लखनऊः लखनऊ में मंगलवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 (Loksabha Elections 2024) एकदम सिर पर हैं. चुनाव से 10 दिन पहले भाजपा सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार (Yogi Cabinet Expansion) करना और जाति विशेष से जुड़े लोगों को मंत्री बनाना यह दिखाता है कि भाजपा एक जातिवादी पार्टी है. भाजपा खुद ही जाति को बढ़ावा दे रही है. वह विपक्ष पर जातिवादी होने का आरोप लगाती है.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा को क्या जरूरत पड़ गई है कि वह जाति विशेष के नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 400 और 80 पार का दावा कर रहे हैं. ठीक चुनाव से पहले यह मंत्रिमंडल विस्तार उनके सारे दावों की हवा निकल रहा है.
किसानों को राहत देने का सिर्फ दावा कर रही है सरकार: अजय राय ने कहा कि अचानक मौसम की मार से किसानों की कमर टूट गई है. सरकार की तरफ से किसानों के सर्वे करने का दावा तो किया जा रहा है. पर राहत देने के लिए सरकार की ओर से जो हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है. वह पूरी तरह ठप है. किसानों को फसलों के नुकसान के लिए कहां पर जाकर आवेदन करना है, सर्वे कैसे होगा, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल रही है. सरकार किसानों को राहत देने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है. जब तक अधिकारी सर्वे का काम पूरा करेंगे, तब तक किसान पूरी तरह से बर्बाद हो चुका होगा.
एसबीआई के सहारे सरकार किसको बचाना जा रही है: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष (UP Congress President Ajay Rai) ने इलेक्टोरल बांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से 30 जून तक समय मांगने पर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि एसबीआई 30 जून तक का समय मांग रही है. इसका मतलब साफ है कि सरकार इलेक्टोरल बांड को लेकर कुछ छिपाना चाह रही है. निश्चित तौर पर बड़े स्तर पर घोटाला किया गया है और सरकार इस घोटाले को छिपाने में जुटी हुई है.
सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड को खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को आदेश दिया था. वह चुनाव आयोग से 6 मार्च तक इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारियां शेयर करे. अदालत ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि सभी बॉन्ड्स की जानकारियां 13 मार्च तक अपनी वेबसाइट पर डाल दे. इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से किस पार्टी को किसने रुपये दान में दिए, यह सार्वजनिक हो जाता।