रायपुर: कोरोना वायरस संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए 25 मार्च से मई तक पूरे देश में पूर्ण लॉकडाउन किया गया था. जिस वजह से बस, ऑटो, ट्रेन, फ्लाइट सभी को रोक दिया गया था. मई-जून में धीरे-धीरे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके बाद ट्रेन और फ्लाइट्स का संचालन शुरू हुआ, लेकिन बस और ऑटो को जून में शुरू किया गया. हालांकि लोग अभी भी बस और ऑटो में बैठने के लिए तैयार नहीं हैं.
अभी भी बड़ी मुश्किल से ऑटो और बस वालों को यात्री मिल रहे हैं, जिसकी वजह से ऑटोवाले अपने डीजल का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं.
सवारी के इंतजार में ऑटो वाले
अब हालत ये है कि लगभग दिनभर ऑटोवाले सिर्फ सवारी के इंतजार में स्टैंड पर खड़े रहते हैं. सवारी नहीं मिलने की वजह से आमदनी नहीं के बराबर हो रही है, जिससे उनका गुजारा चलाना भी मुश्किल हो गया है, ऊपर से बैंक का लोन जिसे समय पर जमा नहीं करने के कारण बैंकवाले भी दबाव बना रहे हैं. ऑटो ड्राइवर्स का कहना है कि पिछले 4 महीने से उनकी बिल्कुल कमाई नहीं हुई है, उस पर बैंक का कर्ज सता रहा है. ऑटोवालों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है.
पढ़ें: SPECIAL: कोरोना ने ऑटो चालकों की रोजी रोटी पर लगाया ब्रेक, सवारी नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
अनलॉक 5 में ऑटोचालक को राज्य सरकार द्वारा कुछ शर्तों और नियमों के साथ ऑटो चलाने की परमिशन दी गई है.
राज्य सरकार द्वारा ऑटो ड्राइवर्स के लिए नियम
- ऑटो में दो या तीन व्यक्ति से ज्यादा कोई नहीं बैठेगा.
- ऑटोचालक को ऑटो सैनिटाइज करना अनिवार्य है.
- ऑटोचालक को मास्क पहनना अनिवार्य है.
- ऑटो में बैठने वाले लोगों के बीच सोशल डिस्टेन्सिंग का ध्यान ऑटो चालक को रखना है.
ऑटो में सैनिटाइजर की व्यवस्था होनी चाहिए
पढ़ें: SPECIAL: राजधानी में बढ़ रही सड़क हादसों की संख्या, लोग हो रहे बेपरवाह
रोजी-रोटी चलाना भी हुआ मुश्किल
घर में ऑटोचालक को अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. लोगों से पैसे उधार लेकर जिंदगी चलानी पड़ रही है. कई ऑटो संचालक ऐसे हैं, जो ऑटो चलाना छोड़कर अब दूसरा काम करने में लग गए हैं.
'कमाई नहीं बैंक का लोन कैसे जमा करें'
ऑटो चालक बाबूलाल साहू का कहना है कि मार्च से पहले ही उसने नया ऑटो फाइनेंस करवाया था. 2 महीने किस्त चुकाने के बाद कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लग गया. जिसके बाद पिछले 6 से 7 महीने से उनका ऑटो खड़ा है. स्कूल-कॉलेज भी बंद है, ट्रेनें भी बंद है, जिससे अब सवारी नहीं के बराबर है. बाबूलाल का कहना है कि घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है, उस पर बैंक का लोन देना बड़ी मुसीबत हो गया है. उन्होंने कहा कि बैंक से भी लगातार दबाव बनाया जा रहा है.
कुछ ऑटो चालकों ने बताया कि बैंक वाले लोन चुकाने के लिए फोर्स कर रहे हैं, लेकिन उनके पास बिल्कुल पैसे नहीं है. उन्होंने बताया कि बैंक वाले थोड़े-थोड़े पैसे जमा करने को ही कह रहे हैं, लेकिन अगर वो बैंक में पैसे जमा करते हैं, तो उनका घर चलाना मुश्किल हो जाएगा.
ऑटो ड्राइवर्स ने बताया कि अगर सवारी मिलती भी है, तो उसमें भी कोरोना गाइडलाइन का पालन करना पड़ता है, और ऐसा नहीं करने पर उन्हें फाइन देना पड़ता है. परेशान ऑटोवालों ने बताया कि दो-तीन लोगों को ले जाने में कमाई तो कुछ नहीं होती, बल्कि उससे ज्यादा का उनका डीजल खर्च हो जाता है. उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि घर चलाएं या बैंक का लोन जमा करें.