कुल्लू: देश के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद जहां अपने दो दिवसीय दौरे के चलते शुक्रवार को जहां धर्मशाला में थे, वहीं आज राष्ट्रपति पर्यटन नगरी मनाली का रुख करेंगे. इस दौरान राष्ट्रपति जहां पर देश दुनिया के सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी अटल टनल का (RAM NATH KOVIND VISITS ATAL TUNNEL) दौरा करेंगे तो वहीं, दोपहर का भोजन भी वे पहाड़ी व्यंजनों के साथ करेंगे. ऐसे में राष्ट्रपति के खाने के (President eat Himachali food) मैन्यू में जहां कुल्लू के लाल चावल शामिल रहेंगे तो वहीं, स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर लाहौल का आलू भी डाइनिंग टेबल की शान बढ़ाएगा. इसके अलावा बाथू की खीर व रौंगी का मद्रा भी राष्ट्रपति के मैन्यू में शामिल रहेगा.
लाहौल का लाल आलू स्वाद और सेहत के लिए नंबर 1: राष्ट्रपति के खाने के मैन्यू में लाहौल का आलू (Lahaul Red Potato) भी शामिल है. ऐसे में लाहौल के आलू को एक बार फिर से देश- दुनिया में पहचान मिलने वाली है, क्योंकि लाहौल घाटी की आर्थिकी को मजबूत करने में आलू ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है. लाहौल का लाल आलू घाटी के लोगों के लिए आर्थिकी का मुख्य स्त्रोत बना हुआ है. विटामिन, कार्बोहाइड्रेट व फाइबर से भरपूर लाहौल घाटी में पैदा होने वाला लाल आलू सेहत का ख्याल भी रखेगा. वसा, कोलेस्ट्रोल मुक्त व कम मात्रा में सोडियम होने से संतुलित आहार में इसका कोई मुकाबला नहीं है. मक्खन जैसा स्वाद इसे और लजीज बनाता है. इसे भून कर खाएं या सब्जी व परांठा बनाकर, स्वाद लाजवाब है.
लाहौल में 958 हेक्टेयर भूमि में होती है लाल आलू की खेती: अपनी खूबियों के चलते लाहौल-स्पीति जिले में बड़ी संख्या में किसान अब लाल आलू का उत्पादन करने लगे हैं. जिले में करीब 958 हेक्टेयर भूमि में आलू की खेती होती है. घाटी के किसान कारोबार के लिए संताना आलू का भी उत्पादन करते हैं. संताना से चिप्स व बीज बनता है, यह खाने में स्वादिष्ट नहीं होता. लाल आलू को पांगी आलू भी बोलते हैं. इसका बीज कहां से आया, इसको लेकर विभिन्न मत हैं. कुछ लोग कहते हैं कि चंबा जिले के पांगी से इसका बीज लाया गया था. धीरे-धीरे किसानों ने इसका उत्पादन करना शुरू कर दिया. कुछ लोग इसे कुफरी लालिमा की किस्म बताते हैं. आलू की दूसरी किस्मों के मुकाबले इसका छिलका पतला होता है और इसे छिलके के साथ खाया जाता है. छिलके में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला फाइबर पाचन क्रिया को मजबूत करता है.
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है लाल आलू: वसा व कार्बोहाइड्रेट फ्री होने के साथ कम मात्रा में सोडियम होने से हृदय रोगी भी लाल आलू का सेवन कर सकते हैं. इसमें बड़ी मात्रा में विटामिन सी होती है जोकि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करती है. विटामिन बी6, कॉपर, पोटाशियम व मैग्निशियम भी पाया जाता है. लाल आलू में कम मात्रा में कैलोरी व अधिक फाइबर होता है. इस खूबी के कारण हृदय रोग व कैंसर से बचाव करता है. भूनने व उबालने पर भी इसके स्वाद में फर्क नहीं आता है. लाहौल के किसान मोहन लाल, अशोक, नीरज का कहना है कि किसान अब संताना के अलावा लाल आलू का उत्पादन भी कर रहे हैं. किसान खुद उपयोग करने के अलावा बेच भी रहे हैं और मार्केट में भी धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी है. अन्य किस्मों के मुकाबले लाल आलू में पौष्टिक तत्व अधिक पाए जाते हैं.
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कुल्लू के लाल चावल का भी स्वाद चखेंगे राष्ट्रपति: राष्ट्रपति के खाने के मैन्यू में कुल्लू के लाल चावल (Kullu red rice) भी शामिल रहेंगे. बता दें कि लाल चावल में खराब कोलेस्ट्रोल को कम करने की असीम शक्ति है. साथ ही इसमें फाइबर, जिंक, आयरन, नियानिस तथा विटामिन डी जैसे तत्त्व भी पाए जाते हैं. लाल चावल में ऑक्सीडेंट ज्यादा पाए जाते हैं. कैंसर के उपचार के लिए भी इसका उपयोग करने पर शोध चल रहे हैं. लाल चावल हिमाचल में सैकड़ों सालों से पैदा हो रहा है, मगर जल स्रोतों के सूखने के साथ साथ लोगों के नकदी फसलों की तरफ रुझान बढ़ने की वजह से इसकी पैदावार कम होने लगी है.
बाथू की खीर व रौंगी का मद्रा भी मैन्यू में : मद्रा हिमाचल प्रदेश का एक लोकप्रिय व्यंजन है. हिमाचल में मद्रा दाल, मद्रा चना, या अन्य कोई भी डिश जो मद्रा रेसिपी से बनाई जाती है वह बहुत ही स्वादिष्ट होती है. इसे विभिन्न मसालों जैसे इलायची, लौंग, हल्दी पाउडर, दालचीनी और धनिया पाउडर के साथ तेल में अच्छी तरह से पकाया जाता है ताकि पकवान का स्वाद बेहतर हो सके. यह एक ऐसा भोजन है जो राज्य की खाद्य संस्कृति को दर्शाता है. हिमाचली व्यंजन न केवल अपने स्वाद के लिए, बल्कि अपनी सादगी और पौष्टिकता के लिए भी लोकप्रिय हैं. इसी तरह बाथू की खीर का भी राष्ट्रपति स्वाद चखेंगे जोकि खाने में बेहद ही स्वादिष्ट होती है.
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