गोड्डा: जिले के पुराना समाहरणालय परिसर में 50 बेड के अस्पताल भवन का सोमवार को सांसद निशिकांत दुबे ने भूमि पूजन किया. इसको लेकर शिलापट्ट भी लगाया गया है. जिसमें भवन के निर्माण की प्राक्कलित राशि 23 .75 करोड़ रुपए है. गौरतलब हो कि 8 दिसंबर को सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इसी 50 बेड के अस्पताल निर्माण का शिलान्यास किया था. सीएम के द्वारा किए गए शिलान्यास का शिलापट्ट भी लगा है.
दोनों शिलापट्ट में क्या है अंतरः दोनों शिलापट्ट में असमानता के साथ कई समानता भी है. जैसे दोनों शिलापट्ट में सांसद निशिकांत दुबे का नाम है, लेकिन एक में छोटे और नीचे है तो दूसरे में मोटे अक्षर और ऊपर अंकित है. जबकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शिलापट्ट में झारखंड सरकार के तीन मंत्री आलमगीर आलम, मंत्री बन्ना गुप्ता और मंत्री सत्यानंद भोक्ता का नाम अंकित है. वहीं सांसद के द्वार किए गए भूमि पूजन वाले शिलापट्ट में गोड्डा के भाजपा विधायक अमित मंडल का नाम अंकित है. दोनों ही शिलापट्ट में भवन निर्माण विभाग और चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग लिखा है. साथ ही गोड्डा के उपायुक्त का नाम और अन्य पदाधिकारियों का नाम पदनाम अंकित है.
एक ही योजना का दो बार शिलान्यास होने से जिले में चर्चाओं का बाजार गर्मः अब एक ही योजना का दो नेताओं के द्वारा शिलान्यास से शहर में तरह-तरह की चर्चा हो रही है. कई लोग इसे चुनावी साल के मद्देनजर शिलापट्ट की राजनीति तो कई श्रय लेने की होड़ बता रहे हैं. महज एक पखवाड़ा पूर्व 8 दिसंबर 2023 को योजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया था और उसका काम भी शुरू हो गया है, लेकिन फिर उसी जगह फिर सांसद डॉ निशिकांत दुबे 25 दिसंबर को योजना का भूमि पूजन करते हैं. ऐसे में शहर में चर्चा है कि दो दिग्गजों के बीच श्रेय लेने की होड़ मची है.
चुनाव का समय करीब आते ही श्रेय लेने की मची होड़ः वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं तो दूसरी ओर 29 दिसंबर को हेमंत सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं. ऐसे में सांसद निशिकांत दुबे हो या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोनों चुनावी मोड में हैं और फिर दोनों की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता जगजाहिर है. कोई भी मौका हो एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का कोई मौका नहीं चूकता है. ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों आया था, जब सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में आठ दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गोड्डा के गांधीग्राम आए थे तो उस वक्त निमंत्रण नहीं मिलने की बात भाजपा के गोड्डा विधायक अमित मंडल ने कही थी, लेकिन उन्हें बाद में निमंत्रण मिला. साथ ही विपक्ष का कोई सांसद और विधायक कार्यक्रम में नहीं पहुंचा था, लेकिन आमंत्रण पत्र में सबके नाम अंकित थे. जाहिर है चुनावी वर्ष है तो दाव-पेंच भी चुनावी होगा और योजनाओं का श्रेय लेने का होड़ भी और संभव है.
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