नई दिल्ली : केंद्र ने मंगलवार को कहा कि केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप के लोगों के सामने आने वाली समस्याओं का पता लगाना एक सतत प्रक्रिया है और वह समय-समय पर इनका समाधान करने के लिए उचित कार्रवाई करती है.
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही. प्रश्न पूछा गया था कि क्या केंद्र सरकार की लक्षद्वीप के लोगों के सामने आने वाली कठिनाइयों का पता लगाने के लिए कोई शिष्टमंडल भेजने की योजना है.
इसके जवाब में राय ने कहा, 'सरकार जनता के कल्याण को अपनी सभी गतिविधियों के केंद्र में रखती है. लोगों के सामने आने वाली समस्याओं का पता लगाना सतत प्रक्रिया है और सरकार समय-समय पर उनके समाधान के लिए उचित कार्रवाई करती है.'
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लक्षद्वीप को बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने समेत कुछ प्रस्तावों पर केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के विचार करने के बाद पिछले दिनों वहां स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए थे.
इस बात पर लाेगाें में है नाराजगी
लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण (LDA) के निर्माण के लिये जारी नवीनतम लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन मसौदा, 2021 के प्रति लक्षद्वीप के लोगों द्वारा व्यापक रूप से नाराजगी व्यक्त की गई है.
इसके तहत गोमांस पर प्रतिबंध और शराब (alcohol) की बिक्री को मंजूरी जैसे प्रस्तावों की आलोचना हाे रही है और इस द्वीप की स्थानीय आबादी के बीच चिंता बढ़ा दी है, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम रहते हैं.
लक्षद्वीप में चल रहे विवाद के बीच, ईटीवी भारत से बात करते हुए, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शेखर अय्यर (Shekhar Iyer) ने कहा, जो नियम प्रसारित किए गए हैं, वे मसौदा नियम हैं और अभी तक अंतिम रूप नहीं दिए गए हैं.
लक्षदीप काे लेकर यह है याेजना
विचार यह है कि वर्तमान सरकार चाहती है कि लक्षद्वीप (Lakshadweep) को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए और मालदीव की तरह इसका लाभ उठाया जाए.
साथ ही उन्होंने कहा कि दो बच्चाें से संबंधित नीति देश में पहले से ही है और जहां तक लक्षद्वीप में पर्यटन केंद्र बनाने का संबंध है विदेशी मेहमानों के लिए शराब परोसने काे विनियमित करने की आवश्यकता है.
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गौरतलब है कि लक्षद्वीप के नए प्रशासक ने कुछ नए नियमों को लागू करने का प्रस्ताव दिया है. उनका कहना है कि यहां के नेताओं का एक समूह भ्रष्ट चलन में शामिल है. उन पर रोक लगनी जरूरी है. इसलिए ये नियम लाए गए हैं. हालांकि, लक्षद्वीप के पूर्व प्रशासक रह चुके वजाहत हबीबुल्लाह मानते हैं कि नए नियमों की कोई जरूरत नहीं है. पुराने कानून से ही लक्ष्य साधा जा सकता है. उनका कहना है कि लक्षद्वीप को मालदीव मॉडल पर विकसित करने की सोच खतरनाक है.
ईटीवी भारत से बात करते हुए हबीबुल्लाह ने कहा कि लक्षद्वीप एनिमल प्रिजरवेशन रेगुलेशन की क्या जरूरत है. क्योंकि यहां के लोगों का मुख्य भोजन नन-वेज है. सी-फूड, क्रैब और ऑक्टोपस खाना पसंद करते हैं. यहां की ब्राह्मण आबादी गोजातीय जानवरों को खाते हैं. व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि पारिस्थितिकी के लिए गोजातीय (Bovine) प्राणी सही नहीं होते हैं, फिर भी उनके लिए नियमन की जरूरत नहीं है.
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पूर्व नौकरशाह हबीबुल्लाह (Ex bureaucrat Habibullah) ने कहा कि पटेल चाहते हैं कि लक्षद्वीप को मालदीव की तर्ज पर विकसित किया जाए. लेकिन पर्यावरणविद पहले ही ऐसे प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं. आईलैंड डेवलपमेंट ऑथरिटी ने मालदीव का दौरा किया था. उसके बाद उन्होंने बहुत ही गंभीरता से मालदीव मॉडल (Maldives Model) को लागू करने से मना कर दिया था. क्या वे चाहते हैं कि लक्षद्वीप (Lakshadweep) में भी मालदीव की तरह अतिवाद और चरमपंथी गतिविधि बढ़े. कृपया आपने दिमाग का इस्तेमाल कीजिए.