पटना: बिहार में जब शराब बंदी लागू की गई थी तब राज्य के प्रतिष्ठित पीएमसीएच हॉस्पिटल में नशा मुक्ति केंद्र खोला गया था. मगर अब यह विभाग सफेद हाथी बन कर रह गया है. पिछले 5 महीने से एक भी पेशेंट एडमिट नहीं हुए हैं. नशा मुक्ति केंद्र के कमरों में ताला लटका हुआ है और इसे कोरोना मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाकर रखा गया है.
5 महीने से नहीं आए एक भी मामले
पीएमसीएच के नशा मुक्ति केंद्र की हालत यह है कि इस विभाग के जिस कमरे में डॉक्टर बैठते हैं, उस कमरे के सीलिंग काफी टूटे हुए हैं. नशा मुक्ति केंद्र में ड्यूटी में तैनात पीएमसीएच के कर्मी राजकुमार ने बताया कि लगभग पिछले 5 महीने से यहां एक भी मामले नहीं आए हैं. अब इस विभाग के कमरों को कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व आइसोलेशन वार्ड बनाकर रखा गया है. उन्होंने बताया कि जब यहां आइसोलेशन वार्ड नहीं बनाया गया था तब नशा मुक्ति केंद्र में काफी मरीज आते थे. वहीं जब से यह नशा मुक्ति का विभाग बना है, तब से बंद चल रहा है.
100 बेड का डेडीकेटेड वार्ड
राजकुमार ने बताया कि अस्पताल में 100 बेड का कोविड-19 डेडीकेटेड वार्ड बना हुआ है. जिसमें कोरोना मरीजों का इलाज होता है. मगर केस बढ़ने की आपात स्थिति के लिए नशा मुक्ति विभाग के कमरों को रिजर्व आइसोलेशन वार्ड बनाकर रखा गया है.उन्होंने बताया कि जिस डॉक्टर की इस विभाग में जिस दिन ड्यूटी होती है, वह आकर बैठता है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब विभाग में किसी को एडमिट ही नहीं किया जा रहा तो, यहां डॉक्टर के बैठने का औचित्य ही क्या है.
22 पेशेंट एडमिट
गौर करने वाली बात यह है कि पीएमसीएच के कोविड-19 वार्ड में 22 पेशेंट एडमिट है. इनकी क्षमता 100 बेड की है इसके अलावा कॉटेज वार्ड में 22 बेड का अलग से रिजर्व आइसोलेशन वार्ड है, जहां नॉरमल कंडीशन के कोरोना मरीजों को रखा जाता है. इसके बावजूद जिस प्रकार से नशा मुक्ति केंद्र विभाग के कमरों को रिजर्व आइसोलेशन वार्ड बनाकर रखा गया है, इससे कहीं ना कहीं अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र का बने रहने का कोई औचित्य नहीं बनता है.