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विवादों में गोरखपुर का 'मरीन ड्राइव', महोत्सव पर पड़ सकता है असर

गोरखपुर का मरीन ड्राइव कहे जाने वाला रामगढ़ ताल इस समय विवादों में घिरा हुआ है. माना जा रहा है अगर रामगढ़ ताल ऐसे ही विवादों में घिरा रहा तो इसका असर गोरखपुर महोत्सव पर भी देखने को मिलेगा.

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Published : Jan 9, 2020, 3:18 PM IST

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विवादों में गोरखपुर का रामगढ़ताल.

गोरखपुर:पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रामगढ़ ताल मौजूदा समय में विवादों में घिर गया है. इसे मरीन ड्राइव और जुहू चौपाटी भी कहा जाने लगा है, जो अपनी स्वच्छता और सुंदरता से गोरखपुर समेत दूसरे शहर के पर्यटकों को भी आकर्षित करने लगा था.

विवादों में गोरखपुर का रामगढ़ताल.

'512 एकड़ में फैला है रामगढ़ ताल, 182 करोड़ का जारी हो चुका है बजट'
512 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस ताल की सुंदरता को निखारने के लिए केंद्र सरकार ने 182 करोड़ से ज्यादा का बजट जारी किया था और कई तरह के कार्य भी हो रहे थे, लेकिन यह ताल मौजूदा समय में जलकुंभी से पटता जा रहा है. इसकी देखभाल की जिम्मेदारी उठाने वाले विभाग 'जल निगम' के अधिकारियों की नगर विधायक से तनातनी की वजह से इसकी सफाई लटक गई है. जिससे गोरखपुर महोत्सव में इस ताल क्षेत्र पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर बुरा असर पड़ सकता है.

'सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है रामगढ़ ताल'
रामगढ़ ताल गोरखपुर शहर के मध्य में स्थित है. यह प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह और मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा है. यहां पर जहां साउंड एंड लाइट शो पानी के साथ तालमेल करके शुरू किया गया है, वहीं वाटर स्पोर्ट्स का भी यह बड़ा केंद्र बन रहा है. इस क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग का भी खेल आयोजित होता रहता है. यही नहीं 11 जनवरी से आयोजित हो रहे है गोरखपुर महोत्सव में कई तरह की प्रतियोगिताएं यहां आयोजित होंगी.


दिव्यांगों की ट्राई साइकिल प्रतियोगिता से लेकर दौड़ और बाइकर्स के लिए यह किनारा बेहद पसंदीदा है, लेकिन जलकुंभी से जकड़ता जा रहा रामगढ़ ताल अपनी खूबसूरती खो रहा है. सफाई न होने से पानी से बदबू भी उठ रही है, जो पर्यटकों के ठहराव के लिए ठीक नहीं है.

'विधायक ने रामगढ़ ताल को जल निगम की मनमानी और अनदेखी बताया'
कमिश्नर गोरखपुर से इस विषय पर ईटीवी भारत ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन इस परियोजना को लेकर केंद्र से धन लाने और विधानसभा में आवाज उठाने वाले नगर विधायक डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल ने इसे जल निगम विभाग के अधिकारियों की मनमानी करार दिया है. जिनकी अनदेखी से ताल की सूरत बिगड़ रही है.

वहीं स्थानीय लोगों ने भी ताल के बिगड़ते स्वरूप पर चिंता जाहिर की है. लोगों का कहना है कि जैसी उम्मीद थी, वैसा यह ताल बन नहीं पाया. जल निगम के अधिकारियों को शहर में चल रही कई परियोजनाओं में देरी और गुणवत्ता को लेकर नगर विधायक ने डांट लगाई थी, जिसके बाद से यहां के अधिकारी छुट्टी पर जाने लगे. नतीजा ताल में गंदगी बढ़ने लगी और वह अन्य विभागों को जिम्मेदार ठहराकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं, लेकिन इस सब के बीच गोरखपुर का यह पर्यटन केंद्र विवाद और गंदगी का शिकार हो गया.

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