने बताया कि सरकार ने दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है. लेकिन शादी समारोह में 50 लोगों की अनिवार्यता रखी है. ऐसे में व्हाट्सएप ने पहले ही शादी कार्ड और प्रिंटिंग व्यवसाय की कमर तोड़ दी थी. ऐसे में लॉकडाउन की मार से व्यवसाय चौपट हो गया है. कारोबारी अनिल ने सरकार से मांग की है कि शादी समारोह में कम से कम 200 लोगों तक मेहमानों के आने की अनुमति सरकार दे, तब शादी के कार्ड का व्यवसाय चल पाए. फिलहाल दुकान खोलकर बैठे हैं, लेकिन कोई ग्राहकी नहीं हो रही है.

अजमेर. कोरोना ने प्रिंटिंग प्रेस, फ्लेक्स और शादियों के कार्ड से जुड़े व्यवसाय को मानो वेंटिलेटर पर ला दिया हो. लंबे लॉकडाउन में पुराने आर्डर का तैयार मॉल सब रद्दी हो चुका है, जिससे व्यवसाय को भारी नुकसान हुआ है. जिले में फ्लेक्स की 3 दर्जन दुकानें हैं. वहीं प्रिंटिंग प्रेस की ऑफसेट, स्क्रीन प्रिंटिंग और शादियों के कार्ड की लगभग ढाई सौ दुकानें हैं. इस कारोबार से करीब 3 हजार लोग जुड़े हुए हैं.

शादी से जीविका चलाने वालों का धंधा ठप

लंबे लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों के लिए वेतन पाना मुश्किल हो गया है. पुराने ऑर्डर का माल रद्दी होने से हुए नुकसान के कारण व्यवसायियों के पास दुकान का किराया और बिजली का बिल भरने तक के लाले पड़े हुए हैं. लॉकडाउन 4.0 के बाद सरकार ने कारोबारियों को कुछ राहत दी है, लेकिन इस राहत के बाद भी फ्लेक्स प्रिंटिंग प्रेस शादियों के कार्ड का कारोबार वेंटिलेटर से उठ नहीं पा रहा है. यानी कारोबारियों को नए आर्डर नहीं मिल पा रहे हैं. फ्लेक्स कारोबारी सुनील वर्मा ने बताया कि कोरोना ने फ्लेक्स कारोबार की कमर तोड़कर रख दी है. बाजार खुलने के बाद भी फ्लेक्स व्यवसाय रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है.

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व्यवसायियों को करीब 15 करोड़ का नुकसान

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शादी कार्ड के कारोबारी सुनील ने बताया कि लॉकडाउन में शादी कार्ड व्यवसाय को भारी झटका लगा है, पुराना माल रद्दी हो चुका है. उन्होंने बताया कि शादी के कार्ड बनाने को लेकर कई लोग जुड़े होते हैं. लॉकडाउन में सभी बेरोजगार हो गए हैं. शादी के कार्ड का सीजन अप्रैल, मई और जून का था. इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शादी के कार्डों की जमकर खरीदारी हुआ करती थी. लेकिन लॉकडाउन ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. हालात यह हैं कि दुकानों का महंगा किराया और बिजली का बिल भरने के लिए पैसे नहीं हैं. इतना ही नहीं छूट में दुकान तो खुल गई है, मगर नए आर्डर नहीं मिल रहे हैं.

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छूट मिलने के बाद भी नहीं मिल रहे आर्डर

एक अन्य शादी के कार्ड एवं प्रिंटिंग कारोबारी अनिल ने बताया कि सरकार ने दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है. लेकिन शादी समारोह में 50 लोगों की अनिवार्यता रखी है. ऐसे में व्हाट्सएप ने पहले ही शादी कार्ड और प्रिंटिंग व्यवसाय की कमर तोड़ दी थी. ऐसे में लॉकडाउन की मार से व्यवसाय चौपट हो गया है. कारोबारी अनिल ने सरकार से मांग की है कि शादी समारोह में कम से कम 200 लोगों तक मेहमानों के आने की अनुमति सरकार दे, तब शादी के कार्ड का व्यवसाय चल पाए. फिलहाल दुकान खोलकर बैठे हैं, लेकिन कोई ग्राहकी नहीं हो रही है.

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