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रांची में निर्माणाधीन ड्रीम हाउस प्रोजेक्ट का एक हिस्सा गिरा, प्रभावित लाभुकों ने नगर निगम कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन - Jharkhand news

रांची में ड्रीम हाउस प्रोजेक्ट का एक हस्सा गिरने के बाद इसके लाभुक आक्रोशित हैं. लाभुकों का आरोप है कि उन्हें निर्माण स्थल पर भी नहीं जाने दिया जा रहा है, ऐसे में इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है.

Dream House project
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Published : Jul 14, 2023, 7:17 PM IST

रांची: केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना लाइट हाउस प्रोजेक्ट जिसके तहत गरीब परिवारों को कम पैसे में रहने के लिए नगर निगम क्षेत्र में आशियाना उपलब्ध कराने कि केंद्र सरकार की योजना है. उसी के रांची प्रोजेक्ट के निर्माणाधीन भवन खंड एफ का एक बड़ा हिस्सा विगत 10 जुलाई को देर रात्रि अचानक धराशाई हो गया. इस घटना के बाद आसपास रह रहे लाभुकों ने प्रोजेक्ट स्थल तक पहुंचने का प्रयास किया. जिसे वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया. अब लाभुकों का कहना है कि धुर्वा में बन रहे निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में इस्तेमाल की जाने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता ठीक नहीं है.

ये भी पढ़ें: PM मोदी का सपना हुआ साकार! रांची में 1008 लोगों को 25 जुलाई से मिलेगा फ्लैट

भवन के हिस्से के धराशाई होने के बाद लाभुकों के मन में इस बात की प्रबल आशंका है कि आने वाले वक्त में इस प्रोजेक्ट में रहने वाला गरीब परिवार किसी भी प्रकार की अनहोनी का शिकार हो सकता है. इसी मुद्दे पर सैकड़ों लाभुक इकट्ठा हुए और उन्होंने 14 जुलाई को स्थानीय नगर निगम कार्यालय के सामने एक सांकेतिक प्रदर्शन किया. लाभुकों के द्वारा इस प्रोजेक्ट के गुणवत्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और इसमें बेहतर सामग्री का प्रयोग करने की बात कही गई. ऐसा नहीं करने पर प्रोजेक्ट को तत्काल बंद कर देने की मांग को लेकर एक ज्ञापन नगर आयुक्त को सौंपा गया. इसके बाद रांची उपायुक्त को भी ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम है.

लाभुकों का कहना है कि जब तक उन्हें इस निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के समाप्त होने के बाद उनका मकान नहीं मिल जाता तब तक बैंकों से लिए गए उनके कर्ज पर सरकार ऋण माफ करवाएं. इस घटना के बाद उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके ऋण स्वीकृति तक लाभुकों की सूची से उनके नाम किसी कीमत पर नहीं हटाए जाए. प्रदर्शन में पहुंची महिलाओं का यह कहना था कि अगर आने वाले दिनों में जब सैकड़ों परिवार इस प्रोजेक्ट में रहने लगेंगे और उसके बाद किसी प्रकार की कोई अनहोनी घटना घटती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

प्रोजेक्ट में मकान पाने वाले लाभुक चंदन पाठक ने कहा कि ये कैसा प्रोजेक्ट है जिसमें उन्होंने अपना घर लिया और उसके लिए बैंकों से कर्ज उठाया है और उसको देखने की इजाजत भी प्रोजेक्ट संचालकों द्वारा नहीं दी जा रही है. निरंजन कुमार ने कहा कि लाभुकों को प्रोजेक्ट कैंपस के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाना इस ओर इशारा करता है कि निश्चत ही निर्माण करने वाली कंपनियों और सरकार कुछ ना कुछ छिपा रही है. इस सांकेतिक धरना कार्यक्रम में मुख्य रूप से पिंकी देवी, नीलू देवी, कृष्णा देवी, रीता देवी, इंदू देवी, अन्नपूर्णा शर्मा, सोमा तिवारी प्रसाद, जगत नारायण सिंह, जगदीश प्रसाद, कमलेश कुमार और बड़ी संख्या में लाभुक मौजूद रहे.

रांची: केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना लाइट हाउस प्रोजेक्ट जिसके तहत गरीब परिवारों को कम पैसे में रहने के लिए नगर निगम क्षेत्र में आशियाना उपलब्ध कराने कि केंद्र सरकार की योजना है. उसी के रांची प्रोजेक्ट के निर्माणाधीन भवन खंड एफ का एक बड़ा हिस्सा विगत 10 जुलाई को देर रात्रि अचानक धराशाई हो गया. इस घटना के बाद आसपास रह रहे लाभुकों ने प्रोजेक्ट स्थल तक पहुंचने का प्रयास किया. जिसे वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया. अब लाभुकों का कहना है कि धुर्वा में बन रहे निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में इस्तेमाल की जाने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता ठीक नहीं है.

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भवन के हिस्से के धराशाई होने के बाद लाभुकों के मन में इस बात की प्रबल आशंका है कि आने वाले वक्त में इस प्रोजेक्ट में रहने वाला गरीब परिवार किसी भी प्रकार की अनहोनी का शिकार हो सकता है. इसी मुद्दे पर सैकड़ों लाभुक इकट्ठा हुए और उन्होंने 14 जुलाई को स्थानीय नगर निगम कार्यालय के सामने एक सांकेतिक प्रदर्शन किया. लाभुकों के द्वारा इस प्रोजेक्ट के गुणवत्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और इसमें बेहतर सामग्री का प्रयोग करने की बात कही गई. ऐसा नहीं करने पर प्रोजेक्ट को तत्काल बंद कर देने की मांग को लेकर एक ज्ञापन नगर आयुक्त को सौंपा गया. इसके बाद रांची उपायुक्त को भी ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम है.

लाभुकों का कहना है कि जब तक उन्हें इस निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के समाप्त होने के बाद उनका मकान नहीं मिल जाता तब तक बैंकों से लिए गए उनके कर्ज पर सरकार ऋण माफ करवाएं. इस घटना के बाद उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके ऋण स्वीकृति तक लाभुकों की सूची से उनके नाम किसी कीमत पर नहीं हटाए जाए. प्रदर्शन में पहुंची महिलाओं का यह कहना था कि अगर आने वाले दिनों में जब सैकड़ों परिवार इस प्रोजेक्ट में रहने लगेंगे और उसके बाद किसी प्रकार की कोई अनहोनी घटना घटती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

प्रोजेक्ट में मकान पाने वाले लाभुक चंदन पाठक ने कहा कि ये कैसा प्रोजेक्ट है जिसमें उन्होंने अपना घर लिया और उसके लिए बैंकों से कर्ज उठाया है और उसको देखने की इजाजत भी प्रोजेक्ट संचालकों द्वारा नहीं दी जा रही है. निरंजन कुमार ने कहा कि लाभुकों को प्रोजेक्ट कैंपस के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाना इस ओर इशारा करता है कि निश्चत ही निर्माण करने वाली कंपनियों और सरकार कुछ ना कुछ छिपा रही है. इस सांकेतिक धरना कार्यक्रम में मुख्य रूप से पिंकी देवी, नीलू देवी, कृष्णा देवी, रीता देवी, इंदू देवी, अन्नपूर्णा शर्मा, सोमा तिवारी प्रसाद, जगत नारायण सिंह, जगदीश प्रसाद, कमलेश कुमार और बड़ी संख्या में लाभुक मौजूद रहे.

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