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कोयंबटूर में रेलवे ट्रैक पार करने वाले जंगली हाथियों की 24 घंटे निगरानी - Madukkarai-Palakkad route

तमिलनाडु और केरल के बीच पैसेंजर और गुड्स ट्रेनों के चलने के दौरान कोयंबटूर के मदुक्करई से केरल के पलक्कड़ तक 24 किलोमीटर के दायरे में जंगल पड़ता है. इस वजह ये रेलवे ट्रैक से होकर हाथी गुजरते हैं जिससे वे हादसे का शिकार हो जाते हैं. इसको देखते हुए वन विभाग द्वारा क्षेत्र में दो समूह बनाकर रेलवे ट्रैक पर निगरानी रखी जा रही है, जिससे हाथियों को हादसे से बचाया जा सके. पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

Wild elephants are monitored 24 hours a day
जंगली हाथियों की 24 घंटे होती है निगरानी
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Published : May 4, 2022, 10:20 PM IST

Updated : May 4, 2022, 10:44 PM IST

कोयंबटूर : पश्चिमी घाट के पलक्कड़ से होते हुए तमिलनाडु और केरल के बीच पैसेंजर और गुड्स ट्रेनों का संचालन किया जाता है. वहीं कोयंबटूर के मदुक्करई से केरल के पलक्कड़ तक लगभग 24 किलोमीटर का रेलवे ट्रैक वन क्षेत्र के पास स्थित है. इस वजह से 2002 से लेकर अब तक मदुक्कराई-पलक्कड़ रूट पर ट्रेन की चपेट में आने से 29 हाथियों की मौत हो चुकी है. इसके देखते हुए वन विभाग के द्वारा दो समूहों में रेलवे ट्रैक पार करने वाले जंगली हाथियों पर 24 घंटे निगरानी रखते हैं.

बता दें कि पिछले साल कोयंबटूर जिले के नवक्कराय के पास मैंगलोर-चेन्नई एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से एक गर्भवती हथिनी सहित तीन हाथियों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद वन विभाग ने रेलवे ट्रैक पार कर रहे जंगली हाथियों पर नजर रखने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं. इस दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि मारापालम से कांजीकोड तक ए और बी लाइन ट्रैक में लोको पायलटों के द्वारा ट्रेनों की स्पीड सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है.

एक रिपोर्ट.

इस बीच, मद्रास हाई कोर्ट हाथी की मौत के मामलों की सुनवाई कर रहा है. दूसरी तरफ रेलवे ट्रैक पार करने वाले हाथियों पर नजर रखने और उन्हें जंगल की ओर ले जाने के लिए वन विभाग के अधिकारी व अवैध शिकार रोधी निरीक्षक जुटे हुए हैं. वन रेंजर के निर्देश पर दो समूहों में सात अवैध शिकार विरोधी पहरेदारों के द्वारा ए और बी लाइन ट्रैक में हाथियों की आवाजाही की निगरानी भी की जाती है.

इस संबंध में फॉरेस्ट रेंजर करुणानिधि ने बताया कि हाथी अगर रेलवे ट्रैक के पास आ जाए तो हम शोर मचाकर उसे जंगल की ओर जाने के लिए प्रयास करते हैं. उन्होंने बताया कि एक टीम शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक और दूसरी टीम सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक निगरानी करेगी. वहीं वन क्षेत्र के नजदीक रेलवे ट्रैक पर अधिकतम 12 घंटे में तीन बार गश्त की जाएगी.उन्होंने कहा कि यदि हाथियों को पटरियों को पार करते देखा गया या फिर इस बारे में सूचित किया गया तो इस बारे में निगरानी टीम के द्वारा वालयार रेलवे स्टेशन को जानकारी दी जाती है.

इसी तरह लोको पायलट यदि हाथियों को पटरियों के पास घूमते हुए देखते हैं तो वो भी इस बारे में अवैध शिकार विरोधी पहरेदारों को अलर्ट करेंगे, इससे रेलवे ट्रैक में होने वाली हाथियों की मौत की घटनाओं को टाला जा सकेगा. वहीं अवैध शिकार पर नजर रखने वाले करुप्पुसामी का कहना है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी कई सालों से हम यहां खुशी-खुशी काम कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें - ट्रेन की चपेट में आने से तीन हाथियों की मौत

उन्होंने कहा कि पिछले साल नवक्कराय के पास हुई दुखद घटना ने हमें बहुत ज्यादा प्रभावित किया. उसके बाद से हम चाहते हैं कि इस तरह की कोई और घटना न हो. इस वजह से हम रेलवे ट्रैक पर 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि, ट्रेन के रास्ते में आते समय अचानक हाथी ट्रैक को पार करते हैं, इस कारण हम इंजन की ओर मशाल की रोशनी ऊपर और नीचे दिखाकर लोको पायलट को सिग्नल और अलर्ट करते हैं. इससे लोको पायलट का ध्यान इस ओर जाता है और वह ट्रेन की गति की स्पीड को नियंत्रित कर लेता है. उन्होंने कहा कि हाथी वन संपदा और संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं.

कोयंबटूर : पश्चिमी घाट के पलक्कड़ से होते हुए तमिलनाडु और केरल के बीच पैसेंजर और गुड्स ट्रेनों का संचालन किया जाता है. वहीं कोयंबटूर के मदुक्करई से केरल के पलक्कड़ तक लगभग 24 किलोमीटर का रेलवे ट्रैक वन क्षेत्र के पास स्थित है. इस वजह से 2002 से लेकर अब तक मदुक्कराई-पलक्कड़ रूट पर ट्रेन की चपेट में आने से 29 हाथियों की मौत हो चुकी है. इसके देखते हुए वन विभाग के द्वारा दो समूहों में रेलवे ट्रैक पार करने वाले जंगली हाथियों पर 24 घंटे निगरानी रखते हैं.

बता दें कि पिछले साल कोयंबटूर जिले के नवक्कराय के पास मैंगलोर-चेन्नई एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से एक गर्भवती हथिनी सहित तीन हाथियों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद वन विभाग ने रेलवे ट्रैक पार कर रहे जंगली हाथियों पर नजर रखने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं. इस दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि मारापालम से कांजीकोड तक ए और बी लाइन ट्रैक में लोको पायलटों के द्वारा ट्रेनों की स्पीड सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है.

एक रिपोर्ट.

इस बीच, मद्रास हाई कोर्ट हाथी की मौत के मामलों की सुनवाई कर रहा है. दूसरी तरफ रेलवे ट्रैक पार करने वाले हाथियों पर नजर रखने और उन्हें जंगल की ओर ले जाने के लिए वन विभाग के अधिकारी व अवैध शिकार रोधी निरीक्षक जुटे हुए हैं. वन रेंजर के निर्देश पर दो समूहों में सात अवैध शिकार विरोधी पहरेदारों के द्वारा ए और बी लाइन ट्रैक में हाथियों की आवाजाही की निगरानी भी की जाती है.

इस संबंध में फॉरेस्ट रेंजर करुणानिधि ने बताया कि हाथी अगर रेलवे ट्रैक के पास आ जाए तो हम शोर मचाकर उसे जंगल की ओर जाने के लिए प्रयास करते हैं. उन्होंने बताया कि एक टीम शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक और दूसरी टीम सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक निगरानी करेगी. वहीं वन क्षेत्र के नजदीक रेलवे ट्रैक पर अधिकतम 12 घंटे में तीन बार गश्त की जाएगी.उन्होंने कहा कि यदि हाथियों को पटरियों को पार करते देखा गया या फिर इस बारे में सूचित किया गया तो इस बारे में निगरानी टीम के द्वारा वालयार रेलवे स्टेशन को जानकारी दी जाती है.

इसी तरह लोको पायलट यदि हाथियों को पटरियों के पास घूमते हुए देखते हैं तो वो भी इस बारे में अवैध शिकार विरोधी पहरेदारों को अलर्ट करेंगे, इससे रेलवे ट्रैक में होने वाली हाथियों की मौत की घटनाओं को टाला जा सकेगा. वहीं अवैध शिकार पर नजर रखने वाले करुप्पुसामी का कहना है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी कई सालों से हम यहां खुशी-खुशी काम कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें - ट्रेन की चपेट में आने से तीन हाथियों की मौत

उन्होंने कहा कि पिछले साल नवक्कराय के पास हुई दुखद घटना ने हमें बहुत ज्यादा प्रभावित किया. उसके बाद से हम चाहते हैं कि इस तरह की कोई और घटना न हो. इस वजह से हम रेलवे ट्रैक पर 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि, ट्रेन के रास्ते में आते समय अचानक हाथी ट्रैक को पार करते हैं, इस कारण हम इंजन की ओर मशाल की रोशनी ऊपर और नीचे दिखाकर लोको पायलट को सिग्नल और अलर्ट करते हैं. इससे लोको पायलट का ध्यान इस ओर जाता है और वह ट्रेन की गति की स्पीड को नियंत्रित कर लेता है. उन्होंने कहा कि हाथी वन संपदा और संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं.

Last Updated : May 4, 2022, 10:44 PM IST
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