सोलन: हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर से एकत्र हो चुकी है. इसी कड़ी में महासंघ सोलन इकाई ने अपनी मांगों को लेकर डीसी सोलन के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेजा है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि पिछले कई वर्षों से सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाने में उदासीनता भरा रवैया रहा है.
महासंघ ने आज तक 56 सूत्रीय मांग पत्र सौंपे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से उन पर कोई चर्चा नहीं हो रही है. साथ ही जेसीसी की कोई बैठक नहीं हो रही है. महासंघ का कहना है कि 6 महीने में एक बार जेसीसी की बैठक का होना जरूरी है. राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर देश की सभी राज्य सरकारों को कर्मचारी संगठनों ने राष्ट्रीय मुद्दों के साथ ही स्थानीय कर्मचारियों की समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपे हैं.
राष्ट्रीय स्तर पर 24 जुलाई से 30 जुलाई तक सरकार जगाओ अभियान के तहत सोमवार को हिमाचल प्रदेश के कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इस अभियान में हिस्सा लिया. महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष एनआर ठाकुर के नेतृत्व में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ सोलन ने अपनी मांगों को लेकर महासंघ ज्ञापन सौंपा है. वेतन आयोग की रिपोर्ट को पंजाब सरकार का इंतजार किए बिना तुरंत लागू करने की मांग की है. पुरानी पेंशन बहाल की जाए और फ्रीज डीए को भी बहाल किया जाए.
महासंघ ने मांग की है कि निजीकरण व ठेका प्रणाली प्रथा को बंद किया जाए. कर्मचारी श्रमिक विरोधी नीतियों को सरकार वापस ले और रद्द श्रम कानूनों को बहाल किया जाए. उन्होंने मांग की है कि कर्मचारियों और श्रमिकों की वेतन विसंगतियां दूर हों और उन्हें पूरा वेतन दिया जाए. सरकार व कर्मचारी संगठन को आगे बढ़ने के लिए आपसी विश्वास की बहाली जरूरी है.
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार कर्मचारी संगठन को आगे बढ़ने के लिए आपसी विश्वास की बहाली जरूरी है. उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द प्रदेश की सरकार बैठक बुलाए ताकि कर्मचारियों को आ रही समस्याओं का निपटारा हो सके. अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष जय किशन ठाकुर का कहना है कि अगर आगे भी इसी तरह प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हितों को दरकिनार करती रही तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ सकता है.
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