पटनाः बाजारवाद के इस दौर में लोग मिट्टी से दूर होते जा रहे हैं. लेकिन मिट्टी के प्रति लोगों का मोह अभी भी खत्म नहीं हुआ है. इन दिनों पटना के चौक-चौराहे के किनारे राजस्थान और गुजरात से आये कारीगरों की ओर से निर्मित मिट्टी के बर्तन पटनावासियों को खूब लुभा रहे हैं.
'हजारों किलोमीटर का है सफर'
ये कारीगर हजारों किलोमीटर की सफर तय कर के पटना पहुंचे है. कारीगरों की माने तो पटना में मिट्टी के इन बर्तनों की अच्छी डिमांड है. कारीगरों का कहना है कि मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने से खाना शुद्ध और स्वादिष्ट बनता है.
मिट्टी के बर्तनों की बढ़ी डिमांड
रेड पॉटरी से बने यह बर्तन पुराने दौर की याद दिलाते हैं, जब हर घर में सिर्फ मिट्टी के बर्तन यूज होते थे. स्टील के हैंडल्स के चलते यह सेफ भी हैं. मिट्टी के बर्तन के खरीदार कहते हैं कि यह बर्तन साफ रहते हैं और हाइजीन प्रॉब्लम भी नहीं होती. मिट्टी से बने होने के चलते इन बर्तनों में रखे खाने में स्वाद और सोंधापन भी खूब रहती है.
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पटनावासियों को भा रहा मिट्टी का बर्तन
मिट्टी के बर्तनों को पटना के लोग काफी पसंद कर रहे हैं. पहले गांव के घरों में, झोपड़ियों में मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल होता था. अब बड़े-बड़े गाड़ी और बंगले वाले लोग मिट्टी के बर्तनों को ले जा रहे हैं और उसमें खाना खा रहे हैं. कहीं न कहीं ये बर्तन फिर से हमें अपनी मिट्टी से जुड़े होने का एहसास दिलाती है.