नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध दिल्ली सरकार के 12 कॉलेज में फंड की कमी का मुद्दा पिछले करीब 10 साल से चला आ रहा है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार गठन के साथ ही इन कॉलेज के फंड में सरकार ने कटौती करना शुरू कर दिया था. सरकार का आरोप था कि कॉलेज फंड का दुरुपयोग कर रहे हैं. इसके बाद से इन कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल पा रहा है.
अब दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनाव के चलते एक बार फिर से यह मुद्दा गरमा गया है. दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) ने सरकार से अब तक की बकाया 185 करोड रुपये की राशि और आगामी तिमाही के वेतन के लिए 100 करोड रुपये की अतिरिक्त धनराशि देने की मांग की है.
शिक्षकों और कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन: डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर एके भागी ने बताया कि सरकार द्वारा समय पर फंड न देने की वजह से अभी तक शिक्षकों को दिसंबर का वेतन भी नहीं मिला है. वर्ष 2024-25 के बजट के लिए 12 कॉलेज से 585 करोड रुपए बजट एस्टीमेट था. जबकि सरकार ने बजट में मात्र 400 करोड रुपए का प्रावधान किया और उस 400 करोड रुपए को साल में चार बार में 100-100 करोड रुपए करके दिया. इस तरह सरकार द्वारा पहले से ही 185 करोड रुपए बजट में कम दिए गए. साथ ही अब दिसंबर माह में कॉलेजों के द्वारा रिवाइज्ड ऐस्टीमेट में 100 करोड रुपए का एस्टीमेट भेजा गया है.
सरकार से जल्द से जल्द फंड जारी करने की मांग: प्रोफेसर भगी ने सभी 12 कॉलेज के बजट एस्टीमेट और बजट में दिए गए कम पैसे के आंकड़ों को भी साझा किया है. प्रोफेसर एके भागी ने बताया कि सभी कॉलेजों में फीस और अन्य स्रोतों से आय के बाद सरकार से अनुदान की जरूरत होती है. कॉलेज के रेवेन्यू और खर्चे में अभी तक 185 करोड रुपए का कॉलेजों को घाटा है. इसलिए सरकार अविलंब 185 करोड रुपए घाटे का पैसा और 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त देकर कुल 285 करोड़ रुपए की राशि कॉलेजों को जारी करे, जिससे सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को समय से वेतन मिल सके. इस मामले में दिल्ली सरकार से भी उनका पक्ष मांगा गया लेकिन, अभी तक कोई जवाब नहीं मिला. डूटा अध्यक्ष द्वारा फंड की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आतिशी को लिखे गए पत्र का अभी कोई जवाब आया है.
सरकार कर रही प्राइवेटाइजेशन की कोशिश: डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर भागी ने बताया कि सरकार इन कॉलेजों के फंड में लगातार कटौती करके इनका प्राइवेटाइजेशन करना चाहती है. मौजूदा मुख्यमंत्री और तत्कालीन (एक वर्ष पहले) शिक्षा मंत्री आतिशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इन कॉलेजों को डीयू से अलग करने की भी मांग की थी. साथ ही इन कॉलेजों को ऑटोनॉमस कॉलेज बनाने के लिए कहा था. इससे सरकार की मंशा साफ हो जाती है कि सरकार इन कॉलेजों को प्राइवेटाइजेशन करके निजी हाथों में देना चाहती है, और अंधाधुंध फीस वसूलना चाहती है. भागी ने कहा कि शिक्षा के मॉडल का दम भरने वाली सरकार ने शिक्षा की व्यवस्था को इन 12 कॉलजों में ध्वस्त कर दिया है. इसमें सुधार की जरूरत है.
कॉलेजों में शिक्षकों के करीब 500 पदों पर लटकी है भर्ती प्रक्रिया: बता दें कि दिल्ली सरकार के इन 12 कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के स्थाई करीब 500 पदों पर परमानेंट भर्ती की प्रक्रिया भी लटकी हुई है. दिल्ली सरकार द्वारा गवर्निंग बॉडी में अपने लोगों को स्थान न मिलने के चलते इन पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं कराई जा रही है. वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दिल्ली सरकार द्वारा गवर्निंग बॉडी में नामित किए गए लोगों को शामिल नहीं किए जाने और गवर्निंग बॉडी का गठन न होने के चलते टकराव की स्थिति बनी हुई है. इसी वजह से पिछले 2 साल से इन कॉलेज में भर्ती प्रक्रिया ठप है.
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