भरतपुर. देश में हुए लॉकडाउन के बाद मजदूर अपने-अपने घरों की तरफ पलायन कर रहे हैं. सरकार ने मजदूरों को घर तक पहुंचाने के बस सेवाएं भी शुरू कर दी है. बसें सभी मजदूरों को उत्तर प्रदेश बॉर्डर तक छोड़ रही है. उसके बाद मजदूरों को उत्तर प्रदेश की रोडवेज बसें मिल जाती है. जिसके बाद अब मजदूरों को घर जाने में काफी आसानी हो रही है.
रविवार को केबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि प्रदेश सरकार ने एक अच्छा फैसला किया है कि जो मजदूर तबके लोग है, उनको बसों से बॉर्डर तक छोड़ा जा रहा है. पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने बसें शुरू नहीं कि थी जिसके कारण वहां मजदूरों की भीड़ इकट्ठी होती जा रही थी. जिसके बाद बॉर्डर के पास के लोगों ने इसकी शिकायत की और मुख्यमंत्री गहलोत से बात की तो उन्होंने आनन-फानन से बात कर उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसें शुरू करवाई.
उन्होंने बताया कि राजस्थान में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगे हुए हैं. अब सोशल डिस्टेंसिंग कम हो गई हैं क्योंकि एक बस में 80 लोग सवार हैं, लेकिन सरकार का सिर्फ एक ही मानना है कि जो लोग बाहर के हैं, वे लोग सुरक्षित अपने घर पर पहुंचे. अब कालाबाजारी की शिकायतें काफी सामने आ रही है. अगर कोई भी ऐसा मामला सामने आता है तो ऐसे व्यपारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही इस जानलेवा बीमारी से लड़ने के लिए मेडिकल टीमें भी काम कर रही है, लेकिन जनता को भी जागरूक होना पड़ेगा. शट डाउन में जो छूट दी गई है, उसका दुरुपयोग भी हो रहा है.