अजमेर. किशनगढ़ से निर्दलीय विधायक रहे सुरेश टांक ने शनिवार को जयपुर में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई. टांक की भाजपा में वापसी से किशनगढ़ में उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल है.
राजनीति के जानकारों का कहना है कि पूर्व विधायक टांक के भाजपा में जाने से किशनगढ़ ही नहीं, बल्कि जिले में भाजपा की स्थिति मजबूत होगी. टांक 2018 से पहले भाजपा से ही जुड़े हुए थे. उस समय टांक ने किशनगढ़ से भाजपा का टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें वसुंधरा सरकार में टिकट नहीं मिला. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की गुड बुक में टांक शामिल थे. टांक ने विधानसभा चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा और जीत हासिल की.
पढ़ें : किशनपुरा हत्याकांड का खुलासा: नाबालिग संग दो लोगों ने की युवक की हत्या, आरोपी पुलिस गिरफ्त में
गहलोत सरकार में टांक को काफी सहयोग मिला. हालांकि, गहलोत और पायलट के बीच सत्ता संघर्ष में सुरेश टांक ने पायलट का साथ दिया था और मानेसर में टांक पायलट के खेमे में नजर आए थे, लेकिन टांक की ट्यूनिंग गहलोत से भी खराब नहीं थी. विधानसभा चुनाव 2023 से पहले सुरेश टांक के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें काफी तेज थी, लेकिन टांक ने दोबारा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी थी.
साल 2018 में भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ चुके विकास चौधरी इस बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में खड़े थे. वहीं, भाजपा से अजमेर लोकसभा सांसद भागीरथ चौधरी उम्मीदवार थे. इस चुनाव में टांक को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन सांसद भागीरथ चौधरी के चुनाव हारने से भाजपा में उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद टांक को फिर से नजर आने लगी. गौरतलब है कि सांसद भागीरथ चौधरी और सुरेश टांक के बीच राजनैतिक अदावत रही है.
किशनगढ़ में टांक बनेंगे भाजपा का मजबूत चेहरा : मार्बल सिटी किशनगढ़ में मार्बल एसोसिएशन के सुरेश टांक अध्यक्ष रह चुके हैं. नगर परिषद में सभापति भी रह चुके हैं. विधायक काल में सुरेश टांक ने अपने जनाधार को मजबूत करने का काम किया है. पिछले चुनाव में टांक को करीब 90 हजार मत मिले थे, लेकिन वह जीत का सेहरा नहीं पहन पाए. कांग्रेस के टिकट से विकास चौधरी ने जीत दर्ज कार्रवाई थी.