भोपाल।Tokyo Olympics 2020 में भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team) ने 41 साल बाद मेडल हासिल किया. 41 साल पहले जब हॉकी का एक स्वर्णिम दौर था, उस समय टीम में हॉकी की नर्सरी (Hockey Nursery Bhopal) कहे जाने वाला भोपाल का दबदबा होता था. हॉकी के 8 ओलंपियन भोपाल में बने हैं. इसके बावजूद अब भोपाल ही नहीं पूरे प्रदेश में हॉकी का नाम दिखाई नहीं देता. इसका कारण हॉकी संघों का आपसी विवाद है. जिसके चलते हॉकी गुमनामी के अंधेरों में पहुंचा चुका है. हाॅकी से जुड़े लोग और अधिकारी भी मानते हैं कि अगर आपसी विवाद नहीं होते, तो भोपाल और मध्य प्रदेश की हॉकी एक बार फिर दुनिया में जोहर दिखाएगी.
भोपाल के इन खिलाड़ियों के कारण चमकती थी हॉकी
भोपाल को हॉकी की नर्सरी के नाम से जाना जाता है. इस खेल में भोपाल से कई ऐसे नाम है जो ओलंपिक में पदक हासिल कर लौटे है. अहमद शेर खान, अहसान मोहम्मद खान, लतीफ उर रहमान, अख्तर हुसैन, इनामउर रहमान, असलम शेर खान, सैयद जलालुद्दीन रिजवी और समीर दाद. यह भोपाल के वो नाम है जिनके कारण हॉकी ओलंपिक में चमकती थी. लेकिन धीरे-धीरे भोपाल ही नहीं मध्य प्रदेश से हॉकी का खेल खत्म होने लगा.
अब शालेय हॉकी टीम बनाने के पड़े लाले
इसे दुर्दशा ही कहेंगे कि हॉकी की नर्सरी कहे जाने वाले भोपाल में एक स्कूली टीम बनाने के लाले पड़ जाते है. आठ ओलिंपियन और 20 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी वाले भोपाल में अब स्थिति यह है कि स्कूली टीम तो छोड़िए संभागीय शालेय हॉकी टीम ही नहीं बन पाती. टीम चुनने के लिए इंटर स्कूल टूर्नामेंट हुआ, तो स्कूलों में हॉकी की टीमें ही नहीं थी. इसका कारण मध्यप्रदेश में हॉकी संघों का विवाद है. हॉकी में दो से तीन संघ होने के चलते आपसी मनमुटाव और वर्चस्व की लड़ाई के चलते हॉकी गर्त में चली गई है.
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क्या है हॉकी संघों का आपसी विवाद?
भारतीय हॉकी महासंघ (IHF) के बनने के बाद से ही हॉकी में आपसी विवाद और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर कई संगठन अलग-अलग बनने शुरू हो गए थे. मध्य प्रदेश और भोपाल की नर्सरी में सबसे ज्यादा विवाद का कारण इनामउर रहमान के समय हुआ. भारतीय हॉकी फेडरेशन के सेक्रेटरी रहे रहमान ओबेदुल्ला गोल्ड कप (Obaidullah Gold Cup) में भी सर्वेसर्वा रहे. कहते है कि उनके रवैये और ओलिंपिक खिलाड़ियों को तवज्जो ना देने के कारण सभी इनसे अलग हो गए.
फेडरेशन में विवाद के कारण खत्म हुआ हॉकी
मध्य प्रदेश खेल विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर बालू सिंह यादव कहते हैं कि फेडरेशन में विवाद के कारण ही हॉकी के क्लब्स और संगठन खत्म हुए हैं. हॉकी के गिरते स्तर का मुख्य कारण हॉकी के संघ और संगठनों का आपसी विवाद हैं. वहीं यादव कहते है कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार काम कर रही हैं. सरकार ने 28 फीडर सेंटरों के साथ ही एस्ट्रो टर्फ वाले 15 स्टेडियम बनाने का लक्ष्य रखा हैं. जिसमें भोपाल, ग्वालियर, होशंगाबाद, सिवनी, जबलपुर, इंदौर और दमोह में एस्ट्रो टर्फ बन चुकी है.