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सिरसा: कृषि कानूनों के खिलाफ फिर बड़ा आंदोलन कर सकते हैं किसान - सिरसा कृषि कानून के खिलाफ धरना

तीन कृषि कानूनों के विरोध में शहीद भगत सिंह स्टेडियम में चल रहे पक्का मोर्चा धरनास्थल पर शनिवार से 11 किसान क्रमिक अनशन पर बैठेंगे. अगर इसके बाद भी सरकार ने इन कानूनों के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो वे मजबूरन क्रमिक अनशन को आमरण अनशन में भी तब्दील कर देंगे.

Farmers protest against agricultural law sirsa
सिरसा: कृषि कानून के खिलाफ एकजुट हो रहे किसान, कर सकते हैं बड़ा आंदोलन
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Published : Oct 23, 2020, 5:09 PM IST

सिरसा: केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में शहीद भगत सिंह स्टेडियम में चल रहे पक्का मोर्चा धरनास्थल पर शनिवार से 11 किसान क्रमिक अनशन पर बैठेंगे. शनिवार से ही किसानों का प्रचार जत्था उचाना के लिए रवाना होगा.

उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसानों के प्रति सही नहीं है. कोरोना की आड़ लेकर सरकार ने देश के पूरे ढांचे को क्षत-विक्षत कर दिया है. अकेला किसान वर्ग ही ऐसा था, जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था टिकी हुई थी. करोड़ों देशवासियों का पेट भरने वाला अन्नदाता भी इस सरकार की कुनीतियों के कारण दर-दर की ठोकरें खाने को विवश हो गया है.

हरियाणा किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि शनिवार से किसान रोजाना क्रमिक अनशन शुरू कर रहे हैं. अगर इसके बाद भी सरकार ने इन कानूनों के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो वे मजबूरन क्रमिक अनशन को आमरण अनशन में भी तब्दील कर देंगे.

उन्होंने कहा कि इस दौरान अगर किसी किसान भाई के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी. किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि सिरसा के किसानों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब जोर पकड़ने लगा है और प्रदेशभर में इस आंदोलन की गूंज सुनाई देने लगी है.

ये भी पढ़ें:पंजाब सरकार का कृषि कानूनों के खिलाफ अध्यादेश लाना किसानों के साथ धोखा- सीएम

चुनावों में किसानों के मुद्दों को लेकर जीत हासिल करने वाले लोग वोट देने वाले इसी किसान के समक्ष आने से भी परहेज कर रहे हैं. वोट लेने के बाद जीत हासिल कर सत्ता के लालची ये लोग अब भूमिगत होकर केंद्र सरकार द्वारा रचे गए इस खेल को चुटकियां लेकर देख रहे हैं. किसानों के लिए इनके दिलों में कोई हमदर्दी नहीं.

सिरसा: केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में शहीद भगत सिंह स्टेडियम में चल रहे पक्का मोर्चा धरनास्थल पर शनिवार से 11 किसान क्रमिक अनशन पर बैठेंगे. शनिवार से ही किसानों का प्रचार जत्था उचाना के लिए रवाना होगा.

उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसानों के प्रति सही नहीं है. कोरोना की आड़ लेकर सरकार ने देश के पूरे ढांचे को क्षत-विक्षत कर दिया है. अकेला किसान वर्ग ही ऐसा था, जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था टिकी हुई थी. करोड़ों देशवासियों का पेट भरने वाला अन्नदाता भी इस सरकार की कुनीतियों के कारण दर-दर की ठोकरें खाने को विवश हो गया है.

हरियाणा किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि शनिवार से किसान रोजाना क्रमिक अनशन शुरू कर रहे हैं. अगर इसके बाद भी सरकार ने इन कानूनों के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो वे मजबूरन क्रमिक अनशन को आमरण अनशन में भी तब्दील कर देंगे.

उन्होंने कहा कि इस दौरान अगर किसी किसान भाई के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी. किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि सिरसा के किसानों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब जोर पकड़ने लगा है और प्रदेशभर में इस आंदोलन की गूंज सुनाई देने लगी है.

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चुनावों में किसानों के मुद्दों को लेकर जीत हासिल करने वाले लोग वोट देने वाले इसी किसान के समक्ष आने से भी परहेज कर रहे हैं. वोट लेने के बाद जीत हासिल कर सत्ता के लालची ये लोग अब भूमिगत होकर केंद्र सरकार द्वारा रचे गए इस खेल को चुटकियां लेकर देख रहे हैं. किसानों के लिए इनके दिलों में कोई हमदर्दी नहीं.

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