करनाल: हरियाणा में बेटियां सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खुद का भविष्य तो संवार ही रही हैं, साथ ही साथ अन्य बेटियों को भी रोजगार दे रही है. करनाल की बेटियों ने भी ऐसा ही कारनामा किया है जहां सरकार की योजनाओं से जुड़कर बड़ी संख्या में बेटियां आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं. यहां ऐसी अनेक महिलाएं हैं जो कृषि क्षेत्र से लेकर बिजनेस में अपनी पहचान बना रही हैं. शहर ही नहीं बल्कि गांव की महिलाएं भी सरकार की योजनाओं का फायदा उठाकर सफलता के पायदानों पर आगे बढ़ रही है.
करनाल में महिलाएं बन रहीं सशक्त: करनाल की कुछ ऐसी सफल बेटियां हैं जिन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं से जुड़कर खुद को न केवल अपने पैरों पर खड़ा किया बल्कि वह दूसरी महिलाओं को भी सशक्त बना रही हैं. करनाल के दहा गांव की कौशल रानी ने बताया कि पहले वह घर पर खाली रहती थी और रोजगार का कोई जरिया नहीं था. फिर उन्होंने सरकार की एक योजना के बारे में जाना और एलईडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण लिया. धीरे-धीरे वह इसमें पारंगत हुईं और आज वह न केवल खुद का बिजनेस कर रही है. बल्कि उनके साथ जुड़कर अनेक महिलाएं भी रोजगार पा रही हैं.
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डेयरी से लेकर कई क्षेत्र में कारोबार: ऐसी ही एक सफल महिला रेखा चौहान ने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से न केवल खुद की डेयरी स्थापित की बल्कि वह अन्य महिलाओं के साथ मिलकर दूध और उससे बने उत्पादों का व्यवसाय कर रही हैं. उन्होंने कहा कि वह आज इतनी सशक्त हैं कि और महिलाओं को भी रोजगार दे पा रही हैं. उन्होंने कहा कि अवसर मिले तो महिलाएं भी वह सब काम कर सकती हैं, जो पुरुष करते हैं.
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महिलाओं को वित्तीय साक्षरता के बारे में जागरूक कर रहीं मंजू देवी: महिलाओं को वित्तीय साक्षरता के बारे में जागरूक कर रही मंजू देवी ने कहा कि वह महिलाओं को सरकार की योजनाओं के बारे में बताती हैं ताकि वे अपना व्यवसाय स्थापित कर सकें. उन्होंने कहा कि सरकार की ऐसी कई योजनाएं हैं जो केवल महिलाओं के लिए हैं, जिसमें न्यूनतम ब्याज के साथ विभिन्न प्रोजेक्ट में सब्सिडी भीभी दी जाती है. उन्होंने कहा कि वह महिलाओं को बैंकों से जोड़कर उन्हें वित्तीय सहायता मुहैया कराती हैं, जिसका लाभ उठाकर करीब 2000 महिलाएं अपना खुद का व्यवसाय कर रही हैं.
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महिलाओं के स्वयं सहायता समूह के लिए कार्य कर रहीं आयुषी मान: वहीं, करनाल में स्वयं सहायता समूह चलाकर महिलाओं को विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने वाली जनकल्याण समिति की मुख्य कार्यकारी अधिकारी आयुषी मान ने बताया कि उनकी संस्था 2004 से महिलाओं के स्वयं सहायता समूह का कार्य कर रही हैं. उन्होंने कहा कि वह गांव-गांव जाकर 10 से 12 महिलाओं का समूह बनाती हैं, उसके बाद बैंक के माध्यम से उन्हें ऋण मुहैया कराया जाता है. उससे वह कोई ना कोई रोजगार शुरू करती हैं.
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अब तक हजारों महिलाओं को रोजगार: इन व्यवसायों में हस्तकला से लेकर डेयरी, खेती बाड़ी, अचार मुरब्बा एलईडी बल्ब सहित अन्य कार्य शामिल है. आयुषी नाबार्ड से इन महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिलवाती हैं, ताकि उनका कौशल विकास हो. उन्होंने कहा कि आईसीटी के माध्यम से कई महिलाएं जेलों में भी प्रशिक्षण देने जाती हैं. उनकी संस्था अब तक 22 हजार महिलाओं को किसी न किसी स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही है.