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रायपुर: पंडरी में अनाधिकृत कॉम्प्लेक्स निर्माण की जनहित याचिका हुई निराकृत, HC से नगर निगम को निर्देश - HC से नगर निगम को निर्देश

पंडरी स्थित बस स्टैंड में अनाधिकृत कॉम्प्लेक्स निर्माण को चुनौती देते हुए दायर की गई जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने निराकृत कर दिया है. रायपुर नगर निगम को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.

Chhattisgarh High Court
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय
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Published : Aug 20, 2020, 2:59 AM IST

बिलासपुर: राजधानी के पंडरी स्थित बस स्टैंड में अनाधिकृत कॉम्प्लेक्स निर्माण को चुनौती देते हुए दायर की गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए दिशा निर्देश के साथ निराकृत कर दिया है. बता दें कि रायपुर के रहने वाले गोविंदा बर्मन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया था. याचिका में बताया गया कि हाईकोर्ट ने 2013 में निर्माण को नक्शा के खिलाफ होने के कारण कॉम्पलेक्स को हटाने के निर्देश दिया था. इसके बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

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मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि इस विवाद को 2013 में ही निराकृत किया जा चुका है. इसलिए नगर निगम को कोर्ट ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश दिया कि वे अपना अभ्यावेदन नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत करे. क्योंकि 7 साल बाद उस निराकृत मामले को सुनने की आवश्यकता फिलहाल नहीं है.

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मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने रायपुर नगर निगम को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी करते हुए जनहित याचिका को निराकृत कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता रायपुर नगर निगम को लिखित में भी अन्य अनाधिकृत जगहों की जानकारी उपलब्ध करा सकता है. ताकि निगम उसका निराकरण कर सके.

बिलासपुर: राजधानी के पंडरी स्थित बस स्टैंड में अनाधिकृत कॉम्प्लेक्स निर्माण को चुनौती देते हुए दायर की गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए दिशा निर्देश के साथ निराकृत कर दिया है. बता दें कि रायपुर के रहने वाले गोविंदा बर्मन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया था. याचिका में बताया गया कि हाईकोर्ट ने 2013 में निर्माण को नक्शा के खिलाफ होने के कारण कॉम्पलेक्स को हटाने के निर्देश दिया था. इसके बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

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मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि इस विवाद को 2013 में ही निराकृत किया जा चुका है. इसलिए नगर निगम को कोर्ट ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश दिया कि वे अपना अभ्यावेदन नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत करे. क्योंकि 7 साल बाद उस निराकृत मामले को सुनने की आवश्यकता फिलहाल नहीं है.

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मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने रायपुर नगर निगम को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी करते हुए जनहित याचिका को निराकृत कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता रायपुर नगर निगम को लिखित में भी अन्य अनाधिकृत जगहों की जानकारी उपलब्ध करा सकता है. ताकि निगम उसका निराकरण कर सके.

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