दुमका: जिले में पिछले एक दशक से नक्सली गतिविधियां जोरों पर हैं. एसपी समेत कई पुलिसकर्मी शहीद हुए. इसको लेकर 4 साल पहले दुमका में एसएसबी को पदास्थापित किया गया. इसके बाद नक्सलियों के खिलाफ कई सफलता मिली. इसी कड़ी में सोमवार 17 जून को 6 हार्डकोर नक्सलियों का आत्मसमपर्ण हुआ, लेकिन पुलिस फाइल में अभी भी कई नक्सली हैं जो सक्रिय हैं. इन नक्सलियों ने 15 दिन पहले एसएसबी के जवानों को निशाना बनाया, जिसमें 1 जवान की मौत और 3 घायल हुए.
जानकारी के मुताबिक, दुमका में अभी गिरिडीह के विजय दा और निशिकांत का दस्ता सक्रिय है. इनके खात्मे के लिए जिला पुलिस और एसएसबी अब संयुक्त रणनीति पर काम कर रही है. सुरक्षाबलों का प्रयास है कि नक्सली आत्मसमर्पण करें और समाज की मुख्य धारा में जुड़ें. अगर वो हिंसा के रास्ते में चलना चाहते हैं, तो उनके साथ सख्ती बरती जाएगी.
क्या कहते हैं एसपी और एसएसबी के कमांडेंट
दुमका में सोमवार को 6 नक्सलियों के सरेंडर के बाद पुलिस और चुस्त दुरुस्त नजर आ रही है. मंगलवार को दुमका एसपी कार्यालय में पुलिस अधिकारियों की एक बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति पर गहन विचार किया गया. दुमका स्थित एसएसबी की 35 वीं बटालियन के कमांडेंट परीक्षित का कहना है कि नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ दें, नहीं तो हम पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर उनका खात्मा कर देंगे.
वहीं, दुमका एसपी वाईएस रमेश का कहना है कि अब हमारा सूचना तंत्र काफी मज़बूत हो गया है. हमारे पास काफी सूचनाएं आ रही हैं. आने वाले दिनों में कई नक्सली सरेंडर कर सकते हैं. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर नक्सली हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ते हैं तो उनका हश्र सिर्फ मौत है.