शिमला: कानून सबके साथ न्याय करता है भले ही अपराधी कितना ही बड़ा ओहदेदार हो और पीड़ित कितना ही साधनहीन और वंचित हो. कानून सबको एक नजर से देखता है. ताजा मामला सूरज कस्टोडिय डेथ से जुड़ा है. नाबालिग लड़की के रेप एंड मर्डर केस में निर्दोष लोगों को फसाना और फिर लॉकअप में पुलिस की पिटाई से एक नेपाली युवक सूरज की कस्टडी में मौत होने के मामले ने आईजी रैंक के अफसर जहूर जैदी का करियर बर्बाद कर दिया. सोमवार को सीबीआई की अदालत ने आईजी जहूर जैदी सहित डीएसपी मनोज जोशी व अन्य को उम्र कैद की सजा सुनाई. साथ ही इन्हें एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा.
कोटखाई के गुड़िया रेप एंड मर्डर केस की जांच के लिए गठित की गई एसआईटी के मुखिया जहूर जैदी बाद में कस्टोडियल डेथ मामले में दोषी पाए गए. सीबीआई ने आईजी जैदी सहित अन्य को 29 अगस्त 2017 को सूरज कस्टोडियल डेथ मामले में गिरफ्तार किया था. जैदी चार साल से अधिक समय विभिन्न जेलों में रहे. वे शिमला के आदर्श कारागार कंडा, कैथू जेल व चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में रहे. जहूर जैदी मार्च 2020 से अक्टूबर 2022 तक बुड़ैल जेल में रहे. उन्हें बाद में नियमित जमानत मिली थी. उल्लेखनीय है कि मई 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत में शिफ्ट किया था.
कौन हैं आईजी जहूर जैदी
आईजी जहूर जैदी उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं. उनका जन्म 1968 को हुआ था. जैदी 1994 बैच के हिमाचल कैडर के आईपीएस ऑफिसर हैं. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग और पुलिस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री की है. 2010 में उन्हें उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस पदक से भी सम्मानित किया है. अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने आईजी ट्रैफिक का पदभार भी संभाला था. इसके अलावा 2017 में उन्हें आईजी लॉ एंड ऑर्डर बनाया गया था. गुड़िया रेप एंड मर्डर केस के दौरान गठित एसआईटी का हेड उन्हें नियुक्त किया गया था.
गुड़िया रेप एंड मर्डर केस से जुड़ा है मामला
जिला शिमला के कोटखाई इलाके में एक स्कूली छात्रा के साथ दरिंदगी की गई. दसवीं की एक छात्रा स्कूल से घर के लिए चली, लेकिन रास्ते में उसके साथ दरिंदगी की गई. दुष्कर्म के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई. घटना चार जुलाई 2017 की थी. दो दिन बाद उसकी लाश मिली. इस घटना को गुड़िया रेप एंड मर्डर केस का नाम दिया गया. राज्य में तब वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी. सरकार पर दबाव पड़ा तो तुरंत आईजी रैंक के अफसर की अगुवाई में एसआईटी गठित की गई. तत्कालीन डीजीपी सोमेश गोयल की मौजूदगी में मीडिया के समक्ष आईजी जहूर जैदी ने केस को सॉल्व करने का दावा किया. उस समय आईजी जहूर जैदी ने गुड़िया रेप एंड मर्डर केस को निर्भया से जटिल केस बताया था, लेकिन बाद में कथित आरोपी सूरज की कोटखाई थाने के लॉकअप में हत्या हो गई.
गुड़िया रेप एंड मर्डर केस की टाइम लाइन
- 5 जुलाई को स्कूली छात्रा गुड़िया स्कूल से घर के लिए निकली, लेकिन पता चला कि छात्रा घर नहीं पहुंची तो परिजन तलाश करने के लिए निकले.
- 6 जुलाई 2017 की सुबह छात्रा का नग्न शव हलाइला गांव के निकट दांदी जंगल में एक गड्ढे में मिला.
- 7 जुलाई को छात्रा के शव का पोस्टमार्टम हुआ, जिसमें रेप की पुष्टि हुई.
- 8 जुलाई को मामले की गंभीरता देख कर शिमला के तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को कोटखाई में कैंप के लिए भेजा गया.
- 10 जुलाई 2017 को एसपी डीडब्ल्यू नेगी को जांच से हटाकर आईजी जहूर जैदी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई.
- 12 जुलाई को राज्य के सीएम के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर तथाकथित आरोपियों के फोटो शेयर हुए, जिन्हें कुछ ही देरी में हटा लिया गया.
- 12 जुलाई 2017 को ही हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर जल्द जांच पूरी करने का आदेश जारी किया था.
- 13 जुलाई 2017 को एसआईटी ने आरोपियों को पकड़ने का दावा किया और डीजीपी के साथ प्रेस वार्ता में जांच का खुलासा किया.
- 14 जुलाई को पुलिस जांच के तरीके से नाराज लोगों ने ठियोग में विरोध प्रदर्शन किया, घबराई राज्य सरकार ने अगले ही दिन सीबीआई जांच के लिए सिफारिश की.
- 23 जुलाई को सीबीआई ने इस केस में दो मामले दर्ज किए. अगले दिन सीबीआई की टीम शिमला पहुंची और जांच शुरू की.
- सीबीआई ने हाईकोर्ट में 2 अगस्त 2017 को स्टेट्स रिपोर्ट सौंपी। हाईकोर्ट ने सीबीआई को फटकार भी लगाई कि उसकी जांच क्यों नहीं पूरी हो रही। फिर 29 अगस्त को सीबीआई ने आईजी जैदी व आठ अन्य पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया.
- 16 नवंबर 2017 को सीबीआई ने शिमला के एसपी रहे डीडब्ल्यू नेगी को कस्टोडियल डैथ मामले में गिरफ्तार किया.
- जहूर जैदी को सुप्रीम कोर्ट से 5 अप्रैल 2019 को जमानत मिली थी. ट्रायल कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद वे फिर से न्यायिक हिरासत में रहे. जहूर जैदी कुल 4 साल 3 महीने हिरासत में रहे.
- शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी को 18 अप्रैल 2019 को 17 महीने जेल में बिताने के बाद जमानत मिली थी और अब सीबीआई की चंडीगढ़ अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया है.
- अक्टूबर 2022 में जहूर जैदी को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने नियमित जमानत दी थी.
- वर्ष 2019 में कस्टोडियल डेथ मामले में ट्रायल के दौरान जैदी सहित दो अन्य अफसरों का निलंबन बहाल किया गया था. तब राज्य में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार थी.
- 27 जनवरी 2023 को सुखविंदर सरकार के कार्यकाल में जैदी की सेवाएं बहाल की गई थी.
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