देहरादून: कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का विवादों से पुराना नाता है. समय-समय पर महाराज कई बड़े बयान देकर विवादों में घिरते रहे हैं. इसी क्रम में शनिवार को उधमसिंह नगर जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बड़ा बयान दे दिया. इस बयान के बाद न सिर्फ महाराज बल्कि राज्य सरकार की भी फजीहत हो रही है. वही, विपक्षी दल कांग्रेस को भी बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है. विपक्ष अब राज्य सरकार पर हमलावर नजर आ रही है.
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार चर्चाएं इस बात की हैं कि उन्होंने अपने बयान को ही पलट दिया है. बीते 25 मई को कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से मुलाकात कर पत्र भी सौंपा. पत्र के माध्यम से महाराज ने मुख्यमंत्री से कहा था कि स्थानीय निवासियों के साथ-साथ सुदूर क्षेत्रों से पलायन कर आए श्रमिकों और कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रदेश के सभी अभियांत्रिक विभागों द्वारा कराए जाने वाले निर्माण कार्यों को छोटे-छोटे भागों न्यूनतम 20 लाख की सीमा तक विभक्त कर स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से कराया जाए.
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अब कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज अपने बयानों से ही पलटते नजर आ रहे हैं. बयानबाजी कर अपने बयानों से पलटना अमूमन देखने को मिलता है. लेकिन कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने न सिर्फ बयानों को पलटा, बल्कि उन्होंने जो प्रस्ताव श्रमिकों और कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भेजा था. उस प्रस्ताव को अब भाजपा कार्यकर्ताओं को लाभ देने के लिए बता दिया है. इससे साफ जाहिर है कि सतपाल महाराज पहले से ही भाजपा कार्यकर्ताओं को ही लाभ पहुंचाना चाहते थे. उन्होंने जानबूझकर कैबिनेट में यह प्रस्ताव पास करवाया कि श्रमिकों और कामगारों को इससे रोजगार उपलब्ध होगा.
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कार्यक्रम के दौरान महाराज ने कहा कि 'वो कार्यकर्ताओं की बात सुनेंगे और कार्यकर्ताओं के लिए करेंगे', उन्होंने कहा था कि सिंचाई विभाग के भीतर बड़े बड़े ठेके हैं, जिन्हें छोटे- छोटे ठेकों में बांटकर काम करना चाहिए. जिसे देखते हुए इस प्रस्ताव को कैबिनेट में लाकर, सिंचाई विभाग के ठेकों को छोटे-छोटे हिस्से में कर दिया गया है. जिससे कार्यकर्ताओं को काम मिले और राज्य की इकॉनामी बूस्ट हो'