नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में चल रहे निगम कर्मचारियों के वेतन के मामले में गुरुवार को कोर्ट ने नॉर्थ एमसीडी को अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए कहा है. साथ ही गुरुवार को कोर्ट में दिल्ली सरकार और निगम के वकीलों के बीच में निगम अस्पतालों के संचालन को लेकर भी जमकर बहस हुई. जिसमें आरोप लगाया गया कि निगम अपने अस्पतालों का संचालन ठीक तरीके से नहीं कर पा रही है और ना ही लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं अच्छे से मिल पा रही हैं.
यदि निगम अपने अस्पतालों का प्रबंधन भली-भांति तरीके से नहीं कर सकती तो अस्पतालों को निगम दिल्ली सरकार या फिर केंद्र सरकार दे दे. कुछ साल पहले बकायदा ऐसा प्रस्ताव भी नॉर्थ एमसीडी के सदन में आया था जिसमें केंद्र को निगम के अस्पताल देने के लिए कहा गया था लेकिन इस पूरे प्रस्ताव को तब रेफरबैक कर दिया गया था.
इस बीच इस पूरे मामले पर नॉर्थ एमसीडी स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन (North MCD Standing Committee Chairman) छैल बिहारी गोस्वामी ने ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान कहा कि निगम अपने अस्पतालों का संचालन भली-भांति तरीके से इस आपात स्थिति में भी कर रही है.निगम ने क्षेत्र की जनता को अस्पतालों के माध्यम से हर संभव सुविधा आर्थिक बदहाली के बावजूद उपलब्ध कराई है.निगम के अस्पतालों पर इलाज के लिए लगभग 40 लाख जनता निर्भर करती है.
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दिल्ली सरकार पहले अपने प्रशासनिक व्यवस्था पर ध्यान दे.सबको पता है कि ऑक्सीजन को लेकर जिस दिल्ली सरकार ने इतना बवाल खड़ा किया.उसऑक्सीजन ऑडिट की क्या रिपोर्ट आई है.जिसको लेकर अभी भी दिल्ली सरकार सवालों के घेरे में है.
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बता दें कि वर्तमान समय में नॉर्थ एमसीडी बदहाल वित्तीय हालात से गुजर रही है. जिसके चलते निगम अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है. इस बीच स्टैंडिंग चेयरमैन का कहना है कि निगम अपने अस्पतालों को भलीभांति तरीके से चलाने में सक्षम है और चला भी रही है.आर्थिक संकट जो निगम के ऊपर है.उसकी प्रमुख जिम्मेदार दिल्ली सरकार है जो निगम को मिलने वाले अलग-अलग मध्य में फंड के पैसे को जबरन रोक कर बैठी है.
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