भोपाल। कविता कहते सुनते ही जमाने तक पहुंचती है, कविता के पहिए होते हैं क्या? कविता तो ज़ुबान पर चलती है. साइकिल पर तो नहीं . लेकिन ज़मीन और आसमान के बीच कविता पाठ कर चुका कवि कविता को साइकिल की सवारी भी करवा सकता है. आप मुखातिब हैं कवि अटल कश्यप से, जो पहले चार हजार दो सौ फीट की ऊंचाई से पैराग्लाईडिंग करते हुए कविताएं पढ चुके हैं. अब अपनी चालीस कविताओं का पाठ उन्होंने साइकिल चलाते हुए किया. हर पैडल पर एक कविता पूरी की, साइकिल पर हुए इस कविता पाठ का रिकार्ड भी बन गया और अटल कश्यप का नाम एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो गया है.
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साइकिल पर कविता की महफिल: कवि अटल कश्यप से मिलने के बाद ये मंजूर कर लीजिए कि कविता पाठ के लिए बाकायदा महफिल ज़माने की जरुरत नहीं है, कविता का पाठ तो साईकिल पर फर्राटा भरते हुए किया जा सकता है. भोपाल के कवि अटल कश्यप ने ये किया भी है, नई लकीर खींचते हुए उन्होने अपनी कविताओं की किताब शब्दों के स्पर्श की चालीस कविताओं का पाठ साइकिल चलाते हुए कर डाला और ये प्रयोग नया रिकार्ड बन गया. इस अनोखे ढंग के कविता पाठ के साथ अटल कश्यप ने एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया, कवि अटल ने चालीस कविताओं का पाठ साईकिल चलाते हुए ही किया है. अटल कश्यप ने ईटीवी भारत से कहा कि "कुछ अनूठा और अलग करने की कोशिश में ये रिकार्ड बन गया, इस रिकार्ड के लिए मैंने भोपाल की सड़कों को चुना था."
ज़मी और आस्मां के बीच में कर चुके कविता पाठ: पेशे से फार्मा प्रोफेशनल अटल कश्यप की हर बात अलग है, जैसे पिछले सात साल से हर साल उनकी कविता की एक किताब प्रकाशित होती है, इसके पहले उन्होंने अपनी 40 कविताओं का संकलन बातें हमारी तुम्हारी का पाठ पैराग्लाइडिंग करते हुए किया था और तब भी इस कविता पाठ के साथ रिकार्ड दर्ज किया था. अटल कश्यप कहते हैं, "मुझे ये ख्याल आया कि जमीन पर कविता तो सभी पढ़ते हैं, मैने सोचा क्यों नहीं इस लीक से कुछ हटकर किया जाए. फिर लगा आसमान का मैदान क्या बुरा, जब बाकी दुनिया जमीन पर बैठकर कविताएं पढ़ रही है, हम आसमान पर उड़ते हुए कविताएं पढ़ेंगे और ऐसा पहले किसी ने किया भी नहीं था. इसके बाद मैंने एक मिनिट का समय लिया और फिर 40 कविताएं 40 मिनिट में पूरी कीं. टेक ऑफ और लैंडिंग मिलाकर कुल 45 मिनिट में ये इस कारनामें को अंजाम दे दिया."
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कविताएं भी आसमानी तूफानी: कवि अटल कश्यप की कविताएं आसमानी भी है और तूफानी भी, यानि उनमें कुदरत भी दर्ज है. आसमान परिंदे मौसम भी और आम आदमी के हिस्से आने वाले तूफान यानि संघर्ष भी, लेकिन मानवीय संवेदनाएं इन कविताओं का कॉमन फीचर है. सामाजिक बुराईयों पर भी अटल जी कविताओ में चोट की गई है, प्रकृति और इंसान के रिश्ते को नए ढंग से परिभाषित किया गया है.