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चतरा: मौत के साए में जीने को मजबूर पुलिसकर्मी, ईटीवी भारत की रिपोर्ट में हुआ खुलासा - चतरा पुलिस

चतरा में जिला की सुरक्षा के लिए लगे पुलिसकर्मियों की सुरक्षा ही ताक पर है. ये पुलिसकर्मी जर्जर भवन में रहने को मजबूर हैं, छत से पानी टपकता रहता है. बड़े अधिकारियों का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है.

dilapidated housing of police in Chatra
पुलिसकर्मियों का जर्जर आवास
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Published : Nov 20, 2020, 11:01 AM IST

चतरा: जिस विभाग को समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है उसी विभाग के कर्मचारी हर समय मौत के साए में जीने को मजबूर है. हम बात कर रहे हैं चतरा के सिमरिया थाने की जहां ईटीवी भारत के टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि पुलिसकर्मियों को मिले आवासों की स्थिति इतनी खस्ता है कि अब तो खुद खाकी कहने लगी है कि हम लोग खौफ के साए में रहते हैं. हालांकि, इसके बाद भी विभाग की ओर से पुलिसकर्मियों को इन जर्जर आवासों से निजात दिलाने की व्यवस्था नहीं की गई है. इस भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हुई हैं. यहां बारिश में छत से पानी भी गिरता रहता है. कीड़े-मकोड़े निकलना तो यहां की आम बात है फिर भी लोगों की सुरक्षा करने वाले इस छत के नीचे रहने को मजबूर हैं.

देखें पूरी खबर

ये भी पढ़ें-झामुमो विधायक नलिन सोरेन बिरसा मुंडा उत्कृष्ट विधायक मनोनीत

वहीं, कई ऐसे आवास है जहां पर सालों से मेंटेनेंस और पुताई नहीं कराई गई. सिमरिया थाने में पदस्थ पुलिसकर्मियों को एक लंबे समय से आवासों की समस्या से जूझना पड़ रहा है. पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवास बने ही नहीं है. आवास कि स्थिति इतनी खराब है कि वो भी किसी भी दिन धाराशायी हो सकते हैं. विभाग की ओर से इन आवासों की मरम्मत के लिए प्रयास नहीं किए गए. जिसका खामियाजा पुलिसकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है.

पुलिसकर्मियों के आवास पूरी तरह से जर्जर हैं. इनमें शौचालय, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद नहीं हैं. इनमें रहने वाले पुलिसकर्मी हर समय दहशत के साए में जीवन गुजारते हैं. पुलिसकर्मी किसी भी दिन भीषण हादसे का शिकार बन सकते हैं, जिस तरह से अधिकारी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं. सिमरिया थाने में रहने वाले जवान बताते हैं कि उन्हें नक्सलियों और अपराधियों से कोई भय नहीं लगता है. डर लगता है तो जर्जर भवन से, कब सोए-सोए मौत आ जाए.

पुलिसकर्मी कहते हैं कि उनकी मौत वीरता के साथ होनी चाहिए, लेकिन वो कायरता के साथ थाना भवन के अंदर मरना नहीं चाहते हैं. जर्जर भवन के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई विकल्प नहीं निकाला गया है. अगर समय रहते भवन को मरम्मत नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है. दिनभर ड्यूटी के बाद पुलिस के जवान रात के समय दो घंटे भी चैन से सो नहीं पाते हैं. समय-समय पर छत का टुकड़ा गिरता रहता है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो कभी भी बड़ी घटना घट सकती है.

चतरा: जिस विभाग को समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है उसी विभाग के कर्मचारी हर समय मौत के साए में जीने को मजबूर है. हम बात कर रहे हैं चतरा के सिमरिया थाने की जहां ईटीवी भारत के टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि पुलिसकर्मियों को मिले आवासों की स्थिति इतनी खस्ता है कि अब तो खुद खाकी कहने लगी है कि हम लोग खौफ के साए में रहते हैं. हालांकि, इसके बाद भी विभाग की ओर से पुलिसकर्मियों को इन जर्जर आवासों से निजात दिलाने की व्यवस्था नहीं की गई है. इस भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हुई हैं. यहां बारिश में छत से पानी भी गिरता रहता है. कीड़े-मकोड़े निकलना तो यहां की आम बात है फिर भी लोगों की सुरक्षा करने वाले इस छत के नीचे रहने को मजबूर हैं.

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वहीं, कई ऐसे आवास है जहां पर सालों से मेंटेनेंस और पुताई नहीं कराई गई. सिमरिया थाने में पदस्थ पुलिसकर्मियों को एक लंबे समय से आवासों की समस्या से जूझना पड़ रहा है. पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर आवास बने ही नहीं है. आवास कि स्थिति इतनी खराब है कि वो भी किसी भी दिन धाराशायी हो सकते हैं. विभाग की ओर से इन आवासों की मरम्मत के लिए प्रयास नहीं किए गए. जिसका खामियाजा पुलिसकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है.

पुलिसकर्मियों के आवास पूरी तरह से जर्जर हैं. इनमें शौचालय, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद नहीं हैं. इनमें रहने वाले पुलिसकर्मी हर समय दहशत के साए में जीवन गुजारते हैं. पुलिसकर्मी किसी भी दिन भीषण हादसे का शिकार बन सकते हैं, जिस तरह से अधिकारी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं. सिमरिया थाने में रहने वाले जवान बताते हैं कि उन्हें नक्सलियों और अपराधियों से कोई भय नहीं लगता है. डर लगता है तो जर्जर भवन से, कब सोए-सोए मौत आ जाए.

पुलिसकर्मी कहते हैं कि उनकी मौत वीरता के साथ होनी चाहिए, लेकिन वो कायरता के साथ थाना भवन के अंदर मरना नहीं चाहते हैं. जर्जर भवन के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई विकल्प नहीं निकाला गया है. अगर समय रहते भवन को मरम्मत नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है. दिनभर ड्यूटी के बाद पुलिस के जवान रात के समय दो घंटे भी चैन से सो नहीं पाते हैं. समय-समय पर छत का टुकड़ा गिरता रहता है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो कभी भी बड़ी घटना घट सकती है.

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