शिमला: कोरोना काल में राजधानी शिमला के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, जिसे रिपन अस्पताल भी कहते हैं. वहां इलाज के दौरान कोरोना संक्रमित महिला ने आत्महत्या कर ली थी. जिसमें आरोप लगाया गया था कि लापरवाही के कारण महिला की मौत हुई थी. इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी. राज्य सरकार ने भी इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को विभागीय कार्रवाई करने के लिए कहा था. अब प्रदेश सरकार ने रिपन अस्पताल शिमला में कोरोना संक्रमित महिला द्वारा आत्महत्या करने जुड़े मामले में तत्कालीन एमएस और अन्य स्टाफ कर्मियों को विभागीय कार्रवाई में बरी कर दिया है.
इस मामले में सरकार द्वारा हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई थी. इसके बाद मुख्य न्यायाधीश एम एस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने जनहित याचिका को बंद करने के आदेश पारित किए. कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पीड़ित पक्ष को छूट दी कि यदि वे इस जांच रिपोर्ट से संतुष्ट न हों तो उक्त डॉक्टरों अथवा स्टाफ कर्मियों के खिलाफ उपयुक्त कार्यवाही में उन्हें प्रतिवादी बनाते हुए इसे चुनौती दे सकते हैं.
मामले पर पिछली सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार से डीडीयू में तैनात तत्कालीन कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर लोकेंद्र शर्मा, डॉक्टर साक्षी शर्मा और स्टाफ नर्स सुनीता देवी के खिलाफ चली विभागीय कार्यवाही की रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए थे. गौरतलब है कि 18 सितंबर को चौपाल के चाड़च गांव की महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी. बीपी की पेशेंट होने के कारण महिला को डीडीयू अस्पताल रेफर किया गया. इस महिला को रिपन अस्पताल की चौथी मंजिल में आइसोलेट कर दिया गया. चौपाल की रहने वाली 54 वर्षीय कोरोना संक्रमित महिला ने 22 सितंबर 2020 को आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद कोर्ट ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लिया था.
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