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रांची: रामनाथ कोविंद फाउंडेशन के नाम पर साइबर फ्रॉड, सर्वे के बहाने बैंक खातों का डिटेल मांग पैसे उड़ा रहे साइबर अपराधी - रिलिफ फंड के नाम पर साइबर ठगी

रांची में साइबर ठगी के मामले में साइबर थाने में शिकायत दर्ज करायी गई है. बता दें कि राज्य में साइबर अपराधी हर बार नए तरीके से लोगों से लूट कर रहे हैं. फिलहाल साइबर पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुटी है.

Cyber fraud in the name of Relief Fund
रिलिफ फंड के नाम पर साइबर ठगी
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Published : Sep 18, 2020, 8:10 PM IST

रांचीः झारखंड में साइबर अपराध हर दिन नए तरीके से लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं. झारखंड में अब राष्ट्रपति डॉ रामनाथ कोविंद के नाम से फर्जी फाउंडेशन के ई-मेल से साइबर ठगी की जा रही है. कोरोना से प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर साइबर अपराधी ठगी को अंजाम दे रहे हैं.

ये भी पढ़ें-BJP ने ऑनलाइन किताब का किया विमोचन, पुस्तक में कार्यकर्ताओं के कामों का उल्लेख

कैसे की जा रही है ठगी

आमलोगों को ई-मेल भेजकर या फेसबुक लिंक के जरिए जानकारी दी जाती है कि कोविड-19 के लिए रामनाथ कोविंद फाउंडेशन की ओर से 5000 रुपये की सहायता राशि रिलिफ फंड के तौर पर दी जा रही है. बताया जा रहा है कि कोविड पॉजिटिव पाए गए लोग इस फाउंडेशन से इस रकम को प्राप्त कर सकते हैं. बता दें कि ई-मेल लिंक के जरिए अपराधी आमलोगों के बैंक खातों की जानकारी मांगते हैं. इसके बाद पैसे की निकासी खाते से कर ली जाती है. झारखंड पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को ठगी के पूरे मामले की जानकारी मिली थी, जिसके बाद निलिन नाम के व्यक्ति की शिकायत पर इस मामले में रांची के साइबर थाने में शिकायत दर्ज की गई है. साइबर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

साइबर पीस फाउंडेशन ने भी जांच में पकड़ी गड़बड़ी

राज्य में साइबर अपराध पर काम करने वाली संस्था साइबर पीस फाउंडेशन ने रामनाथ कोविंद फाउंडेशन डॉट कॉम और फंड फोर कोविड-19 डॉट कॉम के संबंध में पड़ताल की है. पड़ताल में यह पाया गया कि दोनों फर्जी वेबसाइट से मेल किए जा रहे थे. साथ ही व्हाट्सएप में भी फर्जी संदेश वायरल कराया जा रहा था. इनमें दावा किया जाता है कि सरकार की ओर से जारी रिलिफ फंड पाने के लिए एक दिए हुए लिंक पर क्लिक करना होगा. साथ ही कुछ सवालों के जवाब देने होंगे. दो तीन बेसिक सवालों के बाद पैसे जमा कराने के लिए बैंक खाते और उससे संबंधित जानकारी मांगी जाती है.

फेसबुक का हो रहा इस्तेमाल

इस पूरी जालसाजी में साइबर अपराधी फेसबुक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. साइबर पीस फाउंडेशन ने पाया है कि कई बार पूरी जानकारी शेयर करने के बाद हरे रंग के बैंकग्राउंड में शेयर नाऊ का ऑप्शन आता है. उसे क्लिक करने पर फेसबुक पेज खुलता है, जिसमें कई लोगों के माध्यम से फर्जी तौर पर यह बताया जाता है कि फाउंडेशन की ओर से उन्हें मदद मिली है.

रांचीः झारखंड में साइबर अपराध हर दिन नए तरीके से लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं. झारखंड में अब राष्ट्रपति डॉ रामनाथ कोविंद के नाम से फर्जी फाउंडेशन के ई-मेल से साइबर ठगी की जा रही है. कोरोना से प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर साइबर अपराधी ठगी को अंजाम दे रहे हैं.

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कैसे की जा रही है ठगी

आमलोगों को ई-मेल भेजकर या फेसबुक लिंक के जरिए जानकारी दी जाती है कि कोविड-19 के लिए रामनाथ कोविंद फाउंडेशन की ओर से 5000 रुपये की सहायता राशि रिलिफ फंड के तौर पर दी जा रही है. बताया जा रहा है कि कोविड पॉजिटिव पाए गए लोग इस फाउंडेशन से इस रकम को प्राप्त कर सकते हैं. बता दें कि ई-मेल लिंक के जरिए अपराधी आमलोगों के बैंक खातों की जानकारी मांगते हैं. इसके बाद पैसे की निकासी खाते से कर ली जाती है. झारखंड पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को ठगी के पूरे मामले की जानकारी मिली थी, जिसके बाद निलिन नाम के व्यक्ति की शिकायत पर इस मामले में रांची के साइबर थाने में शिकायत दर्ज की गई है. साइबर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

साइबर पीस फाउंडेशन ने भी जांच में पकड़ी गड़बड़ी

राज्य में साइबर अपराध पर काम करने वाली संस्था साइबर पीस फाउंडेशन ने रामनाथ कोविंद फाउंडेशन डॉट कॉम और फंड फोर कोविड-19 डॉट कॉम के संबंध में पड़ताल की है. पड़ताल में यह पाया गया कि दोनों फर्जी वेबसाइट से मेल किए जा रहे थे. साथ ही व्हाट्सएप में भी फर्जी संदेश वायरल कराया जा रहा था. इनमें दावा किया जाता है कि सरकार की ओर से जारी रिलिफ फंड पाने के लिए एक दिए हुए लिंक पर क्लिक करना होगा. साथ ही कुछ सवालों के जवाब देने होंगे. दो तीन बेसिक सवालों के बाद पैसे जमा कराने के लिए बैंक खाते और उससे संबंधित जानकारी मांगी जाती है.

फेसबुक का हो रहा इस्तेमाल

इस पूरी जालसाजी में साइबर अपराधी फेसबुक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. साइबर पीस फाउंडेशन ने पाया है कि कई बार पूरी जानकारी शेयर करने के बाद हरे रंग के बैंकग्राउंड में शेयर नाऊ का ऑप्शन आता है. उसे क्लिक करने पर फेसबुक पेज खुलता है, जिसमें कई लोगों के माध्यम से फर्जी तौर पर यह बताया जाता है कि फाउंडेशन की ओर से उन्हें मदद मिली है.

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