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चंबल-अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दवाओं का संकट, बजट का है इंतजार - gwalior news

ग्वालियर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को आधी से ज्यादा दवाएं बाहर से लाना पड़ती हैं. हॉस्पिटल में 10 महीने से दबाओं के लिए सरकार ने बजट नहीं दिया है.

अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दवाओं का संकट
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Published : Aug 1, 2019, 7:07 PM IST

ग्वालियर| चंबल- अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को आधी से ज्यादा दवाएं बाहर से लाना पड़ती हैं. इलाज के दौरान सस्ती दवाएं तो मरीज को दे दी जाती हैं, लेकिन महंगी दवाएं नहीं दी जाती. मरीज के परिजन डॉक्टर के कहने पर बाहर से दवा लाने को मजबूर हो रहे हैं. वहीं जयारोग्य अस्पताल प्रशासन के सामने दवा का संकट खड़ा हो गया है. हॉस्पिटल में 10 महीने से दवाओं के लिए सरकार ने बजट नहीं दिया है. कॉरपोरेशन से मिला ढाई करोड़ का बजट भी खत्म हो चुका है.

अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दवाओं का संकट

अस्पताल में करीब सात हजार से ज्यादा लोग रोजाना इलाज के लिए आते हैं. वहीं करीब तीन हजार से ज्यादा मरीज कमला राजा अस्पताल में भर्ती रहते हैं. यहां आने वाले मरीजों को बाहर से दवा लाने को मजबूर होना पड़ रहा है. जयारोग्य अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनको अप्रैल 2019 से दवाओं का बजट नहीं मिला है.

अस्पताल में भर्ती और ओपीडी में आने वाले मरीजों के इलाज के लिए शासन हर साल दवा का भारी- भरकम बजट देता है. साल 2017-18 में शासन ने 8:50 करोड रुपए का बजट अलॉट किया था, लेकिन अस्पताल कुल बजट में से चार करोड़ रुपए ही खर्च कर पाया. साल 2018-19 में जयरोग्य अस्पताल दवाओं के बजट से तीन करोड़ रुपए भी खर्च नहीं कर पाया था.

ग्वालियर| चंबल- अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को आधी से ज्यादा दवाएं बाहर से लाना पड़ती हैं. इलाज के दौरान सस्ती दवाएं तो मरीज को दे दी जाती हैं, लेकिन महंगी दवाएं नहीं दी जाती. मरीज के परिजन डॉक्टर के कहने पर बाहर से दवा लाने को मजबूर हो रहे हैं. वहीं जयारोग्य अस्पताल प्रशासन के सामने दवा का संकट खड़ा हो गया है. हॉस्पिटल में 10 महीने से दवाओं के लिए सरकार ने बजट नहीं दिया है. कॉरपोरेशन से मिला ढाई करोड़ का बजट भी खत्म हो चुका है.

अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दवाओं का संकट

अस्पताल में करीब सात हजार से ज्यादा लोग रोजाना इलाज के लिए आते हैं. वहीं करीब तीन हजार से ज्यादा मरीज कमला राजा अस्पताल में भर्ती रहते हैं. यहां आने वाले मरीजों को बाहर से दवा लाने को मजबूर होना पड़ रहा है. जयारोग्य अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनको अप्रैल 2019 से दवाओं का बजट नहीं मिला है.

अस्पताल में भर्ती और ओपीडी में आने वाले मरीजों के इलाज के लिए शासन हर साल दवा का भारी- भरकम बजट देता है. साल 2017-18 में शासन ने 8:50 करोड रुपए का बजट अलॉट किया था, लेकिन अस्पताल कुल बजट में से चार करोड़ रुपए ही खर्च कर पाया. साल 2018-19 में जयरोग्य अस्पताल दवाओं के बजट से तीन करोड़ रुपए भी खर्च नहीं कर पाया था.

Intro:ग्वालियर अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रोड में आने वाले मरीजों को आधी से ज्यादा दवाएं बाहर से लाना पड़ती है द्वारा इलाज के दौरान सस्ती दवाओं तो मरीज को दे दी जाती हैं। लेकिन महंगी दवाएं नहीं दी जाती है। मजबूरन मरीज के परिजन दफ्तर के कहने पर बाहर से दवा लाने को मजबूर हो रहे हैं तो वहीं जयारोग्य अस्पताल प्रशासन के सामने दवा का संकट खड़ा हो गया है। अब 10 महीने से दबाव के लिए सरकार से बजट नहीं आया है वही कॉरपोरेशन से मिला ढाई करोड़ का बजट भी खत्म हो चुका है। गौरतलब है कि बीते वित्तीय वर्ष 2018 - 19 में अस्पताल की लापरवाही से दवाओं के लिए आवंटित बजट की तीन करोड़ रुपए लेप्स हो गए थे


Body:जरूर अस्पताल में करीब सात हजार से ज्यादा लोग रोजाना इलाज के लिए आते हैं वहीं करीब तीन हजार से ज्यादा मरीज है रोग और कमलाराजा में भर्ती रहते हैं यहां आने वाले मरीजों को बाहर से दवा लाने को मजबूर होना पड़ रहा है उधर जाए अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनकी अप्रैल 2019 से दवाओं का बजट नहीं मिला है अब तक कॉरपोरेशन से ढाई करोड़ रुपए के बजट से काम चलाया । लेकिन अब वह भी खत्म हो चुका है। अधीक्षक का कहना है कि जल्द ही सरकार से बजट मिल जाएगा। दिलचस्प बात तो यह है कि अस्पताल में भर्ती और ओपीडी में आने वाले मरीजों के इलाज के लिए शासन हर साल दवा का भारी-भरकम बजट अलाउड करता है साल 2017-18 में शासन की 8:50 करोङ रुपए का बजट अलर्ट किया था लेकिन अफसर कुल बजट में से 4 करोड़ रुपए खर्च कर पाए। साल 2018-19 में जयरोग्य अस्पताल अपनी दवाओं की बजट से तीन करोड़ रुपए खर्च नहीं कर पाया था ।ये आंकड़े अस्पताल की लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं


Conclusion:बाईट - अशोक मिश्रा , जेएएच अस्पताल अधीक्षक

बाईट - साबिर खान , मरीज का परिजन
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