रांची: कोरोना महामारी ने सभी क्षेत्रों को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है, जिससे लोग परेशान हैं. शिक्षा पर भी इसका खासा असर पड़ा है. कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है.
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बीते साल 2020 के मार्च से लेकर अब तक कोरोना से रोजगार अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. इस दौरान बच्चों की शिक्षा काफी बाधित हुई है. लॉकडाउन होने से स्कूलों को बंद करने की नौबत आ गई. स्कूलों और छात्रों के सामने परेशानी का पहाड़ खड़ा हो गया.
ऑनलाइन क्लास से नहीं मिल रहा लाभ
लॉकडाउन में ऑनलाइन क्लासेस एक विकल्प के तौर पर देखा गया था. लेकिन अब ऑनलाइन क्लासेस पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को ज्यादातर चीजें समझ नहीं आती, जिससे वो अब ऑनलाइन शिक्षा से परेशान हो रहे हैं. बड़ी बात यह है कि उच्च विद्यायल के बच्चे ऑनलाइन क्लासेस किसी तरह से कर लेते हैं, क्योंकि उन्हें काफी कुछ समझ में आ पाता है. बच्चे बताते हैं कि जब स्कूल खुले हुए थे तब पढ़ाई समझ में आती थी. ऑनलाइन क्लासेस में मोबाइल पर इंटरनेट के जरिए पढ़ाई होती है, जिसमें नेट प्रॉब्लम के कारण ठीक से आवाज नहीं आती और पढ़ाई करने में दिक्कत आ रही है.
क्या कहते हैं अभिभावक
ये तो हुई बच्चों की परेशानी , लेकिन इससे सबसे ज्यादा परेशानी अभिभावकों को उठानी पड़ रही है. इनका कहना है कि ऑनलाइन क्लासेस से बच्चों को जो कुछ सीखना होता है वे नहीं सीख पाते हैं. ऐसी स्थिति में पढ़ाई हो या न हो पूरा फीस भरना पड़ता है. आखिर वो पैसा कहां से लाएंगे. वहीं अभिभावक सरकार से मांग भी कर रहे हैं कि स्कूलों की इस तरह की मनमानी बंद हो और प्राइमरी स्कूलों के बारे में उचित विचार करें.
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पेरेंट्स एसोसिएशन ने लिया संज्ञान
ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर स्कूलों की ओर से फीस लिए जाने को लेकर झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन भी गंभीर है. एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि मौजूदा स्थिति में पेरेंट्स काफी मुश्किल हालात में हैं. ऐसी स्थिति में राज्य सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो एसोसिएशन कोर्ट की शरण में जाएगा.