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उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नाक के रास्ते कोरोना वैक्सीन डोज देने का ट्रायल - भारत बायोटेक

कानपुर में पहली बार कोरोना की इंट्रा नेजल वैक्सीन (बीबीवी 154) का ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल मंगलवार को शुरू हुआ. भारत बायोटेक ने इसे वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की मदद से विकसित किया है.

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Published : Aug 31, 2021, 7:42 PM IST

कानपुर: शहर में मंगलवार को नाक के रास्ते कोरोना वैक्सीन डोज देने का ट्रायल शुरू हुआ. पहले दिन प्रखर हॉस्पिटल में भारत बायोटेक की इंट्रा नेजल वैक्सीन का तीस वालेंटियरों पर ट्रायल हुआ. सभी वालेंटियर स्वस्थ हैं. भारत की कोवैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक ने कोरोना वैक्सीन को लेकर एक और बड़ा कदम उठाया है.

जानकारी देते प्रखर हॉस्पिटल के एमडी डॉ. जीएस कुशवाहा

अब कंपनी ने नाक के रास्ते वैक्सीन डोज देने का परिक्षण शुरू कर दिया है. कानपुर के प्रखर हॉस्पिटल में मंगलवार को इस वैक्सीन का पहला ट्रायल तीस वालेंटियर पर किया गया. भारत बायोटेक ने अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन (Washington University School of Medicine) की मदद से इस वैक्सीन का निर्माण किया है.

इस नेजल वैक्सीन को लेकर कानपूर के वालेंटियर में काफी उत्साह नजर आया. प्रखर हॉस्पिटल कोवैक्सीन का भी ट्रायल सेंटर था. हॉस्पिटल के निदेशक डाक्टर जीएस कुशवाहा ने खुद वालेंटियर को अपने हाथ से नेजल वैक्सीन दी. इसके पहले सभी वालेंटियर के आवश्यक टेस्ट किये गये. डॉ. कुशवाहा ने कहा कि पहले चरण में हमें पचास लोगों पर इसका ट्रायल करना है.

उन्होंने कहा कि इसमें तीस लोगों पर ट्रायल हो चुका है. सभी वालेंटियर को नाक के रास्ते वैक्सीन दी गई. सबको पहले दो-दो बूंद ड्रॉप नाक के छिद्रों में डाली गई. उसके पांच मिनट बाद फिर दो-दो बूंद ड्रॉप डाली गई. वैक्सीन के बाद कुछ देर उनको निगरानी में रखा गया. उसके बाद सभी आराम से अपने घर चले गए. किसी को कोई शिकायत नहीं हुई.

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डॉ. जीएस कुशवाहा ने बताया कि 28 दिनों बाद इन सबको दूसरे ट्रायल के लिए बुलाया जाएगा. इस ट्रायल में 18 से 65 वर्ष तक की उम्र के लोगों को लिया गया. पैंसठ वर्ष की बुजुर्ग महिलाएं भी इस ट्रायल में शामिल हुईं. इनको नेजल वैक्सीन काफी आसान लगी. नेजल वैक्सीन के ट्रायल में शामिल हुए वालेंटियर ने बताया कि नेजल वैक्सीन लेना काफी आसान रहा और उनको कोई परेशानी नहीं हुई.

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