बिलासपुरः छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर (Bilaspur) में बिलासपुर कांग्रेस कमेटी (Bilaspur Congress Committee) में नए शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद (City Congress President)की ताजपोशी हो रही है. शहर अध्यक्ष के कार्य को कांटो भरा ताज भी कहा जा रहा है. क्योंकि यहां बड़े नेताओं के आधा दर्जन से भी अधिक गुट है और अध्यक्ष को सभी को लेकर चलना होता है, जो कि आसान नहीं है. बिलासपुर में ये पद विजय पांडे (Vijay Pandey)को मिलेगा.
बिलासपुर कांग्रेस कमेटी (Bilaspur Congress Committee) में शहर अध्यक्ष का पद बड़ा और महत्वपूर्ण होता है. लेकिन बिलासपुर शहर के कांग्रेसियों की तासीर ही कुछ हटके होती है. वहीं, यहां के कांग्रेसी गुटों में रहना पसंद करते है और अपने नेता के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते है. फिर चाहे अपने कांग्रेस के दूसरे गुट से लड़ना ही क्यो न पड़े. अपने नेता और गुट के लिए बिलासपुर के कांग्रेसी मरने मारने को तैयार रहते है. यहां प्रदेश के दिग्गज नेताओं और मंत्रियों के अपने अलग-अलग गुट है, जो कि तकरीबन आधा दर्जन से भी है. जिनके नेता दिग्गज के साथ ही प्रदेश की राजनीति में अपनी अच्छी खासी दखल रखते है. साथ ही अपने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए वे जी तोड़ मेहनत भी करते हैं. ऐसे में सभी गुटों के बीच तालमेल बिठाकर चलना और पार्टी लाइन में काम करना और उनसे काम लेना बेहद मुश्किल हो जाता है.
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पहले भी सम्हाल चुके है अध्यक्ष पद पांडेय
विजय पांडेय पहले भी एक बार शहर अध्यक्ष का पद संभाल चुके हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल को बहुत बेहतर और सुचारू रूप से चलाया था. साथ ही वे सभी नेताओं के साथ तालमेल बिठाकर चल रहे थे. वैसे तो 14 - 15 साल पहले वो शहर अध्यक्ष थे और तब की स्थिति अलग थी और अब में काफी फर्क है. तब परिस्थितियां अलग थी और अब परिस्थितियां विपरीत है. तब विजय पांडेय अध्यक्ष रहते हुए प्रदेश के दो या 3 गुट के लोगों को ही संभाल रहे थे, लेकिन अब लगभग आधा दर्जन से भी ज्यादा गुट हो गए हैं. सभी नेता अपने गुट के कार्यकर्ताओं को तवज्जो भी कुछ ज्यादा ही देने लगे हैं. ऐसे में शहर अध्यक्ष का पद विजय पांडेय के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है.
नायक के पद से हटने को लेकर लोगों में संशय
विजय पांडेय से पहले शहर अध्यक्ष का पद प्रमोद नायक संभाल रहे थे और उन्हें जिला सहकारी बैंक का अध्यक्ष बना दिया गया है. इसके बाद उन्हें अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया था. इस मामले में कुछ गुट के कार्यकर्ताओं का मानना है कि हमारे नेता ने शहर अध्यक्ष बदलवा दिया है क्योंकि हमारे नेता के साथ उनकी बनती नही थी.
विजय पांडेय अब संभालेंगे पद
नायक के हटने के बाद विजय पांडेय शहर अध्यक्ष का ताज पहन रहे हैं. लेकिन उन्हें यह भलीभांति मालूम है कि इस ताज में कांटे भी बहुत है. उन्होंने सभी गुटों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अपने अच्छे संबंध बनाए हुए हैं. यही कारण है कि विजय पांडेय की ताजपोशी पर किसी भी गुट के नेता और कार्यकर्ता ने उंगली नहीं उठाई और बिना विरोध के विजय पांडेय शहर अध्यक्ष के पद पर आसीन हो गए. ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि भविष्य में विजय पांडेय को या विजय पांडेय से किसको तकलीफ होती है.
आपस में मिलकर काम करें कार्यकर्ता: विजय पांडेय
नवनियुक्त शहर अध्यक्ष विजय पांडेय के उद्बोधन ने यह तो साबित कर दिया है कि शहर में कई गुट चल रहे हैं और उनके अपने नेता जी अलग हैं. लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में यह कहा कि जब कांग्रेस की बारी आई तो सभी कांग्रेसी हो और एकजुट होकर कांग्रेस के लिए काम करें. विजय पांडेय ने आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए भी आह्वान किया कि सभी कार्यकर्ता मिलकर आपस में काम करें और कांग्रेस को जीत दिलाएं. उनका यह कहना था कि सत्ता में रहते हुए अगर चुनाव हार जाते हैं तो इससे बड़ी लानत कोई और नहीं होती. जिसे उन्होंने 40 सालों में देखते हुए अनुभव प्राप्त किया है और आने वाले समय में कांग्रेस विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाने अभी से सब को एक होने की जरूरत है.