शिमला: हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक का विरोध शुरू हो गया है. शिमला के कालीबाड़ी हॉल में सीपीआईएम विधायक राकेश सिंघा की अध्यक्षता में आज एक बैठक की गई. जिसमें इस विधेयक का (CPIM MLA Rakesh Singha) विरोध किया गया. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने हाल ही में विधानसभा में जो विधेयक प्रस्तुत किया (हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2022) वह गैर कानूनी है.
उन्होंने कहा कि अगर दलित हिंदू रीति रिवाज में और हिंदू समाज में शोषित है तो कहीं भी किसी भी धर्म को अपनाने की तथा उसका प्रचार प्रसार करने की आजादी दे करके उसमें अनुच्छेद 25 की धारा को जोड़ दिया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उस विधेयक के अंदर जो बंदिशें लगाई है, वह बिल्कुल गलत (Protest against Religious freedom bill in Himachal ) हैं.
धार्मिक स्वतंत्रता की सबको आजादी: विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता (Religious freedom bill in Himachal) की सब को आजादी है. इस विधेयक को लाने का कोई भी औचित्य नहीं है, यह लोगों पर तो थोपने जैसी बात है. इस वापस लें, ताकि लोगों को न्याय मिल सके. उनका कहना है कि अगर सरकार अपनी जिद पर अड़ी रही तो लोग संघर्ष करने को मजबूर हो जाएंगे. ऐसे में आने वाले दिनों में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं.
सरकार ने ये विधेयक किया है पास: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन प्रदेश में धर्मांतरण संशोधन विधेयक को पारित किया गया. इसके तहत अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित वर्ग के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो उनको किसी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा. इसके अलावा अगर वे धर्म परिवर्तन की बात छिपाकर आरक्षण की सुविधाएं लेते हैं तो ऐसे में उन्हें तीन से पांच साल तक सजा और 50,000 से एक लाख रुपये तक का जुर्माना होगा.
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