भोपाल। आज से गणेश चतुर्थी शुरू हो चुकी है. देशभर में इन 10 दिनों में पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश की अराधना की जाएगी. ईटीवी भारत इन 10 दिनों में आपको भगवान गणेश के ऐसे रूपों से रूबरू कराएगा, जिसके बारे में आप शायद ही जानते होंगे. हमारे देश में भगवान गणेश को कई नामों से पूजा जाता है. तो आइए गणेश चतुर्थी के पहले दिन हम आपको भगवान गणेश के पहले नाम 'वक्रतुंड' के बारे में बताते हैं, और यह भी जानें कि आखिर पहले दिन भगवान को कैसे खुश करें.
भगवान गणेश के 12 नामों का उल्लेख
पंडित विष्णु राजोरिया के अनुसार, महर्षि नारद ने भगवान गणेश जी की स्तुति में 12 नामों का उल्लेख किया है. जिसमें पहला नाम वक्रतुंड यानी टेढ़ी सूंड वाला अर्थात सुमुख माना गया है. गणेश जी का मुख प्रतिपल देखने पर नया ही लगता है. इनके मुख की शोभा का आंकलन करते हुए इन्हें मंगल के प्रतीक के रूप में भी माना गया है. इसलिए इन्हें सुमुख के रूप में भी संबोधित किया जाता है.
भगवान गणेश के पहले वक्रतुंड अर्थात सुमुख स्वरूप की आराधना करने से सभी कार्य अच्छे और फलदायी होते हैं. इस दिन भगवान गणेश को भोग लगाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करने पर हर मनोकामना पूरी होती है.
- पंडित विष्णु राजोरिया
10 सितंबर गणेश चतुर्थी का पंचांगः जानें गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त, दिन-रात का चौघड़िया
कई नामों से पूजे जाते हैं गणेश
किसी भी देव की आराधना के आरंभ में, किसी भी सत्कर्म या अनुष्ठान में, उत्तम से उत्तम और साधारण से साधारण कार्य में भगवान गणपति का स्मरण और उनका विधिवत पूजन किया जाता है. गणेश की पूजा के बिना कोई भी मांगलिक कार्य शुरू नहीं किया जाता है. शास्त्रों में भी भगवान गणेश की सबसे पहले पूजा करने का उल्लेख है. किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति जी का पूजन भारतीय परंपरा की विशेषता है. पंडित विष्णु राजोरिया ने बताया कि गणेश जी को विघ्नेश्वर, एकदंत, गजानन, गणनायक, गणराज, गणाध्यक्ष, लंबोदर समेत अनेक नामों से पूजा जाता है.
जानें पहले दिन की पूजा विधि
गणेश चतुर्थी के पहले दिन सुबह स्नान-ध्यान कर गणपति के व्रत का संकल्प लें. इसके बाद दोपहर के समय गणपति की प्रतिमा को लाल कपड़े के ऊपर रखें. गंगाजल छिड़कने के बाद भगवान गणेश का आह्वान करें. भगवान गणेश को पुष्प, सिंदूर, जनेऊ और दूर्वा चढ़ाएं. इसके बाद भगवान गणेश को मोदक, लड्डू चढ़ाएं, मंत्रोच्चारण से उनका पूजन करें. गणेश जी की कथा पढ़ें या सुनें, गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें.